पूर्वी द्वार का किला फतेह करने को भाजपा कह रही ‘हर-हर मोदी, चक दे मोदी’

पूर्वी द्वार का किला फतेह करने को भाजपा कह रही ‘हर-हर मोदी, चक दे मोदी’

बॉलीवुड का एक मशहूर डायलॉग है पिक्चर अभी बाकी है…वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के कल रविवार को हुए रोड शो का अन्दाज भी कुछ ऐसा ही नजर आया। यूं तो इसके एक दिन पहले शनिवार को भी वह अपने संसदीय क्षेत्र में जनता से रूबरू हुए और भारी जनसैलाब के बीच इसे रोड शो कहा गया, लेकिन आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री ने रविवार को ही रोड शो किया। विपक्ष भले ही इसे सियासी मुद्दा बनाता नजर आया और नेता पूरे दिन अपनी रैलियों में इस बात को लेकर प्रधानमंत्री पर हमला बोलते रहे, लेकिन जिसने भी रविवार को काशी का नजारा देखा, वह मोदी का मुरीद हो गया। दरअसल सियासत में रोड शो राजनैतिक दलों का शक्ति प्रदर्शन होते हैं। इनका अन्दाज रैलियों से इसलिए जुदा होता है, क्योंकि इसमें भीड़ को पहले से एक स्थान पर बुलाकर बैठाया नहीं जाता। इसमें नेता भाषण नहीं देते, बल्कि यह कई किलोमीटर लम्बे होते हैं। इनमें सड़क पर चलने वाले राहगीर से लेकर अपने नेता को सुनने के लिए जनता कई घण्टे पहले ही खड़ी होती है। लोगों को अपने नेता की बमुश्किल एक झलक मिल पाती है, कई बार तो लोग भीड़ की धक्का-मुक्की में इससे भी वंचित रह जाते हैं। यही वजह है कि सियासी दल अपने नेताओं की रैलियां तो जरूर कराते हैं, लेकिन रोड शो कराना सभी के लिए सम्भव नहीं हो पाता। इसमें जनता की सीधे सहभागिता की दरकार होती है। यानी वही रोड शो सफल होता है, जिसमें नेता को देखने के लिए जनता बिन बुलाये पहुंचती है।
वाराणसी “रोड शो” पर बोले मोदी, ऐसा जनसैलाब जीवन में कभी नहीं देखा …!
इस लिहाज से पीएम मोदी जब रविवार को दोबारा सड़कों पर उतरे तो न सिर्फ विरोधियों की निगाहें उनके रोड शो पर टिकी हुईं थीं, बल्कि हर कोई जानने को बेताब था कि चौबीस घण्टे बाद क्या जनता वाकई में प्रधानमंत्री के प्रति वही जोश दिखा पायेगी, लेकिन जैसे ही इसकी शुरूआत हुई, लोगों के जोश, उत्साह और माहौल ने सारी तस्वीर साफ कर दी। हालत यह थी कि प्रधानमंत्री अपने तय समय से डेढ़ घण्टे बाद रोड शो शुरू कर पाये, लेकिन उससे पहले ही जनता उनका इन्तजार करती दिखी। मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पाण्डेयपुर से जैसे ही पीएम आगे बढ़े, कदम-कदम पर उन पर फूलों की बरसात होनी लगी। रविवार को भी प्रधानमंत्री की गाड़ी फूलों से इस कदर ढकी नजर आयी कि उसका बोनट नजर नहीं आ रहा था। अपने संसदीय क्षेत्र में दोबारा इस भव्य स्वागत से अभिभूत पीएम मोदी पूरे रास्ते भर लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन करते नजर आए। काशी एक बार फिर मोदीमय नजर आयी। न सिर्फ सड़कों से बल्कि घरों की छतों से प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया है और फूल बरसाये गए। भाजपा के झण्डों और गुब्बारों के बीच भगवा माहौल सब पर भारी पड़ता नजर आया। शिव की नगरी में युवाओं का प्रधानमंत्री को लेकर जोश भी देखते ही बन रहा था। यहां तक की कई लोग शहर के बाहर से भी पीएम मोदी को देखने और सुनने पहुंचे। इस माहौल में हर-हर मोदी और घर-घर मोदी के नारे चुनावी महासमर में भाजपा नेताओं का आत्मविश्वास बढ़ाते नजर आये। प्रधानमंत्री मोदी का रोड शो हुकुलगंज, चौकाघाट, पटेलधर्मशाला, तेलियाबाग, सिंह मेडिकल चौराहा होते हुए काशी विद्यापीठ तक पहुंचा। काशी विद्यापीठ के खेल मैदान में ही उन्होंने जनसभा को सम्बोधित किया। प्रधानमंत्री ने जनसभा में भी काशी के आधुनिक विकास के लिए भविष्य के अपने सपनों को जनता के सामने रखा। उन्होंने यूपी में विकास के लिए सही सरकार की दरकार बतायी। पूर्वांचल के विकास के बिना यूपी का विकास अधूरा होने का जिक्र किया और कहा कि पूर्वांचल को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाने की जरूरत है।
मोदी के रोड शो पर उनके ही मंत्री ने लगाया सवालिया निशान…..कहा-विधानसभा चुनाव में रोड शो पद की गरिमा के खिलाफ
इसका विकास पश्चिम की तुलना में कम हुआ है। जिस नोटबन्दी को विरोधी उनके खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उसको लेकर भी प्रधानमंत्री काउन्टर एटैक की भूमिका में नजर आये। उन्होंने काशी के प्रति अपना समर्पण दिखाया तो इंसेफेलाइटिस का जिक्र करके अब तक काबिज रहीं सरकारों को आईना दिखाया। पूर्वांचल के विकास का मोदी का ये दांव भाजपा के विरोधियों को चारों खाने चित्त करने में सफल हो सकता है। दरअसल पीएम मोदी का लगातार तीन दिन तक अपने संसदीय क्षेत्र में सक्रिय रहना विरोधियों को रास नहीं आ रहा है। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला की ओर से कहा गया कि प्रधानमंत्री का इस तरह तीन दिन तक अपने संसदीय क्षेत्र में रहने का कार्यक्रम साबित कर रहा है कि भाजपा ने हार मान ली है। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री जी पहले रोड शो कर चुके थे, फिर रोड शो कर रहे हैं, चुनाव तक रोड शो ही करते रहेंगे। अखिलेश ने कहा कि हमारा काशी का रोड शो ऐतिहासिक रहा, इतना जन-समर्थन कभी किसी को नहीं मिला। वाराणसी के लोगों ने भी सपा के पक्ष में मन बना लिया है। दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने बयान दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की लगातार हो रही हत्याओं से बेपरवाह होकर रोड शो में व्यस्त हैं। राजनैतिक विश्लेषक हिन्दुस्थान समाचार से कहते हैं कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव न सिर्फ सभी दलों के सियासी वजूद के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मोदी बनाम अन्य के कारण भी बेहद खास हो गया है। चाहे अखिलेश हों, राहुल हां या फिर मायावती। यह सभी भाजपा से कहीं ज्यादा पीएम मोदी पर हमलावर हैं। वहीं भाजपा रणनीतिकार अच्छी तरह जानते हैं कि मोदी उनके ब्रह्मास्त्र हैं। वह किसी भी चुनाव की तस्वीर बदलने का माद्दा रखते हैं, इसलिए यूपी में सत्ता का अपना वनवास खत्म करने के लिए पार्टी मोदी फैक्टर का बखूभी इस्तेमाल कर रही है। काशी से पूरे पूर्वांचल की 40 सीटों को टारगेट किया जा रहा है। भाजपा जानती है कि अगर यूपी में कमल खिलाना है तो चक्रव्यूह का सातवां द्वार यानी सातवां चरण जीतना बेहद जरूरी है। इसलिए पूर्वी द्वार का किला फतेह करने को वह अपनी रणनीति को पूरी तरह धरातल पर उतार रही है। वहीं पीएम मोदी भी सातवें चरण में इस बार चर्चित फिल्म ‘चक दे इण्डिया’ के शाहरूख की तरह भाजपा टीम के कप्तान के किरदार में नजर आये। इस फिल्म का एक डायलॉग था, ”सत्तर मिनट..सत्तर मिनट हैं तुम्हारे पास….शायद तुम्हारी जिन्दगी के सबसे खास 70 मिनट..प्रधानमंत्री ने भी इस तर्ज पर सातवें चरण के प्रचार के अन्तिम समय तक नेताओं, कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े हर शख्स को पूरी ताकत झोंकने के लिए कहा। इसका नजारा काशी में दिखाई भी दिया, जिसकी बदौलत पूरे पूर्वांचल को भगवामय बनाया जा सके। फिल्म में शाहरूख ने यह भी बोला था, ”इस टीम को सिर्फ वो प्लेयर्स चाहिए, जो पहले इण्डिया के लिए खेल रहे हैं, इण्डिया..फिर अपनी टीम, अपने साथियों के लिए..और उसके बाद भी अगर थोड़ी बहुत जान बच जाती है तो अपने लिए..पीएम मोदी का भी भाजपाईयों के लिए कुछ ऐसा ही सन्देश है कि वह पार्टी के लिए चुनाव लड़े और प्रत्याशियों के जीताएं।
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इसीलिए सातवें चरण के मतदान से पहले हर उस नेता को मनाने की कोशिश की गई, जो किसी न किसी वजह से असन्तुष्ट था। प्रधानमंत्री स्वयं शनिवार को काशी विश्वनाथ के दर्शन के समय श्यामदेव चौधरी का हाथ पकड़ कर उन्हें अपने साथ ले गए। यहां तक कि जब वह मन्दिर में विधि-विधान से पूजा पाठ कर रहे थे, तब भी श्यामदेव उनके ठीक बगल मौजूद रहे। बनारस में दादा के नाम से मशहूर श्यामदेव चौधरी को इस बार पार्टी ने प्रत्याशी नहीं बनाया है। इससे उनके नाराज होने की खबरें सुर्खियों में थीं, लेकिन प्रधानमंत्री ने जिस तरह उनको अपने साथ रखा, उससे उन्होंने लोगों को दिल जीत लिया। इसी फिल्म का एक और डायलॉग था, ”मैंने कहा था कि टीम बनाने के लिए ताकत की नहीं, नीयत की जरूरत होती है।” यह भी प्रधानमंत्री पर बिलकुल सटीक बैठ रहा है। खुद को प्रधानसेवक कहने वाले मोदी यूपी विधानसभा चुनाव ताकत से नहीं नीयत से जीतना चाहते हैं। इस नीयत में उनके समर्थकों को ईमानदारी नजर आती है। यही वजह है कि कांग्रेस से लेकर मायाराज और अखिलेश सरकार पर मोदी जब भ्रष्टाचार-घोटाले के आरोप गिनाते हैं, तो विरोधी इसका खण्डन तो करते हैं, लेकिन केन्द्र सरकार पर एक भी ऐसा आरोप तलाशने में सफल नहीं हो पाते। वास्तव में यह चुनाव भले ही विधानसभा का हो, लेकिन भाजपा के लिए इसका मुख्य चेहरा पीएम मोदी ही हैं। इसलिए आखिरी रण में वह काशी वाया पूर्वांचल होते हुए लखनऊ पहुंचने की पटकथा लिख रहे हैं। ऐसे में विरोधी भले ही कुछ कहें लेकिन भाजपाई अभी से हर-हर मोदी, चक दे मोदी जरूर कह रहे हैं 

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