हेल्थसेंटरों के प्रति बढ़ती जागरूकता…स्लिम-ट्रिम बनने के लिए युवाओं में होड़ 

हेल्थसेंटरों के प्रति बढ़ती जागरूकता…स्लिम-ट्रिम बनने के लिए युवाओं में होड़ 

 पिछले कुछ समय से अपनी बाडी को फिट और स्लिम-ट्रिम बनाये रखने के लिए युवाओं में होड़ सी लग गई है। यही कारण है कि महानगरों की कौन कहे, अब छोटे-छोटे शहरों व कस्बों में भी हैल्थ सेंटर और जिम धड़ाधड़ खुलने लगे हैं। जब ये हैल्थ सेंटर थोड़ा सा समय लेकर फिट बॉडी देने का वादा कर रहे हैं तो कौन नहीं चाहेगा कि वह फिट रहे। फिटनेस को लेकर सभी वर्ग जागरूक हैं लेकिन यह जागरूकता युवा वर्ग में कुछ ज्यादा ही है, युवक अपनी मसल्स रितिक रोशन व सलमान खान के समान बनाना चाहते हैं वहीं युवतियां अपने को करिश्मा जैसी दिखाना चाहती हैं। नए-नए फैशनों ने भी बॉडी को फिट और स्लिम-ट्रिम रखने की चाह को प्रोत्साहित किया है। नए डिजाइन के वस्त्र न तो दुबले-पतले शरीर पर फबते हैं और न बेडौल शरीर पर। वैसे वस्त्र फिट बॉडी पर खूब जंचते हैं। अत: फैशनों ने भी हैल्थ सेंटरों के क्रेज को काफी बढ़ावा दिया है। जो युवक समय व पैसे की कमी के कारण हैल्थ सेंटरों में नहीं जा सकते, वे टीवी, इंटरनेट और पत्र-पत्रिकाओं से अपनी चाह पूरी करते हैं। वैसे युवक टी.वी. कार्यक्रमों को देखकर, स्टेप्स सीखकर अभ्यास करते हैं। आजकल प्रत्येक हैल्थ सेंटर में, विशेष रूप से स्लिमिंग सेंटरों में अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। शरीर के प्रत्येक अंग की कसरत के लिए इन केन्द्रों पर तरह-तरह की मशीनें उपलब्ध हैं। इन हैल्थ सेंटरों में नियुक्त प्रशिक्षक प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार व्यायाम निर्धारित करते हैं।
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इन सेंटरों की फीस सुविधाओं तथा वहां के प्रशिक्षक की योग्यता के आधार पर निश्चित होती है। एक बार कोर्स कम्प्लीट कर लेने के बाद आप चाहें तो बाद में भी अभ्यास जारी रख सकते हैं। जिम की लोकप्रियता वहां मौजूद सुविधाओं और प्रशिक्षक पर निर्भर करती है। प्रश्न यह उठता है कि अचानक फिटनेस की समस्या क्यों उठ खड़ी हुई है? लोग क्यों इसके दीवाने हो गए हैं? इन प्रश्नों का उत्तर ढूंढने पर मालूम होता है कि यह बदलती जीवन शैली तथा अकर्मण्यता की स्थिति का परिणाम है। आज कल लोग श्रम से जी चुराने लगे हैं। व्यायाम वगैरह के लिए उनके पास समय नहीं हैं तथा स्वाद के लिए कुछ भी खा रहे हैं। इन सबसे मोटापे जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। फास्ट फूड, चाकलेट व कोला जैसे पदार्थो के प्रयोग से अनेकों समस्याएं पैदा हो रही हैं। संचार की दुनिया में आई क्रांति के कारण सारी दुनिया सिमट गई है। लोग बैठे-बैठे काम करने लगे हैं। सभी लोग श्रम करने से कतराने लगे हैं। इन्हीं सब कारणों से हैल्थ सेंटरों की जरूरत महसूस होने लगी है और लोग इन्हें अपनी दैनिक दिनचर्या का अंग बनाने लगे हैं। आज हैल्थ सेंटरों में जाना व्यक्ति जीवन की जरूरत समझने लगा है। इसलिए लोग अपने व्यस्ततम समय में से थोड़ा सा समय इसके लिए निकाल ही रहे हैं।
– अर्पिता तालुकदार

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