सोच-समझकर पहनिए….व्यक्तित्व को निखारते हैं….आकर्षक डिजाइन के वस्त्र

सोच-समझकर पहनिए….व्यक्तित्व को निखारते हैं….आकर्षक डिजाइन के वस्त्र

sawan-queen-of-kota-event-55d1bdcf0dcfe_gव्यक्तित्व के अनुरूप ही वस्त्रों का चयन करना भी आज के समय में चलन का रूप लेता जा रहा है। अलग-अलग आकार के व्यक्तियों को उनके शरीर पर किस प्रकार की रेखा वाले वस्त्र अच्छे लगेंगे, इसे जानना बहुत ही आवश्यक हो जाता है क्योंकि इस जानकारी के अभाव में हम किसी भी प्रकार के वस्त्र खरीदकर ले आते हैं और उसे पहन कर अपने साथियों एवं सहेलियों के बीच हास्य के पात्र बन जाते हैं।
उर्ध्वाकार  या खड़ी रेखाएं – ये रेखाएं वस्त्र पर लम्बवत् दिशा में रहती हैं। इन रेखाओं की विशेषता यह होती हैं कि इन रेखाओं को देखने वाले की दृष्टि रेखाओं के सहारे ऊपर से नीचे तथा नीचे से ऊपर गतिमान होती हैं जिसके कारण इन रेखाओं वाले वस्त्रों को पहनने वाला व्यक्ति लम्बा प्रतीत होता है। अगर किसी व्यक्ति की चौड़ाई अधिक होती है तो वह लम्बवत् रेखाओं द्वारा कम प्रतीत होने लगती है। इन रेखाओं वाले वस्त्र लम्बे व्यक्ति की अपेक्षा छोटे कद के व्यक्ति के लिए अधिक सहायक होते हैं।उर्ध्वाकार  रेखाओं का प्रयोग गरिमा का प्रभाव उत्पन्न करता है।
क्षैतिज या आड़ी रेखाएं – आड़ी रेखाएं दाएं से बाएं तथा बाएं से दाएं गतिमान होती हैं। इसलिए ये रेखाएं शरीर की चौड़ाई को अधिक तथा लम्बाई को कम करती हैं। आड़ी रेखाओं वाले परिधान लंबे व पतले व्यक्तियों के शरीर पर ही फबते हैं। इन रेखा वाली वस्त्रों को पहनने से मन में आत्मविश्वास की भावना उत्पन्न होती है।
तिरछी रेखाएं – तिरछी रेखाओं वाले वस्त्रों को पहनने से व्यक्ति की लम्बाई एवं चौड़ाई दोनों में ही वृद्धि संभव हो सकती है। तिरछी रेखाएं ढालू होती हैं और उनसे बनने वाला कोण उसकी बढ़ी हुई लंबाई व चौड़ाई का निर्धारण करता है। सामान्य रूप से लम्बवत् तिरछी रेखाएं लम्बाई बढ़ाती हैं तथा आड़ी-तिरछी रेखाएं लंबाई कम होने का भ्रम उत्पन्न कराती हैं। ऐसे वस्त्रों को पहनने से सेक्सी लुक स्पष्ट होती है।
व्रक रेखाएं – ये रेखाएं घुमावदार होती हैं। अगर इन रेखाओं का घुमाव लम्बवत् होता है तो वे लम्बाई बड़े होने का भ्रम देती हैं। अगर घुमावदार रेखाएं आड़ी दिशा में हों तो लम्बाई कम होने का आभास देती हैं। वस्त्रों की व्रक रेखाएं कोमलता, सौम्यता एवं स्त्रीजनोचित भावों को उत्पन्न करने वाली होती हैं।
वी आकार की रेखाएं – वस्त्रों में ये रेखाएं अंग्रेजी के ‘वी’ अक्षर के समान होती हैं। ये रेखाएं जितनी लम्बाई की तरह होती हैं, उतना ही लंबाई बढ़ाने का आभास देती हैं तथा जितनी चौड़ाई की तरफ होती हैं, उतना ही चौड़ाई बढ़ाने का आभास देती हैं। वास्तुशास्त्रियों के अनुसार वी की आकार वाली रेखाओं से युक्त वस्त्र पहनने से प्रेमी के मन में प्रेम का भाव बढ़ता है तथा प्रेमी-प्रेमिका में स्नेहिल संबंध द्रूतगति से पनपते हैं।
अधूरी या खण्डित रेखाएं – ये रेखाएं पूरी लम्बाई या पूरी चौड़ाई में नहीं होती। इन रेखाओं की दिशाएं कुछ-कुछ दूरी पर बदल जाती हैं। इन रेखाओं के विभिन्न प्रकार के प्रयोग से लंबाई तथा चौड़ाई दोनों ही के बढऩे का आभास देता है। ठिंगने व्यक्तियों के लिए ऐसे वस्त्र बहुत ही अच्छे माने जाते हैं।
फूलों के डिजाइन वाले वस्त्र – वस्त्रों में फूलों के बड़े होने पर अधिक चौड़ाई का आभास होता है तथा फूलों के छोटे होने पर कम चौड़ाई का आभास होता है। फूलों के रंग कैसे हैं, इसका भी महत्त्व होता है। रंगों के उचित चयन द्वारा व्यक्तित्व के शालीन, चंचल आदि भावों को आसानी से दर्शाया जा सकता है।
परिधानों में रेखाओं का अत्यधिक महत्व  होता है। परिधान में रेखाएं वस्त्र के छाप द्वारा ही नहीं बल्कि विशेष रूप से कट कर जुडऩे, लेस, पाइपिंग, बटन आदि जैसे साज-सजावट के उपकरणों द्वारा भी बनाई जाती हैं। ये रेखाएं फैशन से प्रभावित होती हैं। शरीर को ‘सूट’ न करने वाली रेखाएं व्यक्ति को भद्दा तथा अनाकर्षक बना देती हैं।
किसी भी परिधान को देखने पर देखने वाले की दृष्टि सबसे पहले उसके रंग पर जाती है, फिर बाह्य आकृति की ओर तथा अंत में परिधान के डिजाइन अथवा नमूने पर। अपने व्यक्तित्व तथा स्वरूप को निखारने के लिए उचित रंग तथा उचित डिजाइन के वस्त्रों का चुनाव करना हमें आना चाहिए। ठिगने व्यक्तियों, दुबले व्यक्तियों, लम्बे व्यक्तियों को अपने अनुरूप डिजाइन वाले वस्त्रों का ही चुनाव करना चाहिए ताकि वे अपने व्यक्तित्व को आकर्षक बना सकें।
– आरती रानी

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