हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बदइंतजामी

हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बदइंतजामी

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है और पुलिस और प्रशासन की बदइंतजामी के कारण शहर में गन्दगी के ढेर कूड़ाघर में तब्दील हो गये हैं। आलम यह है कि नमामी गंगे परियोजना के अधर में लटकने से गंगा में सीवर का पानी सीधे नदी में गिराया जा रहा है। जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही है।

हरिद्वार जिलाधिकारी दीपक रावत तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कृष्ण कुमार वीके ने शनिवार को बैरागी कैम्प पार्किंग पहुंच कांवड़ यात्रियों के लिए बनाये गये शिविरों, शौचालयों तथा चिकित्सा कैम्प का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी तथा एसएसपी ने व्यवस्थाओं को जांचने के लिए स्वयं कांवडिय़ों से बातचीत की। बैरागी पुल, दिव्यांग घाट आदि पर लगी स्ट्रीट लाइटें काम न करने की शिकायत पर श्री रावत ने विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता को इन्हें तत्काल सही कराने निर्देश दिये। सूत्रों के अनुसार कांवडिय़ों की भारी भीड़ के कारण पुलिस एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं धरी रह गयी है। राष्ट्रीय राजामर्ग पर भी कांवडियों का जमावाड़ा है। स्कूल, कॉलेज बंद कर दिये गये है। लोगों को दफ्तरों में पहुंचने में भारी दिक्कत हो रही है। प्रशासनिक कार्यवाही भी बुुरी तरह प्रभावित हो रही है। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने कांवड़ मेला शुरू होने से पहले दावा किया था कि किसी भी सूरत में हरिद्वार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को बन्द नहीं किया जाएगा। परन्तु जैसे जैसे कांवडिय़ों की भीड़ बढ़ती जा रही है। पुलिस के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। हरिद्वार में साफ सफाई का जिम्मा केआरएल कम्पनी एवं नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के जिम्मे है। परन्तु जगह-जगह गन्दगी के ढेर लगे हुए हैं। श्री रावत ने शुक्रवार रात स्वयं इन हालातों का जायजा लिया है। इस अवसर पर प्रभारी एमएनए श्री ललित नारायण मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट मनीष सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई हरिद्वार श्री कुडियाल, जोनल एवं सेक्टर मजिस्ट्रेट उपस्थित थे। कांवड मेला प्रभारी ललित नारायण मिश्र ने भी कूड़ा एकत्र कर निस्तारण करने वाली कम्पनी केआरएल कम्पनी द्वारा अभी तक खाद संयंत्र शुरू न कर पाने के लिए उन्हें चेतावनी जारी की है। कम्पनी द्वारा हरिद्वार शहर से एकत्रित किया जा रहा कचरा यहां जगजीत पुर के पास नगरपालिका की भूमि पर फेंका जा रहा है। परन्तु उसका निस्तारण कर खाद बनाने का काम नहीं किया जा रहा है, जिससे वहां कूड़े का अंबार लग रहा है। भारी बारिश के कारण यहां तीर्थ नगरी हरिद्वार के सीवर बंद हो गये है। हर की पौडी में भीमगोडे से सीवर का पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। लेकिन अधिकारी झूठे दावे कर समस्या के समाधान का दावा कर रहे है। उच्चतम न्यायालय के आदेशों को दर किनार करते हुए पुलिस प्रशासन ने कांवडियों को डीजे के साथ हुड़दंग मचाने की खुली छूट दे रखी है। जिससे चौपहिया वाहनों पर बड़े बड़े डीजे लगाकर कांवडिये पूरे हरिद्वार में दिन रात तेज ध्वनी से डीजे बजाकर स्थानीस निवासियों के लिए सिरदर्द बने हुए है। प्रधानमंत्री का स्वच्छता एवं खुले में शौचमुक्त का सपना यहां टूटता दिखाई पड़ रहा है। यहां आने वाले करोड़ों शिवभक्त कांवडियों के लिए मात्र कुछ ही अस्थायी शौचालय बनाए गये है। इसी कारण हर की पौडी के आसपास कांवडिये खुले में शौच कर रहे हैं। जिससे वहां गन्दगी एवं बदबू फैली से वातावरण दूषित हो रहा है। हरिद्वार नागरिक मंच के अध्यक्ष प्रो. सुनील बत्रा एवं संरक्षक सतीश जैन ने आरोप लगाया की प्रशासनकि व्यवस्थाओं में ढील के कारण कांवड़ मेला चरम पर पहुंचने के बाद अव्यवस्थाओं का शिकार हो रहा है। चारों तरफ गन्दगी ही गंदगी है। गंगा साफ होने की बजाय और प्रदूषित हो रही है। उन्होंने कहा कांवडियों की उदण्डता के डर से हरिद्वार के लोग घरों में बन्धक बन कर रह गये है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर केवल कांवडिय़े और उनके वाहनों का कब्जा है। दिल्ली -देहरादून जाने वाले मरीजों के लिए आफत बनी हुई है। प्रो. बत्रा ने कहा सरकार मेलों में नागरिक संगठनों से कोई राय मशवरा नहीं करती है। जबकि कांवड़ मेले के वृहद रूप को देखते इसके लिए सरकार को बजट का प्रावधान कुंभ मेले की तरह कर सड़क, बिजली, पानी एवं सुरक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। दूसरी ओर प्राशसनिक अधिकारी भी मेले को व्यवस्थित बनाने के लिए महज खानापूर्ति करते दिखाई दे रहे है। अब तक 20 लाख कांवडिये यहां से जल भर कर रवाना हो चुके है। अगले चार दिनों तक पुलिस एवं प्रशासन के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा के होगे क्योंकि कांवडियों की भारी भीड़ के साथ डाक कांवड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती होगी।

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