सुख समृद्धि दायक हैं श्रीगणेश लक्ष्मी पूजा

सुख समृद्धि दायक हैं श्रीगणेश लक्ष्मी पूजा

oदीपावली यानी दीप पक्तियां, अमावस्या को जब चन्द्रमा और सूर्य दोनों किसी भी एक डिग्री पर होते हैं तो गहन अंधकार को जन्म देते हैं। दीपावली गहन अंधकार में भी प्रकाश फैलने का पर्व है। यह त्योहार हम सभी को प्रेरणा देता है कि अज्ञान रूपी अंधकार में भटकने के बजाये हम अपने जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश से उजाला करें और जगत के कल्याण में सहभागिता करें।दीपावली की रात्रि को माता महालक्ष्मी की कृपा जिस व्यक्ति या परिवार पर हो जाये, वह कभी भी धन अभाव महसूस नहीं करता और हमेशा सुख-समृद्धि से युक्त हो जाता है। धन की आवश्यकता हर किसी को होती है। धन के बिना जीवन अधूरा है क्योंकि आवश्यकताओं की पूर्ति धन के अभाव में नहीं हो सकती। जीवन जीने के लिये धन तो चाहिये ही।दीपावली के शुभ अवसर पर महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिये कुछ पूजा-आराधना इस प्रकार से करनी चाहिये कि पूरे वर्ष धन-धान्य में वृद्धि होकर सुख-समृद्धि बनी रहे और निरन्तर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। रावण के पास जो सोने की लंका थी, कहते हैं वह लंका रावण को महालक्ष्मी की कृपा से ही प्राप्त हुई थी। रावण के भाई कुबेर जो धनाधिपति के रूप में भी जाने जाते हैं, उनके साथ भी लक्ष्मी का शुभ आर्शीवाद ही था।दीपावली के शुभ अवसर पर भगवती श्री महालक्ष्मी जी एवं श्रीगणेश जी का ही विशेष पूजन किया जाता है, क्योंकि पूरे वर्ष में एक यही पर्व है जिसमें लक्ष्मी का पूजन भगवान विष्णु के साथ नहीं होता क्योंकि भगवान विष्णु तो चार्तुमास शयन कर रहे हैं, इसलिये लक्ष्मी जी के साथ श्री गणेश जी का पूजन दीपावली के शुभ अवसर पर किया जाता है।
– श्रीगोपाल नारसन

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