हार का कोई मां-बाप नहीं होता

हार का कोई मां-बाप नहीं होता

ओलंपिक में पुरुषों के युगल मैच के पहले ही दौर में हारने पर भावुक लिएंडर पेस ने अपनी निराशा जताते हुए कहा कि वह एक सॉफ्ट टारगेट बन गए हैं और इस वजह से ही लोग उनके पीछे पड़े रहते हैं। अब पेस को इतना तो मालूम ही होना चाहिए कि हार का कोई माँ-बाप नहीं होता जबकि जीत का सेहरा हर शख्स अपने सिर बांधना चाहता है। बहरहाल पेस उन खबरों से नाराज हैं, जिनमें कहा गया था कि वह अपने पार्टनर बोपन्ना के साथ कमरा शेयर नहीं करना चाहते थे और फिर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि खेल गांव में कमरा नहीं दिया गया। बात जो भी हो लेकिन पेस की टेनिस की दुनिया में उपलब्धियां कम नहीं हैं जिन पर गर्व न किया जा सके, लेकिन बात जब ओलंपिक की होगी तो यही कहा जाएगा कि पहले ही दौर में पेस और बोपन्ना की जोड़ी बाहर हो गई थी। अब इसे सुनना और पचाना तो आना ही चाहिए।

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