रहस्य रोमांच: जब पान के चक्कर में एक राजा ने अपना मुकुट गिरवी रख दिया

रहस्य रोमांच: जब पान के चक्कर में एक राजा ने अपना मुकुट गिरवी रख दिया

पान खाने की आदत दो हजार साल पुरानी है। श्री लंका की प्रमाणित ऐतिहासिक पुस्तक 'महावासमा' में, जो पारसी में लिखी गई है, जिक्र आया है कि 504 ईसा पूर्व एक राजकुमारी को उसका प्रेमी हर मुलाकात के दौरान पान खिलाया करता था।

106 ईसा पूर्व दुतगमिनी और मालवारिया के बीच हुए युद्ध के संदर्भ में एक दिलचस्प तथ्य का उल्लेख है कि शत्रु आपस में पान खाए मुँह को देख कर अक्सर घायल होने का धोखा खा जाते थे । रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

भारत में 473 ईस्वी से पान के प्रयोग के प्रमाण मिलते हैं। आर्यों ने पान को स्त्रियों के लिए सौंदर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग किया । जिस तरह आज लिपस्टिक स्त्रियों के होंठों का सौंदर्य प्रसाधन है, उसी तरह पान उन दिनों उनके होंठों को खूबसूरत बनाता था ।

सम्राट अकबर के जमाने का इतिहासकार अबुल फजल अपनी किताब 'आईन -ए-अकबरी' में लिखता है, 'पान खाने से साँस की बदबू दूर होती है। यह भूख जगाता है और शान्ति प्रदान करता है।' मुगल शासक पान के बहुत रसिया थे। एक पान विशेषज्ञ उन के दरबार में होता था जो विशेष प्रकार के 'बीड़े' बनाता था।

मार्को पोलो, जान मार्शल, अदर रज्जाक, करेरी और गेसिया डीओटा जैसे विदेशी पर्यटकों और यात्रियों ने भारत के लोगों की पान खाने की आदत को बड़ी विचित्र मानते हुए दिलचस्प ढंग से लिखा है। 17वीं शताब्दी में आए एक डच पर्यटक डा. लिंचटन ने लिखा है, 'पान दाँतों की सुरक्षा, पेट की कीड़े-मकोड़ों से रक्षा और साँस की बदबू दूर करता है।'

शाहजहाँ के शासनकाल में आए एक पुर्तगाली पर्यटक मैनरीक ने भी यही बात लिखी है । एक अंग्रेज जान मार्शल जो 1658 से 1672 तक भारत में रहा, ने पान की उपयोगिता पर नया प्रकाश डाला। उसने लिखा कि भारत के लोग पान को गर्भनिरोधक के रूप में प्रयोग करते हैं। पान की जड़ों के चूर्ण को काली मिर्च के साथ मिला कर बनी गोली, गर्भनिरोधक का काम करती थी। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

पान की खातिर कश्मीर का राजा अनन्त (1028 से 1063 शासनकाल) तो पूरी तरह बर्बाद हो गया।यहाँ तक कि उसने पान और दूसरे अय्याशी के सामान की पूर्ति के लिए अपना मुकुट और राज चिन्ह तक गिरवी रख दिए।

पान कश्मीर की ठंडे जलवायु में पैदा नहीं हो सकता, इसलिए राजा को बाहर से महँगे दामों पर पान का आयात करना पड़ता था।एक पदमराज नाम का पान का व्यापारी राजा को पान सप्लाई करता था जिसके बदले राज्य की आमदनी का अधिकांश हिस्सा व्यापारी की जेब में चला जाता। राजा ने अपने हीरे जवाहरात ही नहीं बल्कि मुकुट और राज चिन्ह तक उसका कर्ज उतारने के लिए गिरवी रख दिए।

जब रानी सूर्यबाला ने देखा कि पान की खातिर राज्य तबाह हो रहा है तो उसने स्वयं राजपाट चलाने का फैसला किया। उसने राजमहल में होने वाली खर्चीली पार्टियों पर ही नहीं। बल्कि पान खाने पर भी पाबंदी लगा दी। उसने व्यापारी का कर्ज स्वयं अदा किया और राजमुकुट व अन्य राजकीय चिन्ह उससे वापिस लिए।

- गुरिन्दर भरतगढिय़ा

रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

Share it
Top