सहनशीलता निखारती है आपका व्यक्तित्व

सहनशीलता निखारती है आपका व्यक्तित्व

मनुष्य का व्यक्तित्व उसके उठने, बैठने, चलने, फिरने इत्यादि से बनता है लेकिन सहनशीलता व्यक्तित्व के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। घर हो या बाहर, सभी के लिए सहनशील होना आवश्यक है।
सामान्यत: देखने में आया है कि शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जो हर किसी की बात को बिना कष्ट के सह लेता हो। जो सह लेता है वह दूसरे की नजर में ऊंचा उठ जाता है। आप भी इस सहनशक्ति के गुण से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते।
सहनशीलता भारतीय समाज तथा संस्कृति की प्रेरणा रही है। गीता में भी कहा है ‘सहनशीलता से शक्ति मिलती है। मन और वाणी से किसी को भी दुख नहीं पहुंचाना चाहिए’।
सहनशीलता के अभाव में मनुष्य क्रोधी, चिड़चिड़ा व तनावग्रस्त हो जाता है। उसकी सोचने समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है। वह सभी को अपना दुश्मन समझने लगता है। इस कारण उसके मित्र भी उसके दुश्मन हो जाते हैं।
सहनशीलता का सबसे बड़ा गुण है कि अपने आपको आक्रोश व निराशा से दूर रखें। सहनशीलता की आदत बच्चे को अपने परिवार से सीखने को मिलती है। घर का वातावरण तथा माता-पिता के व्यवहार से ही बच्चों का मार्गदर्शन होता है। अगर माता पिता घर में लड़ते होंगे तो बच्चों में भी क्रोध की भावना आयेगी। सहनशीलता की अपेक्षा अक्सर महिलाओं से ही अधिक की जाती है। वास्तविकता भी है कि अगर महिलायें सहनशील हैं तो वे घर में बच्चों में भी सहनशीलता के विकास में अपना सहयोग दे सकेंगी।
सहनशीलता की आदत आप बच्चों में छोटों के प्रति उदारता की भावना सिखाकर भी कर सकती हैं। एक बार सहन करने की आदत पड़ जाये तो यह आदत किशोरावस्था में काफी लाभकारी रहेगी। जब युवा घर से बाहर कार्यक्षेत्र में प्रवेश करेगा तो सहनशीलता की भावना उसके व्यक्तित्व में चार चांद लगा देगी और वह युवा अपने कार्यक्षेत्र नौकरी हो या व्यवसाय सभी में सफल रहेगा।
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सहनशील होने के लिए आपको देखना होगा कि आप में ये निम्न गुण हैं या नहीं।
– बड़ों की बातों का बुरा न मानें।
– क्रोध पर नियन्त्रण रखें।
– निराशा मिलने पर हतोत्साहित न हों।
– दूसरों की कड़वी बातों पर ध्यान न दें।
– धैर्य से बात करें।
– दूसरों को समझने की कोशिश करें।
– अपनी बुराइयों को छोडऩे की कोशिश करें।
– बड़ों को हमेशा सम्मान दें।
– अपनी बात मनवाने के लिए किसी पर दबाव न डालें।
– दूसरों को वही सम्मान दें जो आप खुद अपने लिए चाहते हैं।
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– कठोर व्यक्ति के साथ भी उदारता का व्यवहार करें।
– अपने मित्र या किसी के साथ भी ऐसा व्यवहार न करें जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचे।
आज के इस भौतिकवादी युग में सफल भी वही होगा जो बिना कुछ कहे धैर्यपूर्वक इन परिस्थितियों का मुकाबला कर सके। जिसने इन सब बातों को सहन कर लिया, वह सुखी नहीं रहेगा तो कभी दु:खी भी नहीं होगा। जिसमें सहनशीलता की भावना नहीं होगी, वह अपनी जिंदगी को कांटों की सेज बना लेगा।
सहनशीलता की भावना किसी व्यक्ति में आ जाती है तो जहां वह अपने से बड़ों की नजर में ऊंचा उठ जायेगा, वहीं कुछ लोग आपसे प्रेरणा भी लेंगे।
– नीलम गुप्ता

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