अमेरिका की नौकरी छोड़ बेगूसराय में शिक्षा की अलख जगा रहे मुकेश

अमेरिका की नौकरी छोड़ बेगूसराय में शिक्षा की अलख जगा रहे मुकेश

जज्बा : एक साल पहले खुले विद्यालय में 750 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं; पत्नी भी बंटाती हैं बराबर का हाथ
बेगूसराय। किसी भी राष्ट्र अथवा समाज में शिक्षा सामाजिक नियंत्रण, व्यक्तित्व निर्माण तथा सामाजिक व आर्थिक प्रगति का मापदंड होती है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि स्वतंत्रता के बाद विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा व प्राविधिक शिक्षा का स्तर तो बढ़ा है, परंतु प्राथमिक शिक्षा का आधार दुर्बल होता चला गया। इसी चीज को अमेरिका से छुट्टी में अपने गांव तेघड़ा आये एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने समझा तो उसने एक एेसा निर्णय लिया जो बिरले ही ले पाते हैं। अमेरिका के एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्यरत पति-पत्नी ने नौकरी से इस्तीफा देकर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को समग्र शिक्षा देने का बीड़ा उठाकर एक प्राथमिक विद्यालय खोल दिया।
2017 में नर्सरी से पंचम वर्ग तक के लिए खोले गए विद्यालय में आज 13 जुलाई 2018 को करीब 750 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। आईआईएम बेंगलुरु से पास आउट तथा दुबई, न्यूजीलैंड आदि जगहों के बाद पांच साल तक अमेरिका में जॉब करने वाले मुकेश कुमार वर्णवाल ने बताया कि गांव से पढ़ा हूं और आगे बढ़ा हूं। छुट्टियों में जब भी घर आता तो शिक्षा को लेकर घर-परिवार में चर्चा करता, यहां के बच्चे बहुत प्रतिभावान हैं पर आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख पाते, तो हमारा लक्ष्य साफ था कि एक प्राथमिक विद्यालय खोला जाए। जहां समाज के हर तबके के बच्चे आकर पढ़ें, चाहे वह अमीर परिवार से या गरीब परिवार से।
हमारा यूएसए में बढ़िया (धनप्रद/लाभकारी) जॉब था जिसे छोड़कर मैं और मेरी जीवन-संगिनी अपने गांव आ गए। 2017 में हमने औगान, दहिया में तीन एकड़ जमीन में विद्यालय की नींव रखी और मात्र एक साल में जो प्राथमिक विद्यालय था, अब यहां मध्य स्तर तक कि पढ़ाई होने लगी। ऐसा इसलिए भी की यहां कोई वार्षिक शुल्क नहीं लगता, साथ ही विद्यालयी क्रियाकलाप, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम या अन्य गतिविधियों में पैरेंट्स से किसी भी तरह का सहायता शुल्क नहीं लिया जाता है। टैलेंटेड बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है, चाहे वो किसी भी धर्म या समाज से हों, सबको सामान शिक्षा दी जाती है।
नवोदय विद्यालय से पासआउट कर सॉफ्टवेयर इंजीनियर रह चुकी तथा वर्तमान में प्राचार्य का दायित्व निर्वहन कर रही पत्नी शालिनी प्रिया कहती हैं कि नवोदय से पढ़ाई की है तो वहां के वातावरण और शैक्षणिक व्यवस्था को यहां भी लागू किया गया है। जिस बच्चे के अंदर किसी भी प्रकार की प्रतिभा है, हम उन्हें निखारने का काम कर रहे हैं। चाहे वो खेल हो नृत्य, संगीत या पेंटिंग। शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देकर जरूरतमंद और टैलेंटेड बच्चों को पढ़ाने, आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। रंगकर्मी अंकुर आजाद कहते हैं कि आज के इस आर्थिक भागमभाग वाली जीवन रूपी दौड़ में फॉरेन में जॉब छोड़कर दूर देहात में शिक्षा दान करना हर किसी के बस की बात नहीं।

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