सैक्स वैवाहिक जीवन का आधार स्तंभ है…न बनाये इसके लिए कोई ग्रंथि …!

सैक्स वैवाहिक जीवन का आधार स्तंभ है…न बनाये इसके लिए कोई ग्रंथि …!

Close-up of the feet of a couple on the bed; Shutterstock ID 64226662; PO: aol; Job: production; Client: droneसैक्स को लेकर कोई ग्रंथि:- हमारी सोच और संस्कार कुछ ऐसे हैं कि सैक्स को एक बदसूरत जामा पहनाकर ही देखा जाता है। यौन शिक्षा वैसे तो दी ही नहीं जाती और दी भी जाती है तो सही तरीके से नहीं। जब बच्चे इधर उधर से अश्लील किताबों, फिल्मों या किसी बिगडल बडी उम्र के लडकों से इस विषय में गलत तरीके से ज्ञान प्राप्त करते हैं, इसके दूरगामी परिणाम बाद में जीवन साथी से यौन संबंधों को प्रभावित करते हैं।
जूही और टीना दोनों सहेलियां जब मात्र सात आठ वर्ष की थीं, एक बार उत्सुकतावश सैक्स को लेकर कुछ हरकत में लीन थीं कि जूही के पापा ने उन्हें देख लिया। उन्होंने जूही को इस बात को लेकर इतना डराया धमकाया और सजा दी कि सैक्स को लेकर उसके मन में आतंक बैठ गया। शादी के बाद वह पति को पास नहीं फटकने देती।
विभास डॉक्टर था। उसने धैर्य से काम लिया। मनोचिकित्सक की सलाह लेकर पहले जूही का प्यार से मन जीता, उसके बाद शारीरिक संबंध बनाये क्योंकि, तब तक जूही विभास के प्रति आश्वस्त हो चुकी थी और उसके द्वारा पति पत्नी के शारीरिक संबंधों की सच्चाई भी जान चुकी थी।
अगर जूही के पापा उसकी मां को वो घटना बताकर स्वयं कुछ न कहते तो मां जूही को बेहतर तरीके से समझा पाती और उसे आगे जाकर समस्या का सामना न करना पडता। हो सकता था विभास की तरह समझदार पति न होने पर दूसरा-पुरूष पति का अधिकार न मिलने पर उसे तंग करता या छोड ही देता।
थकान या कोई शारीरिक कमी या रोग:- शारीरिक संबंध आनंदपूर्ण तभी हो सकते हैं जब पति पत्नी स्वस्थ व उत्फुल्ल हों। गृहकार्यों से थककर निढाल स्त्री पति के प्रणय निवेदन पर प्रतिक्रिया देने में असमर्थ रहती है। सैक्स अगर कष्टदायक हो, तब भी स्त्री उससे बचना चाहती है। स्त्री इस विषय को लेकर इतनी शर्म महसूस करती है कि कोई रोग या शारीरिक कमी पति या डॉक्टर को बताने से झिझकती है। पुराणों का यह कथन कि शैय्या में स्त्री को वेश्या की तरह व्यवहार करना चाहिए, अपनी जगह काफी हद तक सही है क्योंकि सैक्स में उन्मुक्त व्यवहार ही पति पत्नी को चरमसुख दे सकता है।
मन का तनावयुक्त होना:- गृहकार्यों के बोझ तले दबी आशा जब थकी हारी रात को पति के साथ लेटी तो बजाए कुछ रूमानी मधुर गुदगुदाती बातों के महरी का रोना लेकर बैठ गई ‘अभी पिछले महीने ही एक सा$डी दी है मैंने, अब पुरानी शॉल मांग रही है।
मैं तो इसके मांगने से तंग आ गई हूं। अच्छी खासी झा$ड लगाई है मैंने मगर डरती हूं काम छोडकर न बैठ जाए।
इस तरह की छोटी मोटी समस्याओं पर विचार करने की जगह शयनकक्ष नहीं है। मिलन व प्यार के आनंद में ये बातें बाधक बन जाती हैंं। पतिदेव का सारा रोमेंटिक मूड उन्हें सुनकर काफूर होता नजर आता है। अगर इस पर वे कुछ कहे बगैर दूसरी तरफ मुंह करके लेट जाते हैं तो यह मत समझिए कि बात खत्म हो गई। पतिदेव पर इसकी जो प्रतिक्रिया हुई है, उसका भुगतान आपको अगले दिन करना पडेगा अपने आंसुओं से।
होना यह चाहिए कि सेक्स के दौरान कुछ पलों के लिए ही सही, दुनिया के झंझटों को भूल कर सिर्फ आनंद की तरंगों में अपने को बहने दें। ये मधुर पल आपको जिम्मेदारियों और तनावों का मुकाबला करने के लिए ऊर्जा से भर देंगे। तब आप उनका मुकाबला बेहतर कर पाऐंगी।
सैक्स के विवाहित जीवन में बहुआयामी परिणाम होते हैं। चूंकि यह एक महज शारीरिक प्रक्रिया या एक एरोबिक व्यायाम मात्र ही नहीं है। यह सच है कि मांसपेशियों को स्वस्थ रखने, हृदय में रक्त प्रवाह को ठीक रखने में इसकी अहम भूमिका है लेकिन मन पर भी इसका प्रभाव कम नहीं पडता। भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से तो यह संतुष्टि देता ही है, विपरीत स्वभाव वाले दंपत्ति के जीवन में जुडाव सौंदर्य, सहजता, गरिमा व स्वस्थ परिपूर्णता भर देता है, अत: जीवन की भागदौड, कशमकश, आपाधापी व धनोपार्जन के फेर में सैक्स के महत्त्व को न भूल जाएं।
– उषा जैन शीरीं

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