शौक पूरा करने के लिए सिरफिरे ने लगा दी सात घरों में आग, बुझाने के लिए खुद पहुंचा

शौक पूरा करने के लिए सिरफिरे ने लगा दी सात घरों में आग, बुझाने के लिए खुद पहुंचा


बर्दवान। दुनियाभर में लोगों के अजीबोगरीब शौक होते हैं लेकिन पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में पुलिस ने एक ऐसे सिरफिरे को गिरफ्तार किया है जिसने आग लगाने और सबसे पहले बुझाने का अपना शौक पूरा करने के लिए सात घरों में आग लगा‌ दी। न केवल दूसरों के बल्कि उसने अपनी गायों के रहने का ठिकाना भी सबसे पहले जला दिया था। उसका नाम अरिंदम भट्टाचार्य (22) है। वह भातार थाना इलाके के साहिबगंज का रहने वाला है। अपने गांव में खेती करके जीवन यापन करता है। गुरुवार शाम उसे गिरफ्तार किया गया है एवं पूछताछ के बाद शुक्रवार सुबह पूरी वारदात के बारे में खुलासा हो सका है। जिले के अतिरिक्त पुलिस सुपर प्रियव्रत रॉय ने इस बारे में बताया कि प्राथमिक तौर पर उसके दावे पर विश्वास करना संभव नहीं हो पा रहा था लेकिन बाद में उसने खुद ही पूरी कहानी बयान की है।

अरिंदम ने बताया है कि पहले गांव में कहीं भी कोई भी घटना होती थी या आग आदि लगती थी तो लोग उसे ही जिम्मेदार ठहराते थे जबकि इन वारदातों में वह शामिल नहीं रहता था। बार-बार गांव वालों की ओर से उसे दोषी ठहराए जाने के बाद उसके दिमाग में कई तरह के फितूर घूमने लगे थे। उसे आग लगाने और सबसे पहले बुझाने का शौक होने लगा। अगस्त महीने में उसने सबसे पहले अपनी खटाल जलाई और उसके बाद कुछ दिनों के अंतराल पर एक के बाद एक सात घरों में आग लगा दी।

वह यह काम बहुत सावधानी से करता था और आश्चर्यजनक रूप से आग बुझाने के लिए सबसे पहले पानी लेकर वहीं पहुंचता था। 29 अगस्त को उसने साहिबगंज के उत्तम दे के खटाल में आग लगाई थी। गुरुवार शाम घटी इस घटना के बाद घरवालों ने दावा किया था कि अरिंदम खटाल के पीछे घूम रहा था। संदेह के आधार पर पुलिस ने उसे गुरुवार रात हिरासत में लेकर पूछताछ की तो दूसरे दिन उसने पूरी वारदात का खुलासा किया। उसने बताया कि उसने न सिर्फ इन घरों में आग लगाई बल्कि सबसे पहले पानी लेकर बुझाने के लिए भी वहीं पहुंचता था। इस बारे में पूछने पर अरिंदम की मां कृष्णा भट्टाचार्य ने कहा कि वह इस बारे में कुछ भी नहीं कह सकती क्योंकि उसने सबसे पहले अपने ही घर के खटाल को आग लगाई थी।

बदला लेने के लिए ऐसा करते हैं लोग

इस बारे में पूछने पर मनोचिकित्सक सुजाता दास ने बताया कि अगर कोई गलती नहीं करें और बार-बार उसे किसी गलती के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए तो गुस्से में आकर इंसान उस अपराध को करने लगता है। अरिंदम का मामला भी इसी श्रेणी में है। कुछ दिनों के इलाज के बाद वह इस मानसिकता से बाहर निकल सकता है।


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