साथी हो जब शक्की मिजाज…!

साथी हो जब शक्की मिजाज…!

यह विश्वास ही है जो रिश्तों को पुख्ता बनाता है। विश्वास के अभाव में सब बिखर जाता है। जीवन साथी का साथ जीवन भर का होता है। इस रिश्ते में विश्वास होना बेहद जरूरी है क्योंकि विश्वास ही प्यार को सींचने का काम करता है। अगर विश्वास की जगह शक ले लेता है तो प्यार को मुरझा कर मरते देर नहीं लगती।
शक करना मानव व्यक्तित्व का एक ऐसा लक्षण है जो उसके ‘डिफेंस मेकेनिज़्म’ से जुड़ा है। इसकी पॉजिटिव साइड को नकारा नहीं जा सकता लेकिन जहां तक पति पत्नी के रिश्ते का सवाल है, इसमें इसकी बिलकुल गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। पूर्ण समर्पण और विश्वास ही इस रिश्ते को सुखमय बनाते हैं लेकिन ऐसा सब के साथ नहीं हो पाता।
वास्तव में देखा जाए तो शक हमारी जिंदगी के ताने-बाने में बारीकी से गुंथा है, इसलिए इस बीमारी को पहचान पाना इतना आसान नहीं। थोड़ा बहुत शक करने वाले को हम शक्की नहीं कह सकते। जब शक एक्सट्रीम होकर पूरे वजूद पर छा जाए, व्यक्ति का रोजमर्रा का जीवन उससे प्रभावित होने लगे, उसका सुख चैन खत्म हो जाए, वो हंसना खिलखिलाना भूलकर गुमसुम शक के घर में कैद असंतुलित व्यवहार करने लगे, तब मनोचिकित्सक के पास जाना जरूरी हो जाता है। काउंसलिंग की नौबत आ जाती है।
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ऐसे में रोग से लडऩे की जरूरत है, रोगी से नहीं। जैसे कहावत है कि ‘घृणा पाप से करो पापी से नहीं।’ रोगी को तो खुद ही अपने रोग के बारे में पता नहीं होता, इसलिए उसे सहानुभूति की जरूरत है। आज जब महिला सशक्तिकरण की धूम मची है, पुरुषों के प्रति सहानुभूति कम हो चली है। ऐसे में जरूरत है समझदारी की जिसकी औरत से ज्यादा उम्मीद की जा सकती है।
शक की इस बीमारी के पनपने का कारण जेनेटिक तथा बायोकेमिकल तो है ही, साथ ही परवरिश और सामाजिक परिवेश भी है। कुछ पूर्वाग्रह भी जिम्मेदार हैं। आजकल रोज अखबारों टीवी पर न्यूज होती हैं कि बीवी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति का कत्ल करवा दिया या खुद कर दिया। ऐसी नेगेटिव बातें दिमाग को विषाक्त कर देती हैं।
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कभी-कभी पत्नी का बेहद खूबसूरत होना पति के शक्की होने का कारण बन जाता है। इसके अलावा पत्नी का जवान और पति का उम्रदराज यानी उम्र का फासला भी पति को इनसीक्योअर बना देता है। पति का प्यार कभी-कभी ऑब्सेशन की हद तक होता है। इसके चलते भी वो पैरानोइक की तरह बिहेव करने लगता है।
जीवन में समस्याएं हैं तो उनका निराकरण भी है। पति पत्नी के रिश्ते में ट्रांसपेरेंसी होनी चाहिए। वर्तमान जीवन में एक दूसरे से जरा भी दुराव छुपाव नहीं होना चाहिए। पत्नी रिश्ते में ईमानदारी बरतेगी तो पति उस पर सहज ही विश्वास कर पाएंगे।
संवाद हमेशा बनाए रखें। मन ही मन घुटते रहने के बजाय खुलकर अपनत्व से बात करें। घर को युद्धस्थल न बनाएं। पति पत्नी दोनों के लिए उदार दृष्टिकोण रखना हितकर होगा। डबल स्टैंडर्ड न रखें। स्थिति बेकाबू हो तो सायकेट्रिस्ट की मदद जरूर लें। शक्की पति को आपका सहयोग और केयर चाहिए। याद रखें तोडऩा बहुत आसान है। चुनौती का सामना मुश्किल जरूर है लेकिन रिज़ल्ट सुखद होगा।
– उषा जैन ‘शीरीं’

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