स्वास्थ्य ही नहीं, समाज के विकास में भी बाधक है तंबाकू का सेवन व धूम्रपान

स्वास्थ्य ही नहीं, समाज के विकास में भी बाधक है तंबाकू का सेवन व धूम्रपान

smokingधूम्रपान, मद्यपान, तंबाकू, गुटका व ड्रग आदि के दुष्परिणामों को देखते हुए चिंतित सरकारें तंबाकू व अन्य मादक पदार्थों के विरुद्ध लोगों में जागृति उत्पन्न कर इनके सेवन को हतोत्साहित करती रही है। वर्तमान सरकार पर इस मामले में कुछ करने का दबाव है तो कुछ लोगों ने तंबाकू के पक्ष में ही अभियान छेड़ दिया है। ख़ुद बीजेपी सरकार में तंबाकू अधिनियम के प्रावधानों पर विचार करने वाली संसदीय समिति के प्रमुख दिलीप गांधी ने कहा है कि तंबाकू से कैंसर के संबंध को साबित करने वाला कोई शोध भारत में नहीं हुआ।
विश्व में किए गए अनेकानेक शोध बतलाते हैं कि तंबाकू स्वास्थ्य के लिए घातक व कैंसर पैदा करने वाला है। सुनीता तोमर देश में तंबाकू के खि़लाफ़ अभियान में प्रमुख थी जो कैंसर से पीडि़त थी। उसके कैंसर का क्या कारण था? यदि वह तंबाकू के सेवन के कारण कैंसर से पीडि़त नहीं थी तो भारत सरकार ने उसे तंबाकू से होने वाले कैंसर विरोधी अभियान के लिए क्यों चुना था?
धूम्रपान का सबसे दुखद पहलू यह है कि जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनके आसपास के लोग जैसे घर के सदस्य, मित्र व रिश्तेदार तथा साथ काम करने वाले लोग उनके मुँह से निकले धुएँ के कारण उनसे भी ज़्यादा प्रभावित होते हैं। ऐसे लोग जो धूम्रपान नहीं करते लेकिन धूम्रपान करने वाले लोगों के साथ रहने या काम करने को अभिशप्त हैं, वे अपने नाक के ज़रिए धुआँ और ज़हरीली गैसें सीधे अपने फेफड़ों में ले जाने के लिए विवश होते हैं। ऐसे पैसिव स्मोकर धूम्रपान करने वालों से ज़्यादा जल्दी घातक रोगों की चपेट में आ जाते हैं।
वास्तव में आत्मघाती हमलावरों से भी ख़तरनाक होते हैं धूम्रपान करने वाले। छोटे बच्चों विशेष रूप से गर्भस्थ व नवजात शिशुओं तथा गर्भवती महिलाओं पर इन धूम्रपान करने वालों का बहुत बुरा असर होता है और जो गर्भवती महिलाएँ स्वयं धूम्रपान करती हैं उनकी हिमाकत के तो क्या कहने। धूम्रपान करने वाली महिलाओं के बच्चों के मंदबुद्धि व विकलांग पैदा होने की संभावना बहुत अधिक होती है।
पैसिव स्मोकिंग बच्चों के लिए भी अत्यंत घातक है। एक शोध के अनुसार धूम्रपान करने वाले पैरेंट्स या परिवार के अन्य सदस्यों के बच्चे किशोरावस्था तक दूसरे सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक मोटे भी हो जाते हैं। शोध के अनुसार ये भी पता चलता है कि बच्चों में पैसिव स्मोकिंग के कारण उत्पन्न मोटापे का असर अधिक ख़तरनाक होता है और अपेक्षाकृत लंबे समय तक बना रहता है। उनका बॉडी मास इंडेक्स भी अधिक हो जाता है।
धूम्रपान करने वाले लोगों का सामाजिक जीवन भी कम प्रभावित नहीं होता। धूम्रपान करने के कारण धूम्रपान करने वाले लोगों के मुँह से अक्सर दुर्गंध आती रहती है। कई बार यह दुर्गंध असह्य होती है और इस कारण से कुछ लोग उनके पास बैठना पसंद नहीं करते। इससे संभव है कि धूम्रपान करने के कारण हम अच्छे मित्रों व योग्य व्यक्तियों की संगति से हमेशा के लिए हाथ धो बैठें। यदि धूम्रपान करने वाला स्वयं एक अच्छा व्यक्ति है तो भी संभव है कि उसकी धूम्रपान की लत के कारण उसके मित्र, परिवार के सदस्य व अन्य व्यक्ति उससे बचने के कारण उससे लाभान्वित होने से वंचित रह जाएँ।
तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों के साथ भी ऐसा ही होता है। तंबाकू चबाने वाले लोग सख़्त चीज़ें तो छोडि़ए, ताज़ा फल, सब्जिय़ाँ व सलाद वग़ैरा भी नहीं खा पाते क्योंकि उनके दाँत चबाने के क़ाबिल नहीं रहते। मेरे एक रिश्तेदार हैं जो छत्तीसगढ़ में रहते हैं। वो पान, गुटका और तंबाकू काफी मात्र में लेते हैं। अब उनकी यह हालत हो गई है कि खट्टे पदार्थ, ताज़ा फल, सब्जिय़ाँ व सलाद वग़ैरा तो दूर ठंडी, गर्म व मीठी चीज़ें भी नहीं खा सकते क्योंकि तंबाकू की वजह से दाँत पूरी तरह से खऱाब हो चुके हैं।
धूम्रपान व तंबाकू के सेवन से हमारा बाह्य व्यक्तित्व भी कम प्रभावित नहीं होता। मुँह, होंठों व दाँतों का स्वाभाविक आकर्षक रंग बदल जाता है। वे रुग्ण ही नहीं, बदसूरत भी हो जाते हैं। ऐसे लोग जब हँसने या बोलने के लिए मुँह खोलते हैं तो उनके मुँह से न केवल अप्रिय गंध बाहर निकलती है अपितु उनके होंठ, दाँत व जिह्वा भी वितृष्णा उत्पन्न करते हैं।
आश्चर्य की बात है कि इस सबके बावजूद कुछ लोग कोक व चाय जैसे पेय पदार्थों का तो विरोध करते हैं और चाय के इस्तेमाल के दुष्परिणामों पर हुए शोधों की जानकारी तक देते हैं लेकिन तंबाकू जैसे जानलेवा पदार्थ का पक्ष लेते हैं, उसमें औषधीय गुण खोजने की पैरवी करते हैं। आज तंबाकू के पक्ष में बोलना किसी के व्यावसायिक हित का द्योतक तो हो सकता है, समाज के स्वास्थ्य का नहीं। इस समाज या राष्ट्र के लोगों को धूम्रपान, नशे या मादक पदार्थों का आदी बना कर, उन्हें कमज़ोर, अशक्त, बीमार व अकर्मण्य बना कर ख़ूब कमाई भी कर ली तो कौन सा बड़ा तीर मार लिया।
इससे आप स्वयं द्वारा निर्मित कमज़ोर, अशक्त, बीमार व अकर्मण्य समाज के मध्य रहने को भी तो अभिशप्त होंगे। संभव है आपका अपना अति प्रिय अथवा अति निकट कोई व्यक्ति भी इस बुराई के जाल में फँस कर अपना जीवन तबाह कर ले और ऐसा प्राय: होता है। तो क्यों न इस समस्या पर आज ही गंभीरता से विचार किया जाए और समाज को तंबाकू व नशे से मुक्त करने के लिए कुछ ठोस व्यावहारिक क़दम उठाए जाएँ।
– सीताराम गुप्ता

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