सौंदर्य का प्रतीक है बिंदिया..इसके बिना पूरा नहीं माना जाता नारी श्रृंगार

सौंदर्य का प्रतीक है बिंदिया..इसके बिना पूरा नहीं माना जाता नारी श्रृंगार

bindiya-2भारतीय नारी के माथे पर बिंदी का प्रतीक चिन्ह कब से उसके सौंदर्य और सुहाग का प्रतीक बना, यह अपने आप में शोध का विषय है लेकिन इतना तो निश्चित है कि प्रसाधन अलंकरण मनुष्य की जन्मजात प्रवृति रही है।ये सभ्यता और संस्कृति के चिन्ह भी माने जाते रहे हैं। इसी से इनका प्रचलन संसार में बढ़ता चला गया। जीवन में आनंद और सौभाग्य बना रहे, संभवत: यही अवधारणा नारी जीवन के सौभाग्य के प्रतीक चिन्ह के रूप में उभरी और बिंदी-सिंदूर, चूड़ी-बिछिया, मंगलसूत्र उसके सौंदर्य और सौभाग्य के उपकरण बने।
समय के अंतराल में बिंदी ने अनेक रूप और आकार लिये। अलग-अलग प्रांतों में इसके विविध आकार देखे जा सकते हैं। कहीं यह गोल बड़े आकार में मिलेगी, कहीं बड़ी बिंदी के ऊपर एक सफेद और काली बिंदी देखने को मिलती हैं। कहीं यह माथे के एकदम बीचों-बीच लगाई जाती है तो कहीं भौंहों के बीच सिंदूर की बिंदी। यों तो बिंदी का प्रचलन आज भी जोरों पर है मगर पहले से कम हो गया है। शायद इसीलिए भी कि सिंदूर में अब पहले जैसी शुद्धता नहीं रही और वैज्ञानिक अनुसंधानों ने यह सिद्ध कर दिया है कि खराब सिंदूर से चर्म रोग हो जाता है लेकिन श्रृंगार में विविधता लाने की दृष्टि से बिंदी अनेक रूपों में आई। एक जमाने में कांच की बिंदी का बहुत प्रचलन था जिसे टिकुली भी कहा जाता था। ये कांच की बिंदियां भी अनेक सुंदर डिजाइनों से बनती रही हैं। इन्हें रोल से चिपकाया जाता था। फिर प्लास्टिक की रंग-बिरंगी बिंदिया आई। अब वेलवेट की बनी बिंदियों का चलन है। आजकल तो विविध डिजाइनों की बिंदियां उपलब्ध है। रंगों का तो कहना ही क्या। जरूरी नहीं कि बिंदी लाल रंग ही हो। उसे अब परिधान से मैच करता हुआ भी होना चाहिए।
महिलाओं को बिंदिया का चुनाव निम्न बातों को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए। चेहरे की बनावट के अनुसार बिंदिया के आकार का चुनाव करना चाहिए। अनेक प्रकार के आकर्षक आकार जैसे लंबी रेखा, आड़ी-तिरछी रेखा, अद्र्ध चंद्राकार, त्रिकोण, बड़ी बिंदी के इर्द-गिर्द गोलाई में छोटी-छोटी बिंदिया आदि विशेष लोकप्रिय है। आपके चेहरे पर कैसी बिंदी सुंदर
प्रतीत होगी, इसका निर्णय आइने के सामने बैठकर आप स्वयं कर सकती हैं।
छोटे माथे पर रेखाकार बिंदी लगाने से बड़े माथे का आभास होता है। इसी प्रकार चौड़े माथे पर बड़ी गोल बिंदी लगाने से माथा भरा-भरा लगता है। गोरे रंग पर लाल रंग की बिंदी सुंदर लगती है जबकि सांवला रंग होने पर पीले या गुलाबी रंग की बिंदी लगाई जा सकती है। गेहुएं रंग की त्वचा होने पर हल्के लाल रंग की बिंदी खूब जमती है। आंखें बड़ी हो तो बिंदी का आकार भी बड़ा होना चाहिए जबकि छोटी आंखों वाली स्त्री के लिए छोटी-बिंदी उपयुक्त रहती है।
स्त्री के कद से भी बिंदी का गहरा संबंध है। उदाहरणस्वरूप लंबे कद वाली स्त्री को गोल बिंदी तथा छोटे कद की स्त्री को लंबे आकार की बिंदी शोभा देती है। इस प्रकार मौसम के अनुसार भी बिंदिया का चयन करना उचित होता है। सर्दियों के दिनों में गहरे रंग की बिंदी लगानी चाहिए जबकि गर्मियों के मौसम में हल्के रंग की बिंदी ठीक रहती है। यदि बिंदी का रंग वस्त्रों के रंग से मिलता-जुलता हो तो चेहरे में गजब का निखार आता है।
वयस्क महिलाएं गाढ़े रंग की बिंदिया का चयन करें। इससे महिलायें गंभीर और सौम्य प्रतीत होती हैं। अवसर चाहे विवाह का हो या किसी त्यौहार का महिलाओं को गहरे रंग की ही बिंदिया का प्रयोग करना चाहिए। बिंदिया अपने सुंदर आकार व मनमोहक रंग के कारण प्राचीनकाल से आज तक नारी सौंदर्य बढ़ाती रही है। आधुनिक युग में बिंदिया का महत्त्व और भी बढ़ गया है। नारी श्रृंगार इस के बिना पूर्ण नहीं माना जाता।
– संजय कुमार ‘सुमन’

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