घर पर ही बनायें नर्सरी

घर पर ही बनायें नर्सरी

हरे-भरे पेड़ पौधे आंखों को सुख प्रदान करते हैं तथा वायु प्रदूषण को भी कम करते हैं। यदि मकान के आस-पास पेड़-पौधे लगाने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं हो तो छोटे-छोटे पौधे या फूल -पत्तियों को गमलों में लगाकर मकान के आस-पास के वातावरण को हरा-भरा व नयनाभिराम बनाया जा सकता है। इससे मकान की सजावट होगी, उसकी सुन्दरता में वृद्धि होगी, प्रदूषण रहित शुद्ध हवा प्राप्त होगी और मन और आंखों को शांति मिलेगी।
कुछ पौधे क्यारियों और गमलों में लगाए जाते हैं। इनमें कुछ ऐसे भी पौधे होते हैं जिन्हें घर की छत, बालकोनी और लॉन में लगाया जा सकता है तो कुछ पौधे और लताएं घर के अंदर भी गमलों में लगाए जाते हैं। पौधों को लगाने में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:-
- घर के आस-पास कभी भी आम, महुआ, जामुन व पीपल जैसे विशाल वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। इससे घर की धूप बाधित होगी और चिडिय़ों के बीट से छत और लान भरे रहेंगे। डाल टूटकर घर पर गिर सकती है जिससे जान माल की हानि हो सकती है।
- यदि आप इन पेड़ों को लगाना ही चाहते हैं तो इनके बोनशाई (बौनी नस्ल)को बड़े गमले में लगाएं। ये पौधे बड़े गमले में भी फलते फूलते हैं।
- कोई ऐसा पेड़ भी मकान के आस-पास न लगाएं जिनकी छाया मकान की दीवार या छत पर पड़े। यह वास्तु शास्त्र के अनुसार ठीक नहीं है।
- घर के मुख्य द्वार के सामने भी कोई ऐसा पेड़-पौधा न लगाएं जिसकी छाया द्वार पर या सीढिय़ों पर पड़ती हो। छाया सीढ़ी से तीन फीट दूर रहनी चाहिए।
- क्यारियों में फूल व हरियाली देने वाले छोटे पौधे, लताएं व कैक्टस लगाए जा सकते हैं।
- इनडोर पौधों को भी धूप की आवश्यकता होती है इसलिए इन्हें ऐसे स्थानों पर लगाएं जहां थोड़ी देर के लिए धूप अवश्य आती हो। यदि ऐसा संभव न हो तो महीने में एक-दो बार इनडोर पौधों को बाहर हल्की धूप में रखना चाहिए।
क्यारियां और पौधे:- लॉन की चारदीवारी या मकान के चारों ओर पौधे लगाये जानेवाली जगह को ईंटों से घेर दें। फिर उन्हें खोदकर सूखने दें। जब ढेले सूख जायें तो उन्हें फोड़कर घास वगैरह निकाल दें। अब इन्हें पानी से तर करके छोड़ दें। जब पानी सूखकर जमीन खोदने लायक हो जाये तो जमीन को खोदकर व ढेले को तोड़कर महीन बना दें। फिर खाद डालकर जमीन में अच्छी तरह मिलाकर समतल कर दें।
- पौधे लगाते समय पौधों की केवल जड़ को ही जमीन में लगाएं। तना एक इंच से अधिक मिट्टी में नहीं होना चाहिए। यदि पौधा बड़ा हो और खड़ा न रह रहा हो तो अलग से लकड़ी या रॉड गाड़कर उससे पौधे को बांध दें।
- इन क्यारियों में सब्जियां भी उगायी जा सकती है।
- सूरजमुखी, मिर्च के पौधे सदा हरे भरे रहते हैं और उन पर हमेशा सफेद छोटे फूल खिले रहते हैं। फल भी गुच्छों में और ऊपर की ओर लगते हैं जो देखने में बड़े सुंदर लगते हैं।
- क्यारियों में बड़ा बथुआ या लाल साग बोएं तो उन्हें कटिंग करके सुन्दर आकार दे सकते हैं। कटिंग से प्राप्त पत्ते साग के काम में आ जाएंगे।
- पौधों को विश्वसनीय नर्सरी से ही खरीदें।
खाद का उपयोग:-
- पौधों के लिए कम्पोस्ट खाद, जैविक खाद, घर की बची हुई बेकार खाद्य सामग्री के अवशेष, चावल व दाल के धोवन, सब्जी के छिलके, चाय पत्ती, आटे के चोकर आदि से बना खाद बहुत लाभदायक होता है। धोवन व पत्ती को सीधे डालें तथा अन्य को गड्डा बनाकर गाड़ दें और रोज सुबह उस पर पानी डालें। यह सड़ कर उत्तम खाद बन जायेगा।
- सरसों, तिल, नीम व तीसी आदि की खलियां, बकरी की मेगनियां व कंडे की राख आदि का भी खाद के रूप में इस्तेमाल कया जा सकता है।
- रासायनिक खादों या कीटनाशकों के प्रयोग से बचें। इनके प्रयोग से स्वास्थ्य और वातावरण दोनों पर बुरा असर पड़ता हैं
- कीटनाशकों के स्थानों पर नीम की खली, उसके पत्ते, तेल आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। गुरीच की पत्तियां, बबूल की पत्तियां और करेले की पतियों का कीटनाशक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
- सख्त तने वाले पेड़-पौधों में कीड़े लग जाएं तो उन्हें चाकू से खुरचकर कीड़े लगे हिस्से को निकाल देना चाहिए और उस पर मिट्टी का तेल या चूना पानी में घोलकर लेप कर देना चाहिए।
- पेड़-पौधों की पत्तियों पर लगे कीड़ों को दूर करने के लिए सप्ताह में एक बार नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए। 10 लीटर पानी में 250 ग्राम नीम का तेल मिलाकर स्प्रे मशीन से छिड़काव करें। जड़ के पास-पास की भूमि पर भी इसे छिड़कें।
गमले
यदि आप मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में रहते हैं या आपके मकान के आस-पास क्यारी बनाने के लिए स्थान नहीं है तो आप गमलों का व्यवहार करें। बाजार में मिट्टी और सीमेंट के बने गमले मिल जाते हैं जिनके पेंदे में छेद किया गया होता है।
गमलों में पौधे लगाने से पहले गमले के छेद पर प्लास्टिक की महीन जाली रखकर उस पर 1 इंच मोटी रेत की परत बिछा दें। इसके बाद खाद मिली हुई मिट्टी महीन करके गमले में भर दें। अब पौधे को लगाकर पानी के छींटे देकर मिट्टी को तर कर दें।
गमले को हमेशा धूप में रखें लेकिन तेज धूप हो तो उन्हें उठाकर छाया में रख दें।
गमले को छत की रेलिंग के किनारे, बालकोनी की रेलिंग के किनारे, सीढिय़ों की रेलिंग के नीचे लगाएं। इससे सुन्दरता बढ़ती है और मन को शांति मिलती है।
गमले में पानी तेज धार से नहीं बल्कि स्प्रे से पौधे को कवर करते हुए डालें। समय समय पर आवश्यकतानुसार खाद भी डालें लेकिन पानी प्रतिदिन सुबह ही डालें, शाम को नहीं। गर्मी के दिनों में रात 9 बजे के बाद तथा सर्दियों में 8 बजे के बाद पानी डालें। गर्म पौधा एकाएक ठंडा पानी पडऩे से गल जायेगा।
यदि मिट्टी में नमी है तो न गमले में पानी दें और न क्यारियों में। पानी देने के पश्चात् जब मिट्टी भुरभुरी हो जाए तो उसे भुरभुरा कर दें। इससे अधिक समय तक नमी बनी रहती है।
गमलों में नारियल का जूट या फोम के टुकड़े डाल देने से नमी अधिक दिनों तक बनी रहती है। गमले में मिर्च, टमाटर करेले, बैंगन, गोभी व जिमीकन्द भी उगाए जा सकते हैं।
मिट्टी और रेत समान मात्र में लेकर इसमें गोबर की खाद मिलाकर क्यारियों में एक इंच मोटा फैला दें और इसमें मूंगफली बो दें। इसके पौधे छोटे, घने और हरे होते हैं जो देखने में खूबसूरत लगेंगे और मूंगफली भी प्राप्त होगी।
मुख्य द्वार पर दोनों ओर नारियल लगाएं। इसे शुभ माना जाता है और देखने में सुंदर लगता है। नारियल लगाने के लिए 5 इंच व्यास का 4 इंच गहरा गड्डा खोद लें। इसमें बालू मिश्रित मिट्टी भरकर 1 किलो नमक मिला दें। इसमें नारियल का पौधा लगा दें और प्रतिदिन पानी दें।
गमला खरीदते समय चेक कर लें कि इसमें दरार या अतिरिक्त छेद तो नहीं हैं।
- राजा तालुकदार

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