हाथों की सुंदरता बनाये रखें…नियमित देखभाल करते रहें..!

हाथों की सुंदरता बनाये रखें…नियमित देखभाल करते रहें..!

 प्राय: हमारे द्वारा किया जाने वाला अधिकांश कार्य हाथ से ही सम्पादित होता है, अत: हमें चाहिए कि हाथों को स्वस्थ एवं सुंदर बनाये रखने के लिए नियमित देखभाल करते रहें।
– पोंछा लगाने, बर्तन व कपड़ा धुलने तथा सफाई इत्यादि करते रहने से खासकर गृहणियों के हाथों में दरारें पड़ जाती हैं तथा कटे-फटे के निशान उभर आते हैं। यहां हम हाथों के रख रखाव के बारे में कुछ नुस्खे बता रहे हैं जिन्हें आजमाकर कोई भी कह उठेगा वाह! क्या सुंदर हाथ हैं।
– काम चाहे जो भी हो, पूरा होने के बाद हाथों की अच्छी तरह सफाई करें।
– यदि समय है तो गरम एवं ठण्डे पानी में थोड़ी-थोड़ी देर हाथों को डुबोयें। इससे हाथों में जमी मैल की परत निकल जायेगी। दोनों हथेलियों को एक दूसरे में फंसाकर रगड़ें। फिर स्वच्छ पानी से धो लें।
– उंगलियों के नाखूनों के साथ पोरों की भी अच्छी तरह सफाई करें। सूख जाने पर कोई क्रीम मल लें।
ज्यादा तेज कसरत नुकसानदेह..इसे लयबद्ध धीमी गति में करना चाहिए.!
नाखूनों पर मेल खाती नेल पॉलिश लगायें। लीजिए, थोड़े ही समय में आपके हाथों में सुंदरता छा गयी। हाथों की नियमित देखभाल आवश्यक है। मलाई बेसन से बना उबटन लगायें। संतरा या नींबू का छिलका हाथों में रगड़ते रहें, मुल्तानी मिट्टी का पेस्ट बना कर हाथों में लगा लें। सूख जाने पर हल्के गुनगुने पानी में धो लें। इसके अलावा यदि आप चाहें तो नजदीकी ब्यूटी पार्लर से मेनिक्योर करवा हाथों की खूबसूरती बनाये रख सकती हैं।
मुंहासों को दूर करने हेतु घरेलू उपचार..लगाएं मुल्तानी मिट्टी का फेस-पैक !

भुलक्कड़ बना डालता हैै उच्च रक्तचाप

अल्वामा विश्वविद्यालय के ज्योर्जियस त्सीगोलिस के नेतृत्व में किए गए एक अनुसंधान के दौरान पाया गया है कि उच्च रक्तचाप प्रौढ़ व्यक्तियों को भुलक्कड़ बना सकता है। उच्च रक्तचाप से मस्तिष्क की धमनियां कमजोर हो जाती हैं और उनसे मस्तिष्क को क्षति पहुंचती है। धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ती जाती है और व्यक्ति भुलक्कड़ बनता चला जाता है। तंत्रिका संबंधी जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि उच्च रक्तचाप प्रौढ़ावस्था में याददाश्त की समस्या उत्पन्न कर सकता है। 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को भूलने की समस्या हो जाती है। ऐसे लोगों के लिए किसी बात पर सोचना या विचार विमर्श करना भी मुश्किल होता है। यह अध्ययन 45 साल की उम्र के लगभग बीस हजार लोगों पर किया था गया।
– सुमित्रा यादव

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