स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं डियोडरेंट्स

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं डियोडरेंट्स

शरीर में पसीना आना कुदरती है। भगवान ने जानवर और इंसानों के शरीर से रक्त और अन्य कोशिकाओं से गंदगी बाहर निकालने तथा इसे ठंडा रखने के लिये पसीने की ईजाद की है। अगर आप माइक्रोस्कोप या पढऩे वाले लेन्स से देखें तो आपको शरीर पर बारीक छिद्र दिखेंगे जहां से पसीना बाहर आता है।
त्वचा के पीछे पसीने की ग्रंथियां होती हैं। अधिक गर्मी तथा शारीरिक मेहनत अथवा मानसिक तनाव या परेशानी और घबराहट की स्थिति में ग्रंथियां पसीना छोड़ती हैं। कैदी के पसीने से पुलिस उसके झूठ बोलने का अंदाज लगा लेती है। यह तकनीक झूठ बोलने वाली मशीन (लाई डिटेक्टर) में भी इस्तेमाल होती है।
हमारे शरीर से निकलने वाला पसीना त्वचा की सतह पर फैलकर इसे ठंडा रखने में मदद करता है। शरीर में औसतन 20,000,00 (बीस लाख) ग्रंथियां होती हैं जो रक्त को शुद्ध रखने में मदद करती हैं। पसीने में प्राय: 98 प्रतिशत पानी और उसमें घुला अमोनिया, प्रोटीन, नमक और वसा मौजूद होते हैं।
पसीना अगर बहुत क्षारीय है तो पसीने में दुर्गंध आती है तथा बगल से निकलने वाले पसीने से कपड़े पीले पड़ जाते हैं जो धोने पर भी नहीं जाते। कभी-कभी तो यह दुर्गंध इतनी तेज और बदबूदार होती है कि व्यक्ति के कमरे में दाखिल होते ही कमरा दुर्गंध से भर जाता है। ऐसे में मित्रों के साथ बैठना, सिनेमाघर और रिश्तेदारी में बैठना दूभर हो जाता है।
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पसीने की दुर्गंध को दबाने के लिये बाजार में विभिन्न प्रकार के खुशबुओं के डियोडरेंट्स बिकते हैं। ऐसे खुशबूदार डियोडरेंट्स का मजा पांच सितारा होटल और शादी ब्याह या पार्टियों में देखने को मिलता है। डियोडरेंट्स का इस्तेमाल लड़कियां और महिलाएं बहुत अधिक करती हैं।
महिलाओं की त्वचा अत्यधिक कोमल होने की वजह से डियोडरेंटस सेहत को हानि पहुंचा रहे हैं। पसीने की क्रिया को रोकना मुश्किल है। बाजार में उपलब्ध सभी डियोडरेंट्स में अल्यूमीनियम निर्मित लवण मिलाये जाते हैं जो हमारी त्वचा के भीतर विराजमान ग्रंथियों को नुक्सान पहुंचाते हैं। आइये, डियोडरेंट्स के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करें।
– डियोडरेंटस त्वचा के नीचे पसीने की ग्रंथि के छिद्रों को संकुचित करते हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर ये छिद्रों को बंद कर देते हैं जिससे पसीने की क्रिया बंद हो जाती है। कई महिलाओं में शरीर और बगल में दाने और फुंसियां भी निकल आती हैं।
– डियोडरेंट्स स्प्रे करते वक्त लापरवाही से आंखों में चला जाये तो आंखें लाल हो जाती हैं और अगर तुरंत शुद्ध पानी से न धोया जाये तो रोशनी भी जा सकती है।
– महिलाओं में बगल के नजदीक स्तन होने के कारण कभी-कभी डियोडरेंट्स में पाये जाने वाले जिरकालीन साल्ट स्तन कैंसर को जन्म देते हैं।
परिवर्तन संसार का नियम है
– डियोडरेंट्स में पाये जाने वाले अल्यूमीनियम लवण ग्रंथियों द्वारा रक्त कोशिकाओं तक पहुंच जाते हैं तथा रक्त में घुलकर लंबे समय के बाद अल्जाइमर रोग को जन्म देते हैं।
– डियोडरेंट्स को कभी छाती पर स्प्रे न करें। ऐसा करने पर हृदय की गति धीमी पड़ जाती है और इससे अचानक मृत्यु भी हो सकती है।
– इस आधुनिक युग में डियोडरेंट्स का उपयोग रोकना नामुमकिन है। पसीने की दुर्गंध को मिटाने के लिये 10-12 गिलास पानी पियें। नहाते वक्त पानी में डिटाल या नींबू का रस मिलाकर नहायें। शरीर में महक बढ़ाने के लिये नहाने के पानी में गुलाबजल डालें। हफ्ते में एक बार बगल में नीम और चंदन का लेप लगायें।
– बाजार से डियोडरेंट्स खरीदते वक्त देख लें कि उसमें अल्यूमीनियम क्लोराइड न हो क्योंकि यह सेहत के लिये नुकसानदायक है। डियोडरेंट् अगर अल्यूमीनियम क्लोरहाइड्रेट से बना है तो जरूर खरीदें क्योंकि त्वचा के लिये अत्यधिक सुरक्षित हैं। प्रोपेन, ब्युटेन, जिंक, जिरकोनियम युक्त डियोडरेंट्स कम सुरक्षित हैं तथा दिन में केवल एक बार प्रयोग करें।
भोजन में फल का सेवन अधिक करें तथा डियोडरेंट्स की जगह पाउडर का इस्तेमाल करें।
– इन्दु दिनकर गर्ग

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