हिन्दुत्व अर्थात् जीने का तरीका 

हिन्दुत्व अर्थात् जीने का तरीका 

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस समय हिन्दुत्व या इसके तात्पर्य से जुड़े मसले पर गौर नहीं करेगा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मसले पर 1995 के शीर्ष अदालत के निर्णय पर न तो पुर्निवचार करेगा और न ही हिन्दुत्व या धर्म के पहलू पर गौर करेगा। हिन्दुत्व पर फिर सुनवाई से इनकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिन्दुत्व शब्द की दोबारा व्याख्या नहीं होगी। इस प्रकार वर्ष 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुत्व को जीने का तरीका बताया था, वह आज भी उसी पर कायम है। इस प्रकार अब हिन्दुत्व को धर्म मानने वाले क्या कहते हैं, क्या यह बात उनके गले से नीचे उतरेगी या नहीं यह देखने वाली बात होगी। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मसले पर ज्यादा बोलना उचित नहीं समझा होगा जो उस उलझी डोर की तरह है जिसे जितना सुलझाओ उतनी ही उलझती चली जाती है।आप ये ख़बरें और ज्यादा पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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