हाल- यूपी :दिव्यांगों को ठोकर मारती रही अखिलेश सरकार..!

हाल- यूपी :दिव्यांगों को ठोकर मारती रही अखिलेश सरकार..!

 अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार का दिव्यांगों के प्रति संवेदनहीन और शत्रुओं जैसा रुख रहा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कभी इस तरह की पहल नहीं की जिससे लगे कि वे उत्तर प्रदेश के लाखों दिव्यांगों को दोयम दर्जें का इँसान नहीं मानते। उत्तर प्रदेश में 41 लाख से ज्यादा दिव्यांग हैं। इस तरह से दिव्यांगों की आबादी के लिहाज से यह देश का पहले नंबर का राज्य है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दिव्यांग हैं। उत्तर प्रदेश में दिव्यांगों की कुल संख्या 41 लाख 57 हजार 514 है। ठोकर खाते रहे अखिलेश यादव सरकार ने दिव्यांगों के हितों की सोचने में कभी गंभीरता नहीं दिखाई। सरकार तो इन्हे ठोकर मारती है। क्या इसकी बड़ी वजह ये है कि दिव्यांगों का कोई वोट बैंक नहीं है? कुछ समय पहले आजमगढ़ में दिव्यांगों का बड़ा प्रदर्शन हुआ। ये अपनी मांगों के समर्थन में जन कल्याण विकलांग सेवा समिति के बैनर तले डीएम दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। दिव्यांगों ने गले में रस्सी बांध कहा कि यदि योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकता है तो हमें फांसी दे दी जाए। प्रदर्शनकारी कह रहे थे दिव्यांगों की समस्याओं को लेकर कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई गई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। इनकी मांग थी कि दिव्यांगों, विधवाओं को गुजारा के लिए पांच हजार रुपये दिए जाएं। सभी दिव्यांग , विधवा, गरीब को स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएं। ग्रामसभा के राशन का कोटा दिव्यांग महिलाओं को दिया जाए।
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इसके अलावा प्रदेश के सभी जिलों में दिव्यांग, विधवा, निराश्रितों के दो बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा के लिए महाविद्यालय खोला जाए। साथ ही न्यायालय सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में जहां दिव्यांगों के चढ़ने के लिए रैंप नहीं बना है, वहां रैंप बनावाया जाए। नि:शुल्क बिजली भी दी जाए। पर बड़ा सवाल वही है कि अखिलेश सरकार राज्य के दिव्यांगों के संबंध में क्या करती रही है। अफसोस कि अखिलेश सरकार ने दिव्यांगों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया। पुलिस के शिकार होते दिव्यांग उत्तर प्रदेश पुलिस का दिव्यांगों को लेकर रवैया बेहद अमानवीय रहा है। आपको याद होगा कि कुछ समय पहले अपनी मांगों को लेकर बिजनौर के कलक्ट्रेट गेट पर धरना दे रहे दिव्यांगों को एसपी ने थप्पड़ मारकर खदेड़ा था। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने भी दिव्यांगों से हाथापाई की।
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यह घटना तब हुई जब प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों ने अधिकारियों को रोकने की कोशिश की।इतना ही नहीं घटना के समय डीएम सहित जिले के तमाम अधिकारियों ने गाड़ियों से उतरकर दिव्यांगों की परेशानी को सुनना भी गवारा नहीं समझा। अपने कप्तान द्वारा दिव्यांगों को पीटता देख पुलिसवालों ने भी हाथ साफ़ किये। हालांकि बिजनौर की घटना काराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया था, पर दोषी पुलिस अफसरों पर क्या कार्रवाई हुई किसी को नहीं पता चल सका। इस संबद्ध में एनएचआरसी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया था। दिव्यांग फ्रैंडली नहीं उत्तर प्रदेश में नोएडा से लेकर लखनऊ तक में बनने वाली इमारतों को दिव्यांग फ्रैंडली नहीं बनाया जाता है। यानी बिल्डर अपने प्रोजेक्ट्स को अंतिम रूप देते हुए दिव्यांगों का कोई ख्याल नहीं करते हैं। उनके लिए सुविधाएं नहीं जुटाते हैं। नौजवानों के लिए जिम से लेकर स्वीमिंग पुल तैयार किया जाता है। पर वे विकलागों को लेकर गंभीर रुख नहीं अपनाते। उन्हें अब सुधरना होगा।

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