अटलजी के अस्थि विसर्जन में राजनीति करना पड़ा भारी

अटलजी के अस्थि विसर्जन में राजनीति करना पड़ा भारी


हरिद्वार। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हरिद्वार में गंगा में अस्थि विसर्जन तो संपन्न हो गया, मगर मंत्री मदन कौशिक के लिए यह कार्यक्रम मुसीबत बन गया। अटल जी जैसे व्यक्तित्व के अस्थि विसर्जन को लेकर स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार में ताकतवर माने जाने वाले मंत्री मदन कौशिक ने जिस तरह से राजनीति की और अस्थि विसर्जन को अपनी राजनीतिक दुश्मनी निकालने का हथियार बनाया उससे आलाकमान मदन कौशिक से बेहद नाराज है।

अस्थि विसर्जन में अव्यवस्थाओं से बेहद खफा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर मदन कौशिक को उनके ही धुर विरोधी सतपाल महाराज के प्रेम नगर आश्रम में रविवार की देर शाम तलब कर लिया गया।

पार्टी के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, राष्ट्रीय संगठन मंत्री शिव प्रकाश, प्रांतीय सह प्रभारी संजय कुमार और प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने उन्हें जब प्रेम नगर आश्रम पंहुचने को कहा तो कभी भी आश्रम में कदम नही रखने की कसम खाने वाले मदन कौशिक को प्रेम नगर आश्रम पंहुचाना पड़ा। हालांकि बैठक में अंदर ना तो किसी कार्यकर्ता को जाने की इजाजत थी ना ही मीडिया को। कुछ स्थानीय विधायक भी बैठक में पंहुचे थे। बैठक में शिवप्रकाश, श्याम जाजू, संजय कुमार, अजय भट्ट, पयर्टन मंत्री सतपाल महाराज और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ही रहे।बैठक में क्या हुआ इस पर इनमें से किसी ने भी मीडिया से कोई बात नहीं की।

सूत्रों का कहना है कि बैठक में मदन को जमकर झाड़ पड़ी। बैठक में वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मदन से पूछा कि जब अस्थि विसर्जन के लिए कलश यात्रा शुरू करने के लिए प्रेमनगर आश्रम तय कर लिया गया था फिर उसे शांतिकुंज किसके कहने पर किया गया? मदन से पूछा गया कि शांतिकुंज से भी देर रात को जगह में परिवर्तन क्यों किया गया? श्याम जाजू ने मदन से जानना चाहा कि जब आपको सभी जिम्मेदारियां दे दी गई थी तो फिर अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में इतनी ज्यादा अव्यवस्थाएं क्यों थी? नेताओं ने मदन से दो टूक लफ्जो में कहा कि अटल जी के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम को लेकर आपने राजनीतिक मोहरा बनाकर ठीक नही किया है।

बैठक के बाद शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक काफी परेशान और असहज दिखाई दिए। जब मदन कौशिक से पूछा कि आप तो आश्रम में आते ही नहीं हो तो अचानक से आश्रम कैसे आ गए? बस यह सवाल सुनकर वे भड़क गए और कहने लगे कि मैं तो आता रहता हूं, और क्या अब मैं यंहा तुमसे टिकट लेकर आऊंगा ? मदन की झुंझलाहट बता रही थी कि आलाकमान अस्थि विसर्जन में अव्यवस्थाओं और राजनीतिक मोहरा बनाये जाने को लेकर मदन से ज्यादा ही नाराज है।

दरअसल मदन कौशिक और सतपाल महाराज में आपस मे ठने हुआ करीब डेढ़ साल हो गया है। जब भारी बारिश के दौरान रानीपुर मोड़ पर जल भराव होने के बाद मदन के खास तत्कालीन मेयर मनोज गर्ग ने आश्रम की दीवार तुड़वा दी थी। जिसे लेकर हुए हंगामे में सतपाल समर्थकों ने मनोज गर्ग पर हमला कर दिया था। तब से लेकर मनोज और मदन की सतपाल महाराज से आमने सामने की ठनी हुई है। तब से ही आश्रम में मदन और मनोज गर्ग के लिए नो एंट्री है। मदन ने महाराज से अपनी खुंदक निकलने के लिए ही अटल जी के अस्थि विसर्जन को मोहरा बनाया और प्रेम नगर आश्रम में तय हो चुके कार्यक्रम को निरस्त करवा दिया था। मगर अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में अव्यवस्थाओं को लेकर अस्थि विसर्जन के बाद अमित शाह के निर्देश पर आश्रम में ही बैठक रखी गई और उसमें मदन को तालाब किया गया तो मदन को ना चाहते हुए भी प्रेम नगर आश्रम में आना पड़ा।

मदन कौशिक के प्रेम नगर आश्रम में आने पर जब सतपाल महाराज से पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि मैंने नहीं बुलाया है वह खुद ही आ गया है। बहरहाल अटल जी के अस्थि विसर्जन को मदन द्वारा राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किये जाने और अस्थि विसर्जन में तमाम बद इंतजामो को लेकर आला कमान की नाराजगी क्या गुल खिलाती है और मदन के लिए कितनी भारी पड़ती है यह तो आने वाले दिनों में ही पता चल सकेगा।

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