स्वादिष्ट व लाभदायक ‘हरा पुदीना’

स्वादिष्ट व लाभदायक ‘हरा पुदीना’

उत्तर भारत के लोग लौकी मिलाकर चने की दाल या अरहर की दाल के साथ हरे पुदीने की चटनी बड़े शौक से खाते हैं।
कच्चे आम या अनारदाना व प्याज डालकर बनाई गई यह चटनी होती भी बड़ी स्वाद और पौष्टिक है। ठंडी तासीर वाले इस हरे पुदीने के और क्या उपयोग हैं, आइए देखते हैं:-
हरा पुदीना पेट की बीमारियों जैसे पेट दर्द, बदहजमी, खट्टे डकार, साधारण दस्त आदि के लिए अति उपयोगी है। इन सब प्रकार की शिकायत होने पर ताजे पानी में पुदीने का रस डालकर पीना चाहिए। राहत मिलेगी।
गैस ट्रबल, एसिडिटी आदि में होने वाली जलन को शांत रखता है, पेट गैस की बीमारियों के लिए डॉक्टरों द्वारा दी जाने वाली सोडा मिंट या जिंजर मिंट गोलियों में भी सत् पुदीना, मीठा सोडा और सत् अदरक ही होता है जिसे एक चम्मच मीठा सोडा, आधा चम्मच पुदीने का रस और चौथा हिस्सा अदरक का रस मिलाकर घर पर भी तैयार किया जा सकता है।
गले का कैंसर और उससे बचाव
पुदीना जहां गला, पेट व आंतडिय़ों को ठंडक पहुंचाता है, जहां बीमारी के कीटाणुओं का नाश भी करता है। मुंह से बदबू और मुंह पक जाने की दशा में भी ताजी पत्तियां पानी डालकर, इस पानी से कुल्ला करने से बदबू दूर हो जाती है और पके हुए मुंह को राहत एवं ठंडक पहुंचती है।
दांतों की बीमारियों जैसे दांतों में से रक्त बहना, दांतों को कीड़ा लगना, दांतों में सडऩ व दर्द आदि के इलाज के लिए प्रयोग किए जाने वाले गम पेंट व टुथ ड्राप्स में भी सत्त पुदीना, सत्त अजवायन, कपूर व लौंग के तेल आदि का प्रयोग होता है।
इसके अतिरिक्त आंतरिक (अंदरूनी) चोट की दशा में सूजन व दर्द आदि को दूर करने वाली औषधियों जैसे मरहम, मालिश करने वाले तेल में भी पुदीने के सत्त का इस्तेमाल किया जाता है।
चाय पियें लेकिन देखभाल कर
यह सूजन व दर्द को दूर कर ठंडक पहुचंाता है। इसलिए त्वचा के थोड़ा से जलने पर, चोट लगने पर या किसी कीड़े मकौड़े के काटने पर पुदीने की पत्तियां पीसकर लगा ली जाएं तो राहत मिलती है।
पुदीने को कई और घरेलू वस्तुओं जैसे- सोंठ, अजवायन, अदरक, मीठा सोडा और कपूर आदि के साथ मिलाकर भी प्रयोग में लाया जा सकता है।
– रमन के. सुधीर

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