सुनो मोदी जी…!

सुनो मोदी जी…!

सुकुमा नक्सली हमले में 26 सीआरपीएफ जवानों की शहादत पर प्रधानमंत्री मोदी से आक्रोश जताती कविता-सुपर पावर हमारा देश है, मोदी बताते है,
मिले मौका तो हर रैली में सीना ठोंक जाते हैं,
बताते हैं कि रक्षा दल बहुत मजबूत हैं मित्रों,
हमारा अर्ध सैनिक बल बहुत मजबूत है मित्रों,
हमारे पास चौपर-ड्रोन हैं, तकनीक है भारी,
हमारे पास हर इक जंग की पूरी है तैयारी,
वो कहते हैं कि मित्रों, हम अलग अरमान रखते हैं,
हमीं हैं जो कि सेना का सदा सम्मान रखते हैं,
मगर सुर आपके भी आज यूं बदले नजऱ आये,
हमें हर एक भाषण में फकत जुमले नजऱ आये,
हकीकत है कि़ सत्ता के नशे में चूर लगते हो,
अरे मोदी हमें तुम भी बहुत मजबूर लगते हो,
बहुत लाचार हो, कमज़ोर हो, ताकत नहीं बाकी,
लगी मर्दानगी झूठी, रही हिम्मत नहीं बाकी,
तुम्हे देकर विजय हम खुद हृदय से हार जाते हैं,
हमारे सैनिको को नक्सली जब मार जाते हैं,
रहम की नीति से उनका मनोबल तोड़ देते हो,
फकत मरने को अंधे जंगलों में छोड़ देते हो,
न है रणनीति कोई, सिर्फ बातों के पुलिंदे हैं,
बिछी हैं हर तरफ लाशें, महोदय अब भी अंधे हैं,
लड़ोगे ख़ाक तुम क्या चीन पाकिस्तान से मोदी जी,
हैं घर में नक्सली जो, ले रहे हैं जान मोदी जी,
गली के भी लफंगों में, तुम्हारा डर नहीं कोई
कि़ मोदी और मनमोहन में अब अंतर नहीं कोई,
उधर कश्मीर में वो चंद पत्थरबाज ऐंठे हैं,
इधर ये नक्सली सेनाओं की लाशों पे बैठे हैं,
कि रक्षा नीतियां हमको तुम्हारी फेल लगती हैं,
शहादत सैनिको की बस सियासी खेल लगती हैं,
सभी भंडार आयुध के कबाड़ी हो गए है क्या?
हमारे सूरमा कायर अनाड़ी हो गए हैं क्या़ृ?
रंगा है खून से फिर नक्सली ने आज माटी को,
दमे का रोग लग बैठा है क्या छप्पन की छाती को,
अगर कुछ शर्म हो बाकी, तो ये ऐलान कर डालो,
ठिकाने दुष्ट नक्सलियों के सब शमशान कर डालो,
ये कवि गौरव कहे, हमले हवाई आज होने दो,
जिन्हें रोना है नक्सलवाद पर भरपूर रोने दो,
रहम का अब कोई कोटा न रखिये, क्रूर हो जाओ,
करो अंतिम लड़ाई, संधियों से दूर हो जाओ,
जमा है रंग आईपीएल का, बेफिक्र भारत है,
उजाले चौकों-छक्कों के, अंधेरों में शहादत है,
पतन इस देश का इस दौर में पक्का न हो जाए,
कहीं कुछ साल में ये देश ही छक्का न हो जाए,
…..कवि गौरव चौहान

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