कान्हा की नगरी में हिंडोला डालने की मची होड़

कान्हा की नगरी में हिंडोला डालने की मची होड़

मथुरा । श्रावण मास का इंतजार यूं तो समूचा उत्तर भारत बेहद बेसब्री से करता है मगर कान्हा की नगरी ब्रज में सावन की अनुपम छटा के बीच हरियाली तीज से मंदिरों में हिंडोला डालने की होड़-सी मच जाती है। शुक्रवार से वृन्दावन में शुरू होने वाले हिंडोला उत्सव की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। वृन्दावन के हिंडोला उत्सव में बांकेबिहारी मंदिर ही एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां पर वर्ष में केवल एक दिन ही सोने चांदी का भव्य हिंडोला डाला जाता है जिसमें श्यामाश्याम झूलते हैं तथा इस दिन वृन्दावन में मेला लग जाता है।
अपर जिलाधिकारी ए के अवस्थी ने बताया कि पांच अगस्त को वृन्दावन में लगनेवाले मेले की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मेला क्षेत्र को तीन जोन एवं छह सेक्टर में बांट दिया गया है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी एक अपर जिलाधिकारी को दी गई है तथा प्रत्येक सेक्टर में 12-12 घंटे के अंतराल में दो मजिस्ट्रेट लगाए जाएंगे। ये मजिस्ट्रेट डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी होंगे। उन्होंने बताया कि प्रथम जोन बिहारी जी मंदिर के अंदर बनाया गया है जबकि दूसरा जोन बिहारी जी मंदिर के बाहर से विद्यापीठ चौराहे की परिधि में बनाया गया है तथा वृन्दावन के शेष भाग को तीसरे जोन में रखा गया है। इस अवसर पर पांच अगस्त को वृन्दावन मथुरा के बीच एक दर्जन अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी।वृन्दावन में वाहनों का प्रवेश चार अगस्त से ही रोक दिया जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार के अनुसार पांच अगस्त यानी हरियाली तीज से शुरू हो रहे वृन्दावन के हिंडोला उत्सव में सुरक्षा के लिए 500 पुलिसकर्मी लगाए जाएंगे।
जाम को रोकने के लिए हरियाली तीज के एक दिन पहले से ही वृन्दावन में वाहनों का प्रवेश रोक दिया जाएगा। जिले के छह क्षेत्राधिकारी, 20 इंसपेक्टर, 12 थानाध्यक्ष एवं 250 सिपाही तैनात किये जाएंगे इसके अतिरिक्त 40 ट्रैफिक के पुलिसकर्मी लगाए जाएंगे। दूसरे जिलों से 200 पुलिसकर्मी पांच अगस्त के लिए मांगे गए हैं। ब्रज में बांकेबिहारी मंदिर ही एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां पर वर्ष में केवल एक बार हरियाली तीज पर विशालकाय स्वर्ण हिंडोला डाला जाता है। इस हिंडोले को बनाने में एक लाख तोले चांदी एवं दो हजार तोला सोना लगाया गया है।इसके आधार की लकड़ी को दो साल तक सुखाया गया था। इस मंदिर की झूलनोत्सव की परंपरा स्वयं स्वामी हरिदास जी ने बनाई थी। पहले वे जंगल से फूल पत्ती लाकर उसका हिंडोला बनाते थे किंतु धीरे धीरे भक्तों ने इसमें सहयोग किया।
कलकत्ता के व्यवसाई बेरीवाल परिवार ने इस हिंडोले को 1942 में बनवाया था तथा शीशम की लकड़ी पर सोने चांदी की आठ परत चढवाई थी। इस हिंडोले में कुल 130 भाग हैं तथा झूले के समय इन भागों को जोड़ा जाता है। वाराणासी के कारीगर लल्लन एवं बाबूलाल ने सहयोगी कारीगरों के साथ मिलकर इसे पांच साल में बनाया था। चार वर्ष पूर्व बेरीवाल बेरीवाल परिवार ने इसकी सफाई दिल्ली के विशेषज्ञों से कराई थी। वर्ष में एक दिन निकलने तथा इसकी बनावट आकर्षक होने के कारण इसे देखने की भक्तों में होड़ लग जाती है वृन्दावन के अन्य मंदिरों में हिंडोला उत्सव इसी दिन यानी हरियाली तीज से शुरू हो जाता है। वृन्दावन के ही राधाबल्लभ मंदिर में हिंडोला में श्यामाश्याम के झूलने को देखने की होड़ सी लगी रहती है। राधारमण मंदिर में स्वर्ण एवं रजत हिंडोले डाले जाते रहे हैं।इस प्राचीन मंदिर के सेवायत आचार्य दिनेश चन्द्र गोस्वामी ने बताया कि द्वादशी से ठाकुर जी पुष्प के कुंज में विराजमान होकर झूला झूलते हैं। पवित्रा द्वादसी पर श्रंगार आरती में रेशम या रुई की माला ठाकुर जी को अर्पित की जाएगी। इसके दर्शन बहुत अधिक शुभ माने जाते हैं। और पद का गायन होता है राधारमण पवित्रा पहने। लाल हरित सित पीत गुलाबी शोभित वरण सुनहरे। उनका कहना था कि प्रिया प्रियतम कुंज में विराजमान होकर झूला झूलते हैं। इस मंदिर में हरियाली तीज पर सिंधारा का अनूठा भोग लगाया गया जो एक प्रकार का 56 भोग ही है । अंतर यह है कि 56 भोग में घेवर और फैनी नही रखी जाती जब कि सिंधारा भोग में इसे भी रखा जाता है। वृन्दावन के राधा दामोदर मंदिर में हिंडोला उत्सव में इसी दिन से हिंडोला डाला जाता है 22 अगस्त को राधा दामोदर जी के श्याम सखी के रूप में दर्शन होंगे।इस मंदिर के हिंडोलों में मोरछड़ी और मोरपंखी का हिंडोला अपनी अमिट छाप छोंड़ता है। झूला के पदों का गायन होता है आज राधा श्याम रंगे ते झूलें । मदनमोहन मंदिर वृन्दावन के महंत अजय गोस्वामी के अनुसार मंदिर में चांदी के हिंडोले के साथ साथ फूल, पत्ती का हिंडोला भी डाला जाता है। झूलनोत्सव के अंतिम दिन रास होता है तथा ठाकुर अंतिम दिन कोतवाल बनते हैं तो राधारानी राजा बनती हैं। उस दिन राधारानी का चरणदर्शन भी होता है। इस मंदिर में हिंडोला उत्सव हरियाली तीज से प्रारंभ हेाता है जो नौ दिन तक चलता है। इनके अलावा कृष्ण बलराम मंदिर,शाह जी मंदिर में भी इसी दिन से हिंडोला उत्सव शुरू होता है। वृन्दावन के रंग जी मंदिर में वैसे तो परंपराएं दक्षिण भारत के मंदिरों सी होती हैं किंतु इस मंदिर में भी हरियाली तीज से चांदी का हिंडोला डाला जाता है।
राधारानी की क्रीड़ास्थली बरसाना में भी हरियाली तीज से हिंडोला उत्सव की शुरुवात होती है तथा बरसाना के ही दादीबाबा मंदिर, वृषभान मंदिर, जयपुर मंदिर, अष्टसखी मंदिर,मोरकुटी और गोपाल मंदिर में तथा नन्द गांव के नन्दबाबा मंदिर में विशालकाय चांदी के हिंडोले में श्यामाश्याम के झूलन के दर्शन इसी दिन से करते हैं। वर्तमान में द्वारकाधीश मंदिर, स्वामी नारायण मंदिर में जहां हिंडोला उत्सव की धूम मची हुई है वहीं श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मंदिरों में हिंडोला उत्सव की शुरूवात तीन अगस्त से हो रही है। स्वामी नारायण मंदिर के महंत अखिलेश्वर स्वामी ने बताया कि मंदिर में बालस्वरूप में सेवा होने के कारण यहां पर बालक को खुश करने की दृष्टि से टाफी, सब्जी, बिस्कुट,सूखी मेवा, बर्तन, पवित्रा आदि के हिंडोले डाले जा रहे हैं।इस बार के हिंडोला उत्सव में कापी, पेंसिल, रबर ,फुटा आदि का विशेष हिंडोला डाला जाएगा तथा बाद में इसकी सामग्री को पढ़नेवाले गरीब छोटे बच्चों मेें बांट दिया जाएगा। भारत विख्यात द्वारकाधीश मंदिर में तो श्रावण मास की शुरुवात से ही एक सोने का तथा दो चांदी के विशालकाय हिंडोले डाल दिए जाते हैं जो जन्माष्टमी तक पड़े रहते हैं । इस मंदिर में इसके अलावा अलग अलग प्रकार के हिंडोले अलग अलग दिन डाले जाते हैं। लहरिया घटा वाले दिन तो मंदिर में 9 हिंडोले डाले जाते हैं।
हिंडोला एक प्रकार से ठाकुर जी का झूला है जिसका महत्व बालस्वरूप सेवा करनेवालों के लिए सबसे अधिक है। जिस प्रकार से बच्चे के झूले को आकर्षक बनाया जाता है उसी प्रकार हिंडोले को अति आकर्षक बनाया जाता है।चूंकि यहां के अधिकांश मंदिरों में बालस्वरूप में सेवा होती है इसलिए हिंडोले भी आकर्षक बनाए जाते हैं। जिन मंदिरों में बालस्वरूप में सेवा नही होती है वहां पर हिंडोला एक प्रकार से ठाकुर सेवा का माध्यम बन जाता है। ठाकुर जी बिना राधारानी के झूला नही झूलते हैं इसीलिए जब हिंडोला तैयार हो जाता है तो ठाकुर जी राधारानी से स्वयं कहते हैं राधे झूलन पधारो घिर आए बदरा। श्यामाश्याम जब हिंडोले में झूलते हैं तो भक्ति रस की फुहारें चलने लगती हैं। जिन मंदिरों में सोने चांदी के हिंडोले नही हैं वहां पर फूल पत्ती ,जरी आदि के हिंडोले डाले जाते हैं। ब्रज के अधिकांश मंदिरों में हरियाली तीज से पूर्णिमा तक हिंडोले डाले जाते हैं। उधर श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के जनसम्पर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह के अनुसार श्रीकृष्ण-जन्मस्थान स्थित मन्दिरों में श्रावण झूला उत्सव आज से आरंभ हो गया है ।इस दिन मंदिर में केसरी घटा के दर्शन होंगे । इसी क्रम में पांच अगस्त को हरियाली तीज पर हरी घटा के दर्शन भक्तों को पर्यावरण रक्षा का संदेश देंगे। सात अगस्त को बैंगनी घटा, 11 को लाल घटा और 13 व 14 अगस्त को सुप्रसिद्ध काली घटा के दर्शन अपने विराट रूप में होंगे। संस्थान के सचिव कपिल शर्मा के अनुसार इस बार के काली घटा दर्शन श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत में वर्णित द्वापर काल के ब्रज में श्यामा-श्याम की लीला की साक्षात झलक का अनुभव कर सकेंगे, ऐसा प्रयास संस्थान द्वारा किया जा रहा है । श्रावण महोत्सव का समापन 15 अगस्त को गुलाबी घटा व 17 अगस्त को सफेद घटा के साथ संपन्न होगा ।

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