स्तनों में दर्द हो तो क्या करें

स्तनों में दर्द हो तो क्या करें

brest-painशरीर के अन्य अंगों की तरह महिलाओं के स्तन भी रोगग्रस्त हो जाते हैं। कभी-कभी उनके स्तनों में जोरों का दर्द होने लगता है। जरा सा धक्का लगने पर भी स्तनों में बहुत दर्द होता है। रोगग्रस्त महिला स्तनों के दर्द से बेचैन हो जाती हैं। कई बार युवतियां शर्म-संकोच के चलते इलाज नहीं कराती। इससे तकलीफ बढ़ती जाती है। समय पर इलाज कराने से दर्द निश्चित रूप से दूर हो जाता है।
स्तनों में दर्द दो कारणों से होता है, एक ज्ञात कारणों से दूसरा अज्ञात कारणों से-ज्ञात कारणों में स्तनों से संबन्धित अंगों का रोगग्रस्त होना, स्तनों में सूजन, गांठ आदि कारणों से होने वाले दर्द को गौण दर्द कहा जाता है। कभी कभी काफी प्रयास के बाद भी दर्द का कोई बाहरी कारण नहीं दिखलाई देता है। ऐसे होने वाले दर्द को कार्यात्मक दर्द कहा जाता है।
लक्षण:-दर्द कभी तेज, कभी धीमा होता है। कभी दर्द लगातार बना रहता है तो कभी रूक रूककर होता है। दर्द कटने, चुभने या खिंचाव जैसा होता है। स्तनों में होने वाला दर्द स्तनों के अंदर या बाहरी भाग में भी हो सकता है। दर्द कभी एक स्तन में या दोनों स्तनों में होता है। स्तन या स्तनाग्र को छूने पर भी असहनीय दर्द होता है। रोगग्रस्त महिला पीड़ा के मारे बेचैन हो जाती है।
कारण:-कभी-कभी महिलाओं के यौन अंगों के संरचनात्मक या कार्यात्मक दोनों स्वरूपों के कारण होता है। मनोलैंगिक कारणों से भी दर्द हो सकता हैं माहवारी की अनियमितता, गर्भाशय डिंबवाहिनी के रोग, हिस्टीरिया व स्तनपान के दौरान दर्द हो सकता है। कई युवतियों को माहवारी के शुरू होते ही दर्द होने लगता है। कई को गर्भावस्था के समय दर्द होता है। सहवास के समय तकलीफें होने पर या उसमें कोई शिकायत होने पर बंध्यत्व व स्तन में गांठ होने पर भी दर्द हो सकता है। इलाज:- यदि समय पर इलाज कराया जाय तो परेशानी जल्दी दूर हो जाती है। केवल दर्दनाशक दवाओं के इस्तेमाल से रोग पूर्णत: ठीक नहीं होता। दर्द के कारणों को जानकर इलाज किया जाय तो रोगी को जल्दी लाभ मिलता है, इसलिए दर्द से संबंधित शारीरिक और मानसिक कारणों को जानना जरूरी होता है। स्थानिक दर्द को दूर करने के लिए आयुर्वेद में लेप, वातशामक औषधियां पंचकर्म चिकित्सा के अन्तर्गत उर:वस्ती का उल्लेख भी है।
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औषधियुक्त तेलों से मालिश से भी दर्द दूर हो जाता है। मासिक संबंधी शिकायत के कारण स्तनों में दर्द होने पर उन शिकायतों को दूर करना जरूरी होता है। हिस्टीरिया जैसी बीमारी का उचित इलाज करना चाहिए। अंतर्वस्त्र या अन्य कपड़े भी सही होने चाहिए। बहुत तंग अंतर्वस्त्र या कपड़े पहनने के कारण भी स्तनों में दर्द होता है। निम्न घरेलू नुस्खों के इस्तेमाल से स्तनों के दर्द में लाभ मिल सकता है:-
– अश्वगंधा और शतावरी का चूर्ण एक-एक चम्मच कुछ दिन नियमित रूप से लेने से दर्द से छुटकारा मिलता है।
– शतधौंत घृत या पुराने घी से हल्का मालिश करने से लाभ मिलता है।
– स्नान करते समय निर्गुंडी के पतों का क्वाथ दर्द वाले स्तन पर धीरे-धीरे उड़ेलने से लाभ मिलता है।
– रोज-सुबह-शाम स्तनों पर ठंडा पानी उड़ेलें तथा सूखे तौलिए से हल्के-हल्के घिसकर पोंछ दें। कुछ दिनों तक ऐसा करने से दर्द से मुक्ति मिलती है।
9 सितम्बर 2016, शुक्रवार

– कमजोरी होने की स्थिति में भोजन के बाद एक-एक चम्मच लोहासव कुछ दिनों तक सेवन करना चाहिए।
– सुन्दरी संजीवनी 2-2 चम्मच सेवन करने से भी लाभ मिलता है।
– महायोगराज गुग्गलु की 1-1 गोली सुबह-शाम पानी से लेनी चाहिए।
रोग के कारणों को जानकर इलाज करने से शीघ्र लाभ मिलता है।
– राजा तालुकदार

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