आकाशीय बिजली में है बड़ा दम

आकाशीय बिजली में है बड़ा दम

आकाशीय बिजली का हम सबको ही कभी न कभी सामना करना पड़ता है। जब बिजली चमकती या कड़कती है तो कई बार हम कांप उठते हैं। डर तो लगता ही है। हर साल हजारों लोग आकाशीय बिजली के कारण मर जाते हैं। बिजली मनुष्यों को ही नहीं मारती। वह मछली, पशु-पक्षी या वनस्पति आदि किसी को भी अपनी ज़द में ले सकती है।

पचासों वर्ष से वैज्ञानिक इस कोशिश में हैं कि बिजली गिरने का समय और स्थान ज्ञात हो जाए लेकिन अध्ययन में करोड़ों डॉलर खर्च करने के बावजूद अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। बिजली क्यों गिरती है, कैसे बनती है, यह सब जान लेने के बावजूद वैज्ञानिक इसके गिरने का पूर्वानुमान न लगा पाने पर हताश तो हैं लेकिन जानने की कोशिशें जारी हैं।

कुछ वर्ष पूर्व नासा के वैज्ञानिकों ने आकाश में कड़कती बिजली के कैमरे से चित्र लिए। अध्ययन कर कुछ नयी धारणाएं बनाईं। उन्होंने कहा कि मौसम में साल दर साल आ रहे बदलाव से बिजली गिरने की आशंकाएं ज्यादा बढ़ी हैं। इनके और बढऩे की स्थितियां संभावित हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि बिजली पानी की अपेक्षा धरती पर अधिक गिरती है क्योंकि धरती गर्मी काफी सोख लेती है लेकिन जिस तेजी से वह गर्मी सोखती है उसी तेजी से अपने से बाहर भी कर देती जबकि पानी गर्मी काफी सोख लेता है मगर वह गर्मी को जल्दी बाहर नहीं कर पाता। धरती पर इसलिए शायद ज्यादा बिजली गिरती है और दोपहर में बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होती हैं। आकाशीय बिजली की चमक में बड़ी ऊर्जा होती है। एक चमक में एक अरब वोल्ट के करीब ऊर्जा पायी जाती है।

हर बादल बिजली का नेगेटिव चार्ज लिए होता है। नेगेटिव चार्ज अलग-अलग चरणों में होते हैं। अगर यह चार्ज पॉजिटिव भाग के डेढ़ सौ फुट के दायरे में भी आ जाए तो बिजली बनने की पूरी संभावना होती है। अगर चार्ज काफी अधिक हो जाए तो बिजली गिरने की पूरी संभावना बन जाती है। यह बड़े अल्पतम समय में हो सकता है मसलन आधे सेकेंड में भी। जब बिजली गिरने की स्थिति बनती है तो बादलों के बीच भयानक गर्मी पैदा हो जाती है, सूर्य के तापमान से पांच गुणा अधिक तक।

बिजली गिरने के बारे में तमाम धारणाएं समाज में व्याप्त हैं। कहीं माना जाता है कि मामा-भांजा एक साथ जा रहे हों या कहीं खुले में हों तो उन पर गिरने की संभावना ज्यादा रहती है। कहीं काले सांप पर बिजली गिरने की धारणा है।

यह भी माना जाता है कि काली चीजों पर बिजली ज्यादा गिरती है मगर ये मिथ्या धारणाएं हैं। बिजली जब गिरती है तो कहीं भी गिर सकती है, पानी, हरे पेड़ या खाली धरती पर भी। तो आगे से आप ध्यान रखें, जब भी बिजली गिरे तो कोशिश करें खुले में न जाएं, किसी पेड़ के नीचे भी न रुकें।

- एपी भारती

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