हस्तशिल्प को बढावा देने के लिए सरकार तत्पर

हस्तशिल्प को बढावा देने के लिए सरकार तत्पर

नई दिल्ली। हस्तशिल्प निर्यात में अच्छी खासी बढोत्तरी दर्ज किये जाने के बावजूद सरकार ने मशीन निर्मित उत्पादों को कड़ी टक्कर देने के मकसद से हस्तकरघा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं।
देश में हस्तशिल्प निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 के 26,212.29 करोड़ रुपये के आंकड़े से बढ़कर अप्रैल 2016 से फरवरी 2017 के बीच 31,516.92 करोड़ रुपये हो गया। सरकार ने हस्तशिल्प उद्योग को मशीन निर्मित उत्पादों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए इसे मजबूत करने की दिशा में कई पहल की हैं। गत साल बनायी गयी नयी हस्तशिल्प नीति के तहत हस्तकरघा उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए तीन बातों पर मुख्य जोर दिया जायेगा। सूत्रों के मुताबिक इसी के तहत आंतरिक साज-सज्जा तथा अन्य उपयोगी चीजों में इस्तेमाल किये जाने वाले गुणवत्तापूर्ण हस्तशिल्प उत्पादों के आधार को बढ़ाने के लिए उसे आर्थिक रुप से आकर्षक बनाया जायेगा।
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कपड़ा मंत्रालय का जोर विरासत और विलुप्तप्राप्य होने वाली हस्तकला के संरक्षण के साथ-साथ प्रीमियम हस्तशिल्प उत्पादों को संवद्र्धित करने पर है। मंत्रालय ने साथ ही 2024-25 तक इस क्षेत्र में साढ़े तीन करोड़ अतिरिक्त रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है। सरकार देश तथा विदेशों में आयोजित होने वालों मेले और प्रदर्शनियों आदि में शामिल होने के लिए मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस ( एमडीए) और मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव (एमएआई) मुहैया कराती है। इसके अतिरिक्त मार्केट रिसर्च , ब्रांडिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रचार आदि के लिए भी हरसंभव सहायता प्रदान की जाती है।

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