गुजरात के उपमुख्यमंत्री और सबसे युवा मंत्री के दो वीडियो हुए वायरल, दोनो ने दी सफाई

गुजरात के उपमुख्यमंत्री और सबसे युवा मंत्री के दो वीडियो हुए वायरल, दोनो ने दी सफाई

सोमनाथ/राजकोटगुजरात के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री नीतिन पटेल और विजय रूपाणी कैबिनेट के सबसे युवा सदस्य नागरिक आपूर्ति मंत्री जयेश रादड़िया के दो अलग-अलग वीडियो आज वायरल हो गये और इनको लेकर दोनो को सफाई देनी पड़ी।

श्री पटेल, जो कि संयोगवश अनुभव के लिहाज से राज्य के सबसे वरिष्ठ मंत्री भी हैं और श्री रादड़िया के जैसे ही पाटीदार समुदाय के ही हैं, का वीडियो खासा रोचक है। मात्र छह सेकंड के इस वीडियो में उन्हें अपने पुत्र और परिजनों के साथ विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में पूजा करते देखा जा सकता है। इसी दौरान जब उनके पुत्र दानपात्र में डालने के लिए पांच सौ रूपये का नोट निकालते हैं ताे वह उन्हें हाथ से रोक देते हैं। उनके पुत्र उनकी तरफ थोड़ा हैरतभरी नजर से देखते हैं पर हाथ जोड़े हुए श्री पटेल सिर हिला कर उन्हें ऐसा नहीं करने का इशारा करते हैं। इस बारे में श्री पटेल ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि इस निजी मामले को मीडिया में उछाला जाना सही नहीं है। वह विभिन्न मंदिरों में सपरिवार जाते रहे हैं और पूजा दान आदि करते रहते हैं। सोमनाथ मंदिर में उन्होंने चांदी की चौकी और अन्य चीजे दान में दी थी और वह चाहते है कि सभी परिजन एक साथ दान में पैसे दे ताकि कुछ बड़ी रकम दी जा सके।

दूसरी आेर, जेतपुर के विधायक और इंजीनयरिंग ग्रेजुयेट 37 वर्षीय श्री रादड़िया को एक अन्य वीडियो में उनके क्षेत्र के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा में काफी उग्र अंदाज में देखा जा सकता है। मूंगफली के फसल के नुकसान के लिए उनके क्षेत्र के लगभग 150 किसानों को बीमा के दावे की करीब पौने दो करोड़ की राशि की भुगतान में कथित देरी और इस मामले में बैंक की कथित लापरवाही को लेकर वह बैंक को बंद कराने का प्रयास करते हुए देखे जा सकते हैं। वह फोन पर बैंक के किसी आला अधिकारी से यह भी कहते सुने जा सकते हैं कि किसान अब और इंतजार नहीं करेंगे। बैंक को बंद कर दिया जायेगा। श्री रादड़िया जो स्वयं राजकोट जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन भी हैं, ने बाद में पत्रकारों से कहा कि बैंक की गलती से किसानों का फसल बीमा संबंधी प्रीमीयम समय से जमा नहीं हुआ था और इस वजह से 11 माह से किसानों को दावे का भुगतान नहीं हो पाया है। बार बार कहे जाने के बावजूद बैंक का रवैया नकारात्मक ही है। इसीलिए वह आपा खो बैठे थे।

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