देश की पहली नेत्रहीन IAS हैं प्रांजिल पाटिल आंखों की रोशनी ना होने के बाद भी अपने जीवन को उजाला कर दिया

देश की पहली नेत्रहीन IAS हैं प्रांजिल पाटिल आंखों की रोशनी ना होने के बाद भी अपने जीवन को उजाला कर दिया

कुछ लोग किस्मत को दोष दे उसके सामने घुटने टेक देते हैं और कुछ अपने लगातार प्रयासों और अटूट विश्वास से अपनी किस्मत लिखते हैं। प्रांजल लेहनसिंह पाटिल जो कि नेत्रहीन हैं उन्हीं में से एक हैं जो किस्मत से लड़ स्वयं अपनी किस्मत बनाते हैं।

हाल ही में, आईएएस प्रांजल लेहनसिंह पाटिल ने केरल के एरनाकुलम के कलेक्ट्रट कार्यालय में उप-कलेक्टर के रूप में अपना पदभार संभाला। प्रांजल पाटिल, केरल कैडर की अब तक की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस अधिकारी हैं। सोमवार को इरंकुलुम कलेक्ट्रट में सभी अधिकारी प्रांजल से मिलने के लिए उत्साहित थे क्योंकि अपनी किसी भी कमी को प्रांजल ने अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया।

28 साल की प्रांजल महाराष्ट्र के उल्हासनगर से ताल्लुक रखती हैं। साल 2016 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की, जिसमें उनकी 773 वीं रैंक थी।

प्रांजल सिर्फ छह साल की थी जब उनके एक सहपाठी ने उनकी एक आँख में पेंसिल मारकर उन्हें घायल कर दिया था। इसके बाद प्रांजल की उस आँख की दृष्टि खराब हो गयी। उस समय डॉक्टर ने उनके माता-पिता को सूचित किया था कि हो सकता है भविष्य में वे अपनी दूसरी आँख की दृष्टि भी खो दें। और बदकिस्मती से डॉक्टर की कही बात सच हुई; कुछ समय बाद प्रांजल की दोनों आँखों की दृष्टि चली गयी।

पर उनके माता-पिता ने कभी भी उनकी नेत्रहीनता को उनकी शिक्षा के बीच नहीं आने दिया। उन्होंने प्रांजल को मुंबई के दादर में नेत्रहीनों के लिए श्रीमती कमला मेहता स्कूल में भेजा। प्रांजल ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा भी बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की और 12वीं में चाँदीबाई कॉलेज में कला संकाय में प्रथम स्थान प्राप्त किया

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