सौंदर्य वृद्धि के लिए कोई जरूरी नहीं है महंगे संसाधन..सुंदरता के लिए हंसना है जरूरी..!

सौंदर्य वृद्धि के लिए कोई जरूरी नहीं है महंगे संसाधन..सुंदरता के लिए हंसना है जरूरी..!

 प्रत्येक व्यक्ति अपने ढंग से सुंदर है परंतु इस सुंदरता को बनाये रखना तथा इसे और बेहतर बनाना भी मनुष्य के ही हाथ में है। सौंदर्य वृद्धि के लिए कोई जरूरी नहीं है कि कृत्रिम एवं महंगे संसाधनों का प्रयोग किया जाये। प्राकृतिक रूप से भी सौंदर्य को बढ़ाया जा सकता है।
सौंदर्यवद्र्धन में सब्जी और फलों का सर्वाधिक योगदान है। सौंदर्य प्रसाधनों को प्रयोग करने के बजाय कुदरती प्रजीवक तत्व, हरी पत्तेदार सब्जियां या फलों का इस्तेमाल बेहतर परिणाम देता है। सब्जी और फलों का व्यवहार करने से रक्त संचालन बढ़ता है, त्वचा के रंग में ज्यादा निखार आता है, त्वचा के टिश्यू मजबूत बनते हैं और सिकुड़ी हुई त्वचा में कसाव आता है।
सुंदरता बढ़ाने में टमाटर, नींबू, ककड़ी, संतरा आदि ज्यादा सहायक हैं। इनका रस त्वचा पर लगाने से टॉनिक जैसा काम करता है। हरी पत्तियां वाली सब्जियां खाने से खून तो शुद्ध होता ही है, कब्ज भी दूर होती है और शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ता है। इस प्रकार सब्जी और फल प्रकृति द्वारा प्रदत ऐसी अनुपम भेंट हैं जो हमारे सौंदर्य में चार चांद लगाने में पूर्णत: सक्षम हैं।
छाछ के फेस पैक से बनाएं अपने चेहरे को बेदाग और खूबसूरत

सौंदर्य बढ़ाने में व्यायाम का भी कम महत्त्व नहीं है। नियमपूर्वक रोज निर्धारित समय तक व्यायाम करने से बदन सुडौल व सुंदर बनता है। चर्बी नहीं बढ़ती, स्नायु के साथ हृदय और फेफड़े मजबूत होते है फलत: शरीर आकर्षक और सुंदर दिखता है।
तन-मन की सुंदरता के लिए निद्रा भी जरूरी है। नींद पूरी न हो तो सौंदर्य बढऩे की बजाय नष्ट होने लगता है। कम नींद की वजह से चेहरा निस्तेज व थका-थका सा लगता है। आंखों के नीचे काले धब्बे हो जाते हैं, स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी आ जाता है। रात में सोने से पहले दूध का सेवन करने से अच्छी नींद आती है।
सौंदर्य बढ़ाने के लिए नींद की तरह हंसना भी जरूरी है। खुलकर हंसने और हंसकर आस पास का वातावरण प्रसन्न रखने वाले व्यक्ति का वृद्धत्व आने पर भी स्वास्थ्य व सौंदर्य बना रहता है।
घर लौटे पति के सामने न खोलें समस्याओं की पोथी…!

हंसने से चेहरे के स्नायु को कसरत मिलती है। फलस्वरूप चेहरा कांतिमय बना रहता है। हंसमुख व्यक्ति के चेहरे पर झुर्रियां भी बहुत कम पड़ती हैं। सौंदर्य वृद्धि में अच्छे बुरे विचारों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। ईष्र्या, दुख, क्रोध, ग्लानि आदि का भाव सुंदर व्यक्ति को भी असुंदर बना देता है।
ऐसे में जाहिर है कि सौदर्य प्रसाधनों की अपेक्षा प्राकृतिक रूप से ही हम अपना सौंदर्य बढ़ाये तो वह जीवन काल तक बना रह सकता है। सौंदर्य प्रसाधनों का प्रभाव क्षणिक होता है और वह विपरित परिणाम देने वाला भी साबित हो सकता है, इसलिए हंसना बेहद जरुरी है।
– नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी

Share it
Top