जीना इनसे सीखें : पैरों से करते हैं ट्रैक्टर से खेत जुताई व मशीन से चारा काटने का काम

जीना इनसे सीखें : पैरों से करते हैं ट्रैक्टर से खेत जुताई व मशीन से चारा काटने का काम



पलवल। बुलंद हौसले व कड़ी मेहनत के बूते किसी भी चुनौती पर पार पाया जा सकता है। वह चुनौती चाहे दिव्यांगता ही क्यों न हो। दिव्यांगता अभिशाप नहीं है, इसको गांव कोंडल के किसान ने स्पष्ट कर दिया है। दिव्यांग को चुनौती दे नई लकीर खींचने का काम दिव्यांग किसान धर्मवीर कर रहे हैं। किसान धर्मवीर दोनों हाथ न होने के बावजूद भी कृषि से संबंधित कार्य आसानी से कर लेते हैं।
धर्मवीर ट्रैक्टर से खेत जुताई व मशीन से चारा काटने का काम पैरों से करने में महारत हासिल है। दिव्यांग किसान को हौसला देने में उसका परिवार भी पीछे नहीं है। 52 वर्षीय धर्मवीर पिछले 35 सालों से खेती का कार्य कर रहे हैं।
उपमंडल हथीन के गांव कोंडल में किसान धर्मवीर के दोनों हाथ नहीं हैं। धर्मवीर के चेहरे पर थोड़ी-सी भी शिकन नहीं है कि उन्होंने अपने हाथ गंवा दिए हैं। वह आम लोगों की तरह रोजमर्रा के काम करते हैं। धर्मवीर बताते हैं कि वह मात्र 14 साल के थे जब उनके दोनों हाथ कट गए थे। 12 अप्रैल 1981 के दिन गेहूं निकालते समय थ्रेशर से उनके हाथ कट गए थे।
धर्मवीर का कहना है कि 'हाथ कट जाने का दुख हमेशा रहा है, लेकिन कभी कटे हुए हाथों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।' अपनी इसी कमजोरी को धर्मवीर ने ताकत बना कर इस्तेमाल किया| वह आज खेतों के काम से लेकर घर का सारा काम खुद करते हैं।
धर्मवीर की पुत्रवधू गीता ने का कहना है कि इतना सब होने पर कोई भी हिम्मत हार सकता है लेकिन उनके ससुर ने अब तक हिम्मत नहीं हारी है| वे बिना हाथ के हर काम करते हैं, जो सामान्य व्यक्ति करता है।
गांव कोंडल के सरपंच संदीप तेवतिया ने बताया कि धर्मवीर आज उन लोगों के लिए एक मिसाल बने हुए हैं जो लोग छोटी-छोटी कमजोरियों से तंग आकर जिंदगी से हार मान लेते हैं| हमें धर्मवीर से सीखना चाहिए कि अगर मन में लगन हो तो किसी भी चुनौती से निपटा जा सकता है।

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