सौंदर्य को निखार रहे हैं अब नकली आभूषण..!

सौंदर्य को निखार रहे हैं अब नकली आभूषण..!

हर व्यक्ति की चाहत होती है कि वह सुंदर और आकर्षक लगे। आकर्षक दिखने की इस चाहत में वह विभिन्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करता है। पुरूषों के मुकाबले स्त्रियों में यह चाहत अधिक मात्रा में होती है।
शादी-ब्याह के अवसरों पर इन मौकों की रौनक बढ़ाने वाली महिलाओं के पहनावे और साज श्रृंगार में भारी परिवर्तन होता जा रहा है। आज वे अपनी नेल-पॉलिश, पाउडर, बिंदी, मेल खाती लिपस्टिक पर जहां एक ओर ध्यान दे रही हैं, वहीं वे दूसरी ओर विभिन्न प्रकार के अलंकृत आभूषणों का भी प्रयोग करने लगी हैं।
ये आभूषण आज नारी के सौंदर्य में चार चांद लगाए हुए हैं। कोई नहीं कह सकता कि ये नकली गहने हैं। इनकी चमक, डिजाइन व अलंकरण बिलकुल असली गहनों जैसे होते हैं।
आज के इस बदले फैशन परिवेश में जब सोने के दाम आम आदमी की पहुंच के बाहर निकल गए हैं, तब उसकी सौंदर्य पिपासा को पूरा करने के लिए नकली गहनों ने असली गहनों का स्थान ले लिया है।
हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति के अनुसार मानव को जब फैशन का ज्ञान हुआ तो सबसे पहले स्त्रियों ने फूलों के आभूषणों को पहनना शुरू किया। धीरे-धीरे संस्कृति के विकास के साथ-साथ वे गहनों की ओर आए और फिर सोने की कीमतें अधिक होने के कारण नकली गहनों का प्रवेश हुआ।
फैशन के बाजार में ये आभूषण स्त्री के सौंदर्य में जहां चार चांद लगाते हैं, वहीं उसके नैसर्गिक सौंदर्य में भी एक झिलमिलाहट पैदा करते हैं ये आभूषण। यही कारण है कि स्त्रियों का आभूषणों के प्रति लगाव अधिक होता है। नारी चाहे पूर्व की हो चाहे पश्चिम की, अलंकरण के प्रति उसका आकर्षण सहज व स्वाभाविक होता है।
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भारतीय नारी सदैव से सौंदर्यानुरागी रही है, इसलिए उसके शरीर के प्रत्येक अंग के लिए आभूषणों की संरचना हुई है। उनकी मांग के लिए मांग का मोती, शीशफूल, टीका आदि, नासिका भूषण में नासायुक्त, नथ, कान के आभूषणों के लिए कांची तथा पैर के आभूषणों के रूप में पायल आदि पाए जाते हैं। इस प्रकार यह बात सिद्ध हो जाती है कि स्त्री की मांग से लेकर पैर तक के आभूषणों का प्रचलन अत्यंत प्राचीन काल से ही हमारे देश में रहा है।
यह बात और है कि आभूषणों की मूलभूत धातु आकार संरचना में समयानुरूप परिवर्तन होता रहा है। फूलों के आभूषणों के स्थान पर अब धातु के बने आभूषण फैशन में आ गए हैं। नकली गहनों में जहां एक ओर सोने की सी चमक वाले आभूषण आज मार्केट में हैं वहीं दूसरी ओर ‘आक्सीडाइज्ड मेटल’ से बने आभूषण भी मार्केट में आ चुके हैं और आज फैशन की दुनियां की मांग बने हुए हैं। आक्सीडाइज्ड मेटल के बने आभूषण कुछ काले, कुछ चमकदार होते हैं।
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इन आभूषणों की लोकप्रियता हर वर्ग, हर स्तर के लोगों में बढ़ी है। यहां तक कि अब विवाह पर भी आर्थिक विषमता के चलते वधु को सोने की पालिश चढ़े गहनों से अलंकृत देखा जा सकता है।
आभूषणों के क्षेत्र में आने वाली इमीटेशन क्रांति का श्रेय आधुनिक तकनीक से असली हीरों से भी अधिक चमक देने वाले सिंथेटिक डायमंड या अमरीकन डायमंड (जरकन) को भी जाता है। इन ‘अमरीकी हीरों’ ने आभूषण जगत की काया पलट ही कर डाली है। लगभग हर आकार में उपलब्ध इस हीरे की फिनिश व चमक इतनी अच्छी होती है कि असली हीरा भी इसके सामने फीका पड़ जाए। असली-नकली का फर्क कोई पारखी या जौहरी ही बता सकता है।
इन नकली आभूषणों का क्षेत्र काफी वृहद होता है। परंपरागत प्रचलित प्रकारों के अतिरिक्त आदिवासी शैलियों और विदेशी नमूनों के गहने भी भरपूर मात्रा में मिलते हैं। ये नकली आभूषण सस्ते होने के कारण फैशन के बाजार में खूब चलते हैं।
आइए, नकली गहनों के इस फैलते माया जाल से रूबरू होकर इमीटेशन व फैशन ज्वैलरी के क्र य-विक्र य को बढ़ाएं।
– पूनम दिनकर

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