स्वस्थ जीवन का रहस्य: संतुलित आहार

स्वस्थ जीवन का रहस्य: संतुलित आहार

संतुलित भोजन वह भोजन होता है जिसमें भोजन के समस्त अवयव एवं पोषक तत्व आदि शरीर की आवश्यकता अनुसार उचित अनुपात में होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण स्वस्थ जीवन व्यतीत करने तथा अपना कार्य करने के लिए आवश्यकतानुसार ऐसा भोजन लेना चाहिए जिससे पर्याप्त शक्ति मिल सके और शरीर का विकास हो। यदि व्यक्ति को पर्याप्त शक्ति न मिले तो वह कमजोर हो जाएगा, परिणामस्वरूप उसकी कार्यक्षमता कम हो जाएगी। भोजन के अवयवों की जितनी अधिक मात्रा प्राप्त होगी, उनसे उतनी ही ऊर्जा मिलेगी।
विभिन्न व्यक्तियों को अलग-अलग प्रकार के भोज्य पदार्थों की आवश्यकता भिन्न-भिन्न होती है। यह भिन्नता आयु, लिंग, शरीर का आकार, जलवायु, कार्य आदि की भिन्नता के कारण होती है।
संतुलित आहार से ही शरीर का सही पोषण होता है और स्वास्थ्य तथा आयु की वृद्धि होती है। संतुलित आहार में प्रोटीन, कार्बोज, वसा, खनिज लवण, रेशा, जल तथा सभी प्रकार के विटामिन उचित मात्रा में होते हैं जिससे शरीर की सभी आवश्यकतायें पूरी हो जाती हैं। यदि उनमें से किसी की भी कमी या बहुलता हो जाएगी तो वह शरीर के लिए नुक्सानदायक साबित होगी।
तापमान बढने से बढती है बीमारी
शुद्ध रक्त में रसायनिक प्रक्रिया के हिसाब से 80 प्रतिशत क्षार तथा 20 प्रतिशत अम्लत्व होता है, उसी हिसाब से ही संतुलन रखना चाहिए। किसी का भी कम या ज्यादा होना शरीर में विकार पैदा करेगा, इसलिए सात्विक, शाकाहारी, हल्का, पौष्टिक व ताजा भोजन व मौसमी फल ही ग्रहण करें। यदि मोटे हिसाब से हम अपने भोजन में दो तिहाई भाग कार्बोज, छठा भाग वसा, छठा भाग प्रोटीन, खनिज लवण, विटामिन रखेें तो साधारण मनुष्य के लिए यह संतुलित भोजन समझा जा सकता है परन्तु मनुष्य की आयु डीलडौल, पेशा, मौसम, देश एवं स्थान के विचार से इस प्रकार के भोजन में कमी-पेशी हो होना स्वाभाविक है। एक प्रौढ़ मनुष्य की बजाए एक गर्भवती स्त्री को प्रोटीन की ज्यादा आवश्यकता होती है क्योंकि उनके शरीर में बढ़ोत्तरी चल रही होती है। ऐसे ही एक लड़के और लड़की में भी पोषक तत्वों की आवश्यकता में भिन्नता होती है। प्रत्येक मनुष्य भोजन के बिना तो 30-40 दिनों तक जीवित रह सकता है परन्तु यदि कुछ दिन भी पानी के बिना रहा जाए या सिर्फ सूखा भोजन ही लिया जाए तो मृत्यु तक हो सकती है क्योंकि पानी ही जीवन का अमृत है।
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शरीर के कुल भार का 67 प्रतिशत पानी है। यदि पानी की कमी 10 प्रतिशत से ऊपर हो जाए तो डीहाइड्रेशन और यदि 15-20 प्रतिशत हो जाए तो मृत्यु का कारण भी बन सकती है और 5 प्रतिशत तक की कमी भी हमारे शरीर की कार्यक्षमता में बाधा डालती है इसलिए हमें 3-4 लीटर पानी रोजाना पीना चाहिए। भोजन में चर्बी व शूगर की ज्यादा मात्रा भी बीमारियां पैदा करती है इसलिए सुबह दोपहर और शाम का खाना संयमित व संतुलित होना चाहिए।
दूध और अण्डे को संतुलित आहार की श्रेणी में रखा गया है। दूध में 80 प्रतिशत पानी, प्रोटीन, चर्बी 3.6 प्रतिशत, कार्बोहाईडे्रट 4.47 प्रतिशत, खनिज लवण 0.7 प्रतिशत होते हैं। लैक्टोज जो शूगर के रूप में होता है, सिर्फ दूध में ही पाया जाता है। इस तरह उपरोक्त हिसाब से संतुलित आहार ग्रहण करके हम अपनी जीवनचर्या को भी संतुलित रूप में चलाने में सक्षम हो सकते हैं।
– रेणु गार्गी

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