सुन्दरता के साथ-साथ बीमारी न लायें पार्लर से

सुन्दरता के साथ-साथ बीमारी न लायें पार्लर से

आजकल सौंदर्य के प्रति बढ़ती रूचि के कारणों से हर उम्र की स्त्रियां ब्यूटी पार्लरों तक पहुंचने लगी हैं। इन पार्लरों में अंग-अंग को खूबसूरती प्रदान करने के लिए अनेक विधियों का इस्तेमाल किया जाता है। ब्यूटी पार्लरों में कृत्रिम प्रसाधनों जैसे- जैल, हेयर स्प्रे, परफ्यूम्स आदि का भी प्रयोग किया जाता है।
इनके प्रयोग से जहां क्षणिक देर के लिए सुन्दरता में निखार आ जाता है, वहीं आप कई तरह की बीमारियों को भी लेकर घर आ जाती हैं। बहुत कम ही महिलाओं को इस सच्चाई का पता है कि वे खूबसूरती निखारने के साथ कई घातक बीमारियों को भी उठा ले आती हैं।
फेशियल एवं मसाज के दौरान प्राय: पार्लरों में ग्राहक को बिस्तर पर लिटाया जाता है। उन बिस्तरों पर पेडिक्योर एवं मेनिक्योर के दौरान गिरने वाले तरल घोलों, घोलों की गंदगियों के कारण अनेक संक्रामक कीटाणु उपस्थित रहते हैं जो महिलाओं के कोमल अंगों से चिपट कर एलर्जी पैदा कर देते हैं। इस प्रकार की एलर्जीयुक्त त्वचा कई महीनों के लम्बे उपचार के बाद ही ठीक हो पाती है।
पार्लरों में उपयोग आने वाले ब्रश, कंघियों, रोलर पिन आदि से भी संक्रमण फैलता है क्योंकि पार्लर में कई वर्ग एवं किस्म की महिलाएं आती हैं। अगर किसी महिला के बालों में रूसी है तो उसी कंघी या ब्रश को अन्य द्वारा उपयोग लाने से बालों में रूसी हो सकती है।
ब्यूटीपार्लर में त्वचा संबंधी एलर्जी की संभावना अधिक रहती है, साथ ही एक्जिमा व कान्टेक्ट डरमेटाइटिस रोगों के फैलने की भी संभावना अधिक बढ़ जाती है। कान्टेक्ट की स्थिति में खुजली होती है तथा त्वचा लाल पड़ जाती है, जहां से पानी रिसने लगता है।
तापमान बढने से बढती है बीमारी
एक्जीमा होने की स्थिति में त्वचा काली पड़ जाती है और मोटी हो जाती है। बाद में उसमें से भी पानी रिसने लगता है। वायरल इंफेक्शन में ‘वार्टसÓ हो जाते हैं जिससे त्वचा पर छोटे-छोटे कड़े फफोले हो जाते हैं। इससे चेहरे की त्वचा पर छोटे-छोटे पानी की तरह दाने हो जाते हैं।
अधिकतर कामकाजी महिलायें जल्दी-जल्दी में फेशियल व ब्लीचिंग आदि करवा कर चली जाती हैं। जल्दबाजी में ठीक तरह से फेशियल नहीं करने पर चेहरे की त्वचा के छिद्र स्थायी रूप से खुले रह जाते हैं और उनमें फुंसियां हो जाती हैं।
बैक्टीरियल इंफेक्शन में त्वचा पर लाल-लाल दाने, मवाद वाले घाव, लाल चकत्ते, सूजन व बुखार, गांठें, फफोले, आदि भी हो सकते हैं। संक्रमण में सिर की त्वचा के अलावा शरीर की त्वचा पर भी जुंए हो सकती हैं। प्रोटोजोएल इन्फेक्शन में स्केबीज से पीडि़त होकर हाथ-पैर में खुजली व पानी वाले दाने निकलने लगते हैं।
प्राय: सौंदर्य विशेषज्ञा हाथ धोने की बजाय तौलिए से पोंछ कर दूसरे ग्राहक का काम करने लग जाती हैं। उसी हाथ से शीशियों में पैक क्रीमों को भी अंगुली की सहायता से निकाला जाता हैं।
स्वाद लें पर स्वास्थ्य पर आंच न आने दें
इससे क्रीम भी संक्रमण युक्त हो जाते हैं और उनमें स्थित रोगकारक जीवाणु त्वचा, आंखों व बालों पर प्रहार कर सकते हैं।
पार्लरों में जाना हानिकारक नहीं होता अगर सतर्कता रखी जाये तो। ऐसे पार्लर का चुनाव करना चाहिए जो साफ-सुथरा व प्रकाशयुक्त हो। पार्लर में काम करते वक्त ब्यूटीशियन द्वारा हाथों पर दस्ताने का उपयोग करने से संक्रमण फैलने का खतरा नहीं रहता।
बच्चों व संवेदनशील त्वचा वाली महिलाओं को बाल कटवाने के बाद एंटीसेप्टिक लोशन का उपयोग करना चाहिए या मेडीकेटेड शैम्पू से बाल धो लेने चाहिए ताकि किसी प्रकार की एलर्जी व संक्रमण न हो सके। एलर्जी, जुकाम व छूत की बीमारी से पीडि़त महिला को ब्यूटी पार्लर न जाकर अपना ब्यूटी उपचार घर पर ही करना चाहिए।
पार्लर जाते समय जहां तक संभव हो सके, अपनी ही कंघी, ब्रश, पिन, नेलकटर, तौलिया, नैपकिन व गाउन ले जाना चाहिए। सौंदर्य प्रसाधन-आई लाइनर, लिपस्टिक, फेस पाउडर भी अपना ही इस्तेमाल करें तो बेहतर है। ब्राइडल मेकअप के दौरान अपनी सौंदर्य सामग्री को ही अपने साथ ले जायें।
पार्लर से घर आने पर अपने कपड़ों को बदल लें। हिफाजत से ही सुरक्षित रहा जा सकता है अन्यथा पार्लर जाना खतरनाक भी हो सकता है।
– पूनम दिनकर

Share it
Top