रहस्य-रोमांच: वह बंद आंखों से सभी कुछ पढ़ लेती है?

रहस्य-रोमांच: वह बंद आंखों से सभी कुछ पढ़ लेती है?

- परमानन्द परमवह अन्य बन्दरों की तरह पेड़ों पर नहीं चढ़ पाती तथा इन्सानों की तरह ही गलियों में चलती है। वह रजाई में घुसकर सोती है, सुबह उठकर पानी से मुंह धोकर गिलास में चाय पीती है। उसे शीतल पेय बहुत ही पसन्द हैं। वह गांव के किसी भी घर में बेधड़क घुस जाती है और वहां के छोटे बच्चे को गोद में खिलाती है। वह मदिरा और सिगरेट भी पीती है। रामकली की सभी हरकतें मनुष्यों के समान ही हैं।
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पूरा बहादुर नामक एक गांव में एक बन्दरिया है जिसे वहां के लोग रामकली के नाम से पुकारते हैं। रामकली बन्दर की भाषा जानने की बजाय इन्सानी भाषा को पूरी तरह समझती हैं। वहां के निवासियों के अनुसार यह बन्दरिया पांच साल पूर्व कहीं से उस गांव में आ गयी थी।

उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर की रहने वाली ग्यारह वर्षीया रंजना को बंद आंखों से भी सब कुछ दिखता है। वह आंखें बन्द करके अपनी किताबों तथा अखबारों को बिना किसी रुकावट के पढ़ लेती है। रंजना के पिता प्रशान्त अग्रवाल के अनुसार एक दिन उनकी पुत्री ने उन्हें बताया कि आंखों में पट्टी बांधने के बाद भी उसे सब कुछ सामान्य रूप में दिखाई देता है तो उन्हें अपनी पुत्री के कथन पर विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने रंजना की आंखों पर पट्टी बांधकर अखबार पढऩे को दिया। रंजना ने बेधड़क अखबार पढ़कर अपनी बातों को सिद्ध कर दिया। प्रशान्त अग्रवाल कुदरत के इस करिश्मे को देखकर चकित रह गये। लोग इसे दैवीय चमत्कार मान रहे हैं।
वह सब्जी की दुकान तक अपने पिता को ले जाता था और गाजर-मूली की तरह मिर्च उठाकर खाने लगता था। यह बच्चा सामान्य बच्चों की तरह ही है किन्तु बोलता नहीं है। इसने जन्म के समय से ही मां के दूध को पीना पसन्द नहीं किया। मिर्च न मिलने पर वह बेचैन हो उठता है और मिर्च पर नजर पड़ते ही उस पर झपट पड़ता है।
बिहार के नवादा के गोदापुर निवासी मुन्ना चौधरी का आठ वर्षीय बालक गौरव अपने अनोखे अन्दाज में एक बार में दर्जनों कड़वी हरी मिर्चों को खाए जाता है। वह एक दिन में सैंकड़ों हरी मिर्च खा जाता है और उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं आती। उसके पिता मुन्ना चौधरी के अनुसार जब वह चार वर्ष का था, तभी से उसकी मिर्च खाने की आदत लग गयी।
कानपुर शहर का ही एक नौजवान है जो शीशे को पापड़ की तरह चबा-चबाकर मस्ती में खाता है। इस नौजवान का नाम है-सत्यभान। सत्यभान एक फैक्ट्री में मजदूरी करता है जो 1998 से ही शीशा खा रहा है। सत्यभान के अनुसार वह एक बार में छह ट्यूब लाइट और बारह बल्बों का शीशा खा सकता है। उसने एक बल्ब खाना शुरू किया था और धीरे-धीरे उसमें बढ़ोत्तरी करता गया। हालांकि शीशा खाना उसके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है किन्तु चिकित्सकों के मना करने पर भी वह अपनी इस बुरी आदत को छोड़ नहीं पा रहा है। वह कहीं न कहीं से खाने के लिए शीशों का इन्तजाम कर ही लेता है। पेट्रोल पीने और शीशा खाने की बुरी आदत से आप दूर ही रहें क्योंकि ये स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त ही हानिकारक होते हैं।
कानपुर नगर के चमनगंज इलाके का आठ वर्षीय बालक साजिद रोज लगभग चार लिटर पेट्रोल पी जाता है। साजिद गूंगा है और देखने में एक दम कोयले की तरह काला। उसके पिता अब्दुल के अनुसार बचपन में साजिद काफी गोरा और खूबसूरत था। पेट्रोल पीने की आदत ने ही उसे काला एवं बदसूरत बना दिया है। साजिद आस-पास खड़ी मोटर साइकिलों के पास चुपचाप जाता है और पाइप डालकर उनका सारा पेट्रोल गटक जाता है। साजिद की इस हरकत से न सिर्फ घरवाले ही बल्कि वहां के सभी लोग परेशान हैं। साजिद जब तक पेट्रोल नहीं गटकता, उसे चैन नहीं मिलता।
प्रकृति की विचित्रता से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। प्रकृति कभी-कभी जीवों को ऐसी शक्ति प्रदान कर देती है जो सामान्य प्राणी के लिए अद्भुत एवं कौतुहल का विषय बन जाता है। ऐसी ही कुछ अजीबोगरीब बातों की जानकारियां यहां प्रस्तुत की जा रही हैं जिसे पढऩे सुनने में अजीब-सा लगेगा किन्तु हैं सभी सत्य।

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