अनमोल वचन

अनमोल वचन

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वाणी का प्रभाव बहुत दूरगामी होता है। लोग जिस जिव्हा का प्रयोग वाणी को शब्द देने के लिये करते हैं, उसके प्रभाव न केवल तात्कालिक बल्कि दूरगामी भी होते हैं। लोग सुबह से शाम तक जिस जिव्हा का प्रयोग करते हैं, उसके द्वारा न जाने क्या-क्या बोलते रहते हैं। कभी यह याद भी नहीं करते कि हम कब कहां और क्या-क्या बोल आये हैं। याद दिलाने पर पूछते हैं अच्छा मैंने ऐसा भी कहा था। विचार करें कि आप इतना ज्यादा बोलते ही क्यों हैं कि आपको याद ही नहीं रहता। जो लोग फालतू और बे-लगाम बोलते हैं, उनके साथ ऐसा ही होता है। बाद में उन्हें अपनी बकवास का खामियाजा भी भुगतना पडता है। राजनेताओं की बात छोडिये। उन्हे जैसे ही पता चलता है कि उनकी बात पार्टी या सरकार की नीति के विरूद्ध है, उनका बयान तुरंत आ जाता है कि मैंने ऐसा नहीं कहा था अथवा मेरा कहने का आश्य यह नहीं था। यह तो मीडिया वाले हैं, जिन्होंने मेरे बयान को तोड मरोडकर अथवा अंशों में उद्घृत किया है। आप तो राजनेता नहीं सामान्य नागरिक हैं। एक आम आदमी अपनी वाणी के दुरूपयोग के दुष्परिणाम भुगत रहा है, उसे आप प्रतिदिन समाचारों में हत्या, रेलगाडी से फेंकने तथा कभी-कभी साम्प्रदायिक एवं वर्ग संघर्ष की घटनाओं के रूप में स्वयं पढ-सुन रहे हैं। इसलिए वाणी का संयम सदैव आपके हित में है।

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