सपनों का रहस्यमय संसार

सपनों का रहस्यमय संसार

स्वप्न क्या है, इस बात की पुष्टि के लिए लंबे समय से इस पर विचार होता आया है, फिर भी आज तक इसकी पुष्टि संभव नहीं हो पाई है कि स्वप्न नींद में भटकना है या फिर लोकान्तर यात्रा।
पर मेरी समझ से जो घटनाएं दुनियां में असंभव, रास्ते की बाधक, और पहुंच से बहुत दूर हों, वही स्वप्न हैं।
चूंकि स्वप्नों में हमें तरह-तरह के लोगों से मुलाकात होती है, भिन्न-भिन्न स्थलों, मरूस्थलों और जलों का ज्ञान होता है तथा अनेक बातें ऐसी भी होती हैं जिसका आसार दुनिया में है ही नहीं।
दूसरे शब्दों में, चूंकि हम सामाजिक प्राणी हैं, इसलिए तरह-तरह की कल्पनाएं हमारे अंदर उबाल खाती रहती हैं जिनमें से कुछ कल्पनाएं तो क्षीण हो जाती हैं और कुछ मस्तिष्क में लिखा जाता है जिसकी तलाश, जिसका शौक और जो कल्पनाएं बचपन से होती हैं, वे ही प्राय: स्वप्न में हमें दृष्टिगोचर होती हैं।
स्वप्न के भी कई प्रकार होते हैं जैसे-
- अगर कोई व्यक्ति सुंदर नारी की कल्पना कर सोता है तो उसकी सपनों में उस नारी से मुलाकात होती है।
- अगर कोई व्यक्ति गंदी जगहों में अच्छे कपड़े पहने सोता है और अच्छी कल्पना करता है तो उसे गंदे सपने ही आते हैं।
- अगर कोई व्यक्ति गंदे वस्त्र पहनकर अच्छे बिस्तरों पर सोता है और गंदी कल्पना करता है तो उसे अच्छे सपने ही आते हैं।
- अगर कोई व्यक्ति चुस्त कपड़े पहन कर सोता है और अच्छी कल्पना करता है तो उसे सर्प डंसने के, मौत के तथा भयावह सपने आते हैं।
- अगर कोई व्यक्ति बिना कल्पना किये सोता है तो उसके सपनों में नई जगह, नये लोग तथा नाना प्रकार के चलचित्र आते हैं।
कभी-कभी तो सोने के उपरान्त आदमी, रोना चिल्लाना, हंसना आदि शुरू कर देता है जिससे आस-पास के लोग जग जाते हैं और वह उसी तरह करता ही रह जाता है।
इसके कुछ मुख्य कारण व निवारण हैं जैसे-
- सोने से पहले बिस्तरों को झाड़ लें। इससे नींद स्वच्छ व आनंदमय आती है।
- बिस्तरों पर फिजूल चीजें नहीं होनी चाहिए क्योंकि जब आदमी सोता है तो बेकार पड़ा सामान उसके अंगों से टकराता है और व्यक्ति सपने में महसूस करता है कि उसे काटा जा रहा है या कांटे चुभाये जा रहे हैं।
- बिस्तर पर सिर्फ एक ही तकिया होना चाहिए। इससे अकेले सोने का आनंद उठा कर लोग मजेदार सपने देखते हैं।
- लोगों को अलग-अलग बिस्तरों पर सोना चाहिए। इससे उन्हें नींद में एक दूसरे के शरीर का घर्षण नहीं लगता, जिससे लोग भयंकर सपनों से बचते हैं।
- आदमी सोया रहता है और कोई दूसरा गरज कर उसे जगाता है तब सोये आदमी के सपनों में भयानक दृश्य उपस्थित होता है तब वह घबरा कर उठता है।
- जब आदमी सो रहा हो और कोई उसके चेहरे पर पानी का छिड़काव करता है तो उसके सपनों में बरसात का दृश्य उपस्थित होता है और स्वयं को भीगते देखकर जग जाता है।
- जब आदमी सोया रहता है और उसे ठंडक महसूस होती है तो उसके सपनों में बर्फ के ठंडे पानी वगैरह का दृश्य उपस्थित होता है जिसे देखकर वह जगता है।
- जब आदमी सोया रहता है और उसे गर्मी लगती है तो उसके सपनों में उसे आग पर सेंका जाना या कम्बल ओढ़ाना मालूम होता है जिसे देखकर वह जग जाता है।
- जब आदमी सोया रहता है और उसके नाक के पास सुगन्धित या असुगन्धित वस्तुएं रख दी जाती हैं तो उसके सपनों में सुगन्धित का अच्छा और असुगन्धित का खराब सपना आता है तथा वह जग जाता है।
कभी-कभी तो व्यक्तियों के सपनों में एक ही दृश्य बार-बार आता है जिससे उसके जीवन में कुछ वैसा ही घटित होने की संभावना रहती है और कभी-कभी भविष्य सूचक सपनों के अतिरिक्त कुछ ऐसे भी सपने होते हैं, जिससे सोये में ही वयक्ति कुछ ऐसी भूल कर बैठता है जो कष्टदायक और विचारने योग्य होती है। अत: सपने न तो अनुभूति का नाम है और न ही लोकांतर गमन जैसी बात है। सच तो यह है कि वे अवचेतन मन के सृजन हैं जिनमें प्राय: तथ्य होता है और नहीं भी होता है जिससे सोने के बाद सपनों का आना-जाना लगा रहता है।
- धर्मवीर सिंह परदेशी

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