स्वास्थ्य और सौंदर्यप्रदाता है दही

स्वास्थ्य और सौंदर्यप्रदाता है दही

दूध की अपेक्षा दही को अधिक लाभकारी माना जाता है। यह प्राचीन काल से ही हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग होता रहा है। पुरानी पीढ़ी के लोग दही को अधिक महत्त्व देते हैं। इसे बच्चे, युवा, बूढ़े सभी लोग रूचि से खाते हैं। इसमें अन्य खाद्य पदार्थों की अपेक्षा पोषक तत्व अधिक मात्रा में रहते हैं।
इसे हर मौसम में प्रयोग में लाया जा सकता है परंतु गर्मियों में दही का प्रचलन अन्य ऋतुओं की अपेक्षा ज्यादा होता है। इस ऋतु में प्रतिदिन नियम से दही लेना पाचन की दृष्टि से अच्छा माना जाता है। दही पाचन व्यवस्था को सुधारता है तथा बल प्रदान करता है। स्वाद में तो सभी इसके दीवाने हैं ही। स्वास्थ्य की उन्नति की दृष्टि से इसके समान कोई आहार नहीं है।
भारत में ही नहीं, संसार भर में दही का उपयोग स्थान के अनुसार खाने, सौंदर्य, औषधि व मांगलिक अवसरों पर होता रहा है। सुपाच्य व सुस्वादु गुण के कारण दही का प्रयोग प्राय: सभी घरों में समान रूप से होता रहा है। यह भी असंदिग्ध रूप से सिद्ध किया जा चुका है कि दही से जीवन अवधि में बढ़ोत्तरी होती है।
दही के औषधीय गुण:-
– दही में एक ऐसा पदार्थ पाया जाता है जो रक्त में उपलब्ध कोलेस्ट्रोल को कम करता है, अत: यह हृदय रोग में लाभ पहुंचाता है।
– पेट की गड़बड़ी (कब्जियत) ही सभी रोगों की जड़ है। उम्र बढऩे के साथ-साथ रोग प्रतिरोधी क्षमता में ह्नास होता है परंतु दही का समुचित मात्रा में सेवन प्रतिरोधी क्षमता का विकास करता है।
– दही में विद्यमान लैक्टोबैसिलस बल्गेरिकस और स्ट्रेप्टोकोकस थमोफिलस बैक्टीरिया जो फायदेमंद बैक्टीरिया हैं, शरीर के समुचित विकास में अनुकूल प्रभाव डालते हैैं। इसके सेवन से ट्यूमर रोग भी ठीक होने की संभावना रहती है।
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– खाना खाने के बाद दही में चुटकी भर अजवायन व काला नमक मिलाकर सेवन करने से वायु रोग में आराम मिलता है। इस तरह के प्रयोग से कब्जियत व बवासीर रोग में भी 25 प्रतिशत तक लाभ होता है।
– दही में नीम की कोंपल पीस कर फोड़े-फुंसियों में लगाने से लाभ होता है और अगर लस्सी में 1-2 पत्ती पीसकर उपयोग करें तो खून साफ होता है।
दही सौंदर्य प्रसाधन भी:-
प्राचीन समय से ही दही का प्रयोग सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में होता आ रहा है। यह स्नायुओं और त्वचा को पुष्टिकारक तत्व प्रदान करता है। इसके उपयोग से सौन्दर्य में चार-चांद लगाए जा सकते हैं।
– त्वचा को नर्म और साफ रखने के लिए दही में नींबू का रस मिला कर चेहरे, गले व बाहों पर लगाने से त्वचा में चमक आती है।
– दही में बेसन मिलाकर लगाने से त्वचा की सफाई हो जाती है। इस प्रयोग से मुंहासों में भी लाभ होता है।
– दही में आटे का चोकर मिलाकर दस मिनट रखें। फिर इसे उबटन की तरह प्रयोग करें। इस उबटन से त्वचा को विटामिन ‘सी’ व ‘ई’ मिलता है जिससे उसमेें चमक बनी रहती है।
– दही में संतरे व नींबू का रस मिलाकर क्लींजर के रूप में उपयोग करने से चेहरे का रंग निखर कर कांति बढ़ जाती है।
– दही में काली मिट्टी मिलाकर केश धोने से केश मुलायम, चमकीले व घने हो जाते हैं।
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दही बनाने की विधि:-
दही हमेशा शुद्ध और ताजे दूध से ही बनाया जाना चाहये। गाय अथवा भैंस का दूध या दोनों मिला हुआ दूध काम में लाया जा सकता है। दूध को दही बनने में अनेक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। यह एक रासायनिक विधि है। अत: उत्तम दही पाने के लिए विधिवत वैज्ञानिक तरीकों का पालन करना आवश्यक है।
साफ बर्तन में दूध को आधा घंटे तक धीरे-धीरे गर्म करें, तत्पश्चात् दस मिनट तक तेज आंच पर खूब उबालें। दूध उबालने के तुरंत बाद बर्तन को आग से उतार कर साधारण तापमान 30-35 डिग्री सें. पर ठंडा करें।
दही बनाने में सावधानी:-
कांसा, पीतल, तांबा एवं अल्यूमीनियम इत्यादि के बर्तनों में दही नहीं जमाना चाहिये। दही जमाने के लिए मिट्टी या चीनी मिट्टी के बर्तन ही उपयुक्त होते हैं।
– प्रवीन कुमार मिश्रा 

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