स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं, अल्यूमीनियम के बर्तन

स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं, अल्यूमीनियम के बर्तन

download downloadअधिकतर घरों में भोजन पकाने के लिए अल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग किया जाता है क्योंकि ये गरमी के बहुत अच्छे सुचालक होने के साथ ही साथ हल्के और सस्ते भी होते हैं। फूटने के बाद अनुपयोगी हुआ बर्तन आधे-अधूरे दामों में बिक भी जाता है। रूहानी विश्वविद्यालय, श्रीलंका ने अपनी पत्रिका नेचर में एक जानकारी प्रकाशित करते हुए बताया था कि अल्यूमीनियम के बर्तन में ‘अगर फ्लोराइड युक्त पानी उबाला जाये तो उसमें अल्यूमीनियम की मात्रा और अधिक घुल जाती है। पत्रिका नेचर के अनुसार एक पी. पी. एम. मात्रा युक्त फ्लोराइड वाले जल को भी अगर अल्यूमीनियम के बर्तन में उबाला जाये तो उसमें 220 पी. पी. एम तक अल्यूमीनियम घुल जाता है। अधिक समय तक उबालने पर यह मात्रा बढ़कर 600 पी. पी. एम. तक हो जाती है।  चूंकि अपने देश में फ्लोराइडयुक्त पानी ही पाया जाता है। देश के उड़ीसा, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात व हरियाणा के कुछ हिस्सों के पेयजल में तो 2 से 30 पी. पी. एम. तक फ्लोराइड पाया जाता है, इसलिए हमें सचेत हो जाना चाहिए। खासतौर से इसलिए भी क्योंकि अपने देश में चाय, काफी पीने का प्रचलन बहुत है और चाय व काफी अल्यूमीनियम के बर्तनों में ही अधिकतर बनाई जाती है। मतलब साफ है कि हम रोज चाय, काफी के रूप में अल्यूमीनियम के बर्तन में उबला हुआ पानी ही पी रहे हैं जो दिमाग पर दुष्प्रभाव के लिए पर्याप्त है क्योंकि वैज्ञानिकों के अनुसार अल्यूमीनियम की अधिक मात्रा हमारी विचारशक्ति और स्मरण शक्ति को नष्ट करती है। डॉ. ए. पी. मैथ्यु के अनुसार यह एक क्रियाशील धातु है और इसके बर्तन वायु के संपर्क से अपने ऊपर आक्साइड की परत भी जमा लेते हैं। अम्लीय वस्तुएं जैसे-नींबू, टमाटर, दही आदि से क्रिया करके आक्साइड और अल्यूमीनियम इनसे बने खाद्य पदार्थों में घुल जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं।
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 ये पाचन तंत्र, दिमाग और हृदय पर दुष्प्रभाव डालते हैं। साथ ही इन तत्वों से क्रिया करने के बाद भोजन के पौष्टिक तत्व असरहीन या कम असरदार हो जाते हैं। लंदन के चारिग क्रास अस्पताल के डॉक्टरों ने भी ऐसा ही निष्कर्ष निकालते हुए कहा था कि अल्यूमीनियम के लवणों को निष्क्रिय समझना और इनको हमारे पाचन तंत्र द्वारा न सोखे जाने लायक समझना बहुत बड़ी भूल है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अल्यूमीनियम के  बर्तन में अम्लीय नमकीन भोजन पकाना तो अलग, पकाकर रखना भी नहीं चाहिए। अतएव हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारी रसोई में अल्यूमीनियम के बर्तनों की उपस्थिति कम से कम हो। सब्जियों के लिए लोहे की कड़ाही और चाय, काफी के लिए स्टील के बर्तन ही ठीक रहते हैं। इनसे हमारे स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
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लोहा तो स्वास्थ्यवद्र्धक भी होता है। हां, यह बात अलग है कि इनकी साफ-सफाई और रख-रखाव में श्रम थोड़ा ज्यादा करना पड़ेगा। फिलहाल, यह ध्यान तो रखा ही जाना चाहिए कि अल्यूमीनियम के बर्तनों में टमाटर, इमली, अमचूर, आम, दही आदि अम्लीय पदार्थों से युक्त खाद्य पदार्थ न बनें तथा न ही उनमें चाय और काफी ही बनें। यह अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए बहुत ही आवश्यक है।
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