सांत्वना देना सीखें

सांत्वना देना सीखें

जब कभी कुछ गम का समय हो तो मात्र रोकर या किसी दूसरे के साथ चुपचाप मन में अच्छे समय को याद करके गम तो हल्का कर सकते हैं पर उस परिस्थिति से उबारने के लिए गमगीन व्यक्ति को दो सांत्वना भरे शब्द कहने से आप उस गमगीन को गमों से उबार सकते हैं।
उस समय जिन शब्दों का प्रयोग करें, वे नपे तुले और तसल्ली भरे होने चाहिएं। हर इंसान में यह गुण मिलना मुश्किल है। कोशिश करें, ऐसे समय में दूसरे के दुखों को कुरेद कर दुगुना न करें बल्कि हल्का करें।
दुख भी कई प्रकार के हैं। शब्दों का चयन भी दुख के अनुसार होना चाहिए। किसी के अचानक व्यवसाय में आए घाटे पर यदि आप उन्हें भाषण देने लगेंगे तो उनका दुख दुगुना हो जाएगा या धीरज खत्म होने लगेगा। ऐसे में आप उनकी हिम्मत बढ़ाएं और किसी दूसरे व्यवसाय या नौकरी के लिए सुझाव दें। घर में महिलाएं पढ़ी लिखी हैं तो उन्हें ट्यूशन आदि करने का सुझाव दें। ऋण योजनाओं की पूरी जानकारी दे सकते हैं। यदि आप मदद करने योग्य हैं तो उनकी मदद कर सकते हैं। खाली बातों के ढोल न पीटें।
किसी की सगाई टूटने पर यदि आप उनके घर जा रहे हैं और अगर आप पहले से कारण को जानते हैं तो पुन: उन कारणों को न दोहराएं। यदि कुछ बात शुरू हो तो उन्हें तसल्ली देते हुए समझाएं कि भगवान ने आपको किसी बड़ी विपदा से बचा लिया है। सगाई टूटना कोई जिंदगी का अंत नहीं है। इसे सामान्य समझ कर पुन: दूसरे रिश्ते की तलाश कुछ दिन समय बाद शुरू कर सकते हैं।
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किसी का या अपना बच्चा प्रतियोगिता टेस्ट या बोर्ड पेपरों में किसी कारण पिछड़ गया है तो उसे बहुत गंभीरता से न लें। बच्चे का हौंसला बढ़ाते हुए समझाएं कि एक बार और परिश्रम करने से आप अधिक ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं। बच्चे को किसी मदद की आवश्यकता हो तो उसे यथासंभव मदद देने की पूरी कोशिश करें।
यदि आप किसी के घर अफसोस हेतु जा रहे हैं तो अपने कपड़ों का विशेष ध्यान रखें। ऐसे में तड़क भड़क वाले कपड़े न पहनें, न ही आभूषण लाद कर जायें। सादे हल्के रंग के वस्त्र पहनें। सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग न करें।
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कम से कम शब्दों में सांत्वना दें। ऐसे में आपका साथ उन्हें हौंसला बढ़ाने वाला होना चाहिये। कोशिश करें, बच्चों को अपने साथ ऐसी जगह न ले जायें। यदि ले जाना आवश्यक हो तो बच्चों को घर से ही समझाकर ले जाएं कि वहां शोर न मचाएं, न ही खाने-पीने की मांग करें।
ऐसे में ध्यान रखें कि खाने के समय न जायें, न ही रात को देरी से जायें। काम के समय जाकर उनका हाथ बंटाएं न कि उस समय मेहमानवाजी की उम्मीद करें। लम्बी चौड़ी कहानियों के जाल न फैलाएं। ऐसी बातें कदापि न करें जिनसे वातावरण तनावपूर्ण हो जाए। बहुत जोर से हंसी मजाक भी न करें। इन सब परिस्थितियों में सांत्वना भरे शब्द और आपकी मौजूदगी ही काफी होते हैं।
– सुनीता गाबा

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