हमजोली से गोली की बोली पर हैरान अपनी टोली

हमजोली से गोली की बोली पर हैरान अपनी टोली

RR Tiwariलम्बे अरसे ‘सैंया’ के ‘कोतवाल’ बनने का इंतजार था। जब ‘सैंया’ के हाथ में ‘कोतवाली’ की कमान आई तो उनकी बोली ही बदल गई। स्वाभाविक है, दुख तो होगा ही। सो हो रहा है। हालात ये है कि विश्व हिन्दू परिषद बेहद खफा है। गुस्से में उसने इतना तक कह दिया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इसकी कीमत चुकानी होगी। अब तो आप पूरी बात समझ ही गए होंगे कि मसला क्या है। नहीं! तो हम बताते हैं। लंबी चुप्पी के बाद आखिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गोरक्षकों पर हमलावर हुए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर उन्हें गुस्सा आता है, जो रात को गैरकानूनी कामों में लिप्त रहते हैं और उसे छिपाने के लिए दिन में गोसेवा का ढोंग करते हैं। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए उन्होंने राज्य सरकारों से कड़ा रुख अपनाने की अपील की। इतना ही नहीं, हद तो तब हो गयी जब प्रधानमंत्री ने गोरक्षकों से यहां तक कह दिया कि वे दलितों का उत्पीडऩ न करें। दलितों को मारने-पीटने के बजाय उन्हें पीएम को गोली मार दें तो ज्यादा बेहतर है। प्रधानमंत्री के इस बयान के कई निहितार्थ है। उनके पक्षकार दलितों के प्रति उनके हितैषी होने की बात कर रहें है तो वहीं विपक्षी पार्टियां मोदी के इस बयान ढोंग करार दे रही है जबकि गोरक्षक दल यानी हिन्दुवादी टोली भयंकर गुस्से में है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस तरह के हालात पैदा ही क्यों हुए कि पीएम को अपने ही लोगों से यहां तक कहना पड़ा कि दलितों के बजाय उन्हें गोली मार दो तो अच्छा है।
आज देश में जिस तरह के हालात बन-बिगड़ रहे हैं उसका वैश्विक परिप्रेक्ष्य में कुछ ज्यादा ही अहमियत है। कहा जाता है कि रूस के खिलाफ अमेरिका ने ही अल कायदा प्रमुख यानी ओसामा बिन लादेन को तैयार किया था। मतलब ये कि लादेन का पालन-पोषण अमेरिका द्वारा ही किया गया। अमेरिका ने उसे ट्रेनिंग दी, हथियार दिए, धनराशि दी। बाद में वही लादेन न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए काल बनकर उभरा, जो बाद में अमेरिकी सैनिकों के हाथों ही मारा गया। वर्ष 2011 में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने कहा था कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का अमेरिका के साथ गम्भीर मतभेद हैं। क्योंकि अमेरिका ने ही 1980 के दशक में सावियत संघ से लडऩे के लिए इस्लामी योद्धा तैयार किए थे। इसी से अलकायदा का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अल कायदा का जनक नहीं है। उल्टे अल कायदा ने पाकिस्तान में कई हमले कर करीब 30,000 लोगों को मारा। गिलानी ने पाकिस्तान के एबटाबाद में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के खिलाफ की गई अमेरिकी कार्रवाई पर संसद में बयान देते हुए यह बात बताई थी। इसके अलावा 30 मई, 2011 को भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद मुरली मनोहर जोशी ने वाराणसी में कहा था कि आतंकवादी संगठन तालिबान अमेरिका की देन है, जिसका खामियाजा सभी देशों को भुगतना पड़ रहा है। अमेरिका ने अफगानिस्तान में रूसी शासन को खत्म करने के लिए तालिबान को पनपने में मदद की, लेकिन उसका यह दांव उलटा पड़ गया। तालिबान ने जहां अपना मुंह भारत की तरफ कर दिया, वहीं अमेरिका पर हमला करने की फिराक में है। पाकिस्तान में लगातार हो रही आतंकी घटनाएं यह साबित कर रही हैं कि पाकिस्तान सरकार का तालिबान से नियंत्रण हट गया है।
इसके अलावा हर वक्त दुनिया को दहलाने की फिराक में बैठा आईएसआईएस को भी अमेरिका की कोख से ही निकला हुआ बताया जाता है। अमेरिकियों के इराक छोडऩे के बाद ऐसा क्या हो गया कि इराक चरमरा गया। यह संकट यूं ही नहीं आया, बल्कि इसका लंबा इतिहास है, जो आज कट्टरपंथी आइसिस के उदय के तौर पर सामने दिख रहा है। 2003 में अमेरिकी नेतृत्व वाली पश्चिमी सेनाओं ने इराक पर हमला बोला और राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का तख्ता पलट दिया। सद्दाम के तख्ता पलट के बाद इराक में शिया सुन्नी संघर्ष तेज हो गया। फिर अमेरिका को अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा। 2०11 में इराक से अमेरिकी सेना के हटने के बाद वहां संघर्ष की आशंका बढ़ गई। 2013 में इराक में स्थिति अचानक बेहद खराब हो गई। सुन्नी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। अल कायदा के समर्थन वाले आतंकवादियों ने हमले तेज कर दिए। आईएसआईएल, आईएसआईएस या आइसिस नाम से चल रहा संघर्ष अमेरिकियों के लिए नया है। आईएसआईएल यानी इस्लामी स्टेट ऑफ इराक एंड लेवांट, जो सुन्नी संस्था है। इराक युद्ध के दौरान शिया और सुन्नी संघर्ष में यह गुट खास तौर पर उभरा। जिस वक्त अमेरिका इराक में अपनी सैनिक गतिविधि समाप्त कर रहा था, अरब देशों में अशांति शुरू हो चुकी थी।
ट्यूनीशिया, मिस्र, लीबिया और यमन में संकट था। बीते वर्ष रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन टर्की के अंटालिया शहर में जी-20 की बैठक में अमेरिका के दोगलेपन को नंगा कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास पक्के सबूत हैं आईएसआईएस को करीब 40 देश आर्थिक मदद देते हैं, जिसमें जी-20 के भी कुछ सदस्य देश शामिल हैं। इसमें अमेरिका भी है। यानी अमेरिका भी आईएसआईएस की समय-समय पर मदद करता रहा है। पर अफसोस कि वही आईएसआईएस अब भष्मासूर बन चुका है। पूरी दुनिया उससे कांप रही है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलितों पर हुए हमलों के मुद्दे पर 6 अगस्त को हैदराबाद में कहा कि यदि कोई हमला करना चाहता है तो उन पर करें, दलितों पर नहीं। प्रधानमंत्री ने लगातार दूसरे दिन दलितों पर होने वाले हमलों के ख़िलाफ़ बोला है और गौरक्षक दल को आड़े हाथों लिया है। इससे पहले 5 अगस्त को को दिल्ली में उन्होंने कहा था कि 8० फीसदी गौरक्षक गोरखधंधों में लिप्त हैं। मोदी ने अब तक दलितों पर होने वाले हमलों पर चुप्पी साध रखी थी। राजनीति के जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंता में सच्चाई के भाव की कमी है। यह सिर्फ यूं ही नहीं कहा जा रहा है। इसके पीछे तथ्य हैं जिसकी रोशनी में बातें हो रही हैं। अगले साल की शुरुआत में यूपी और पंजाब में चुनाव होने हैं और इन दोनों राज्यों में दलित अच्छी-खासी संख्या में हैं। दलितों के ऊपर होने वाले हमलों की वजह से उनमें एकजुटता भी दिखाई दे रही है। वे गुजरात या दूसरे जगहों पर दलितों पर हमला करने वाले के तौर पर संघ से जुड़े गौरक्षक दल या बजरंग दल को पहचान चुके हैं। इसलिए हैदराबाद में प्रधानमंत्री ने जो चिंता जताई है उसे सही नहीं माना जा सकता क्योंकि उन्हें लगता है कि यूपी में जो दलित एकजुटता है वो और बड़ी हो जाएगी। पता चला है कि उत्तर प्रदेश में दलितों को अपनी ओर आकर्षित करने का अभियान व्यापक दलित आक्रोश के सामने फीका पड़ गया है। बीजेपी इस बात से चिंतित है कि दलित और मुसलमान हाथ ना मिला लें। इस चिंता के पीछे ठोस कारण है क्योंकि जिस तरह से दादरी में अख़लाक़ को मारा गया फिर गुजरात के ऊना और झारखंड में दमित समाज को निशाना बनाया गया, उससे संदेश गया है कि पूरे देश में संघ से जुड़े संगठन इस तरह के हमले कर रहे हैं और जबरन लोगों पर अपनी बात लाद रहे हैं।
बहरहाल, लबोलुआब ये है कि प्रधानमंत्री ने जिन गोरक्षकों से कहा है कि वे दलितों के साथ मारपीट करने के बजाय उन्हें पीएम को को गोली मार दें, वो सारे पीएम के ही लोग है। इन्हीं लोगों ने वर्ष 2014 में मोदी के पक्ष में तूफानी अभियान चलाया और उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया। गोरक्षक दल के बहाने पीएम ने अपने ही लोगों पर कटाक्ष किया है, जो विश्व हिन्दू परिषद को नागवार गुजरा है। विहिप के लोगों ने तो यहां तक कह दिया है कि यदि मोदी इसी तरह बयानबाजी करते रहे तो वर्ष 2019 के चुनाव में उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। बहरहाल, देखना है कि प्रधानमंत्री संघ, संगठन और सरकार में किस तरह तालमेल बिठा पाते हैं।

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