सरकारी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग का मामला....यूपी में कर्मचारी संगठनों का गुस्सा फूटा

सरकारी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग का मामला....यूपी में कर्मचारी संगठनों का गुस्सा फूटा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 50 साल की आयु पूरी कर चुके कर्मचारियों के कामकाज की स्क्रीनिंग के आदेश का कर्मचारी संगठनों और विपक्षी दलों ने पुरजोर विरोध किया है। 
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार का यह आदेश बेतुका है। पचास वर्ष से अधिक के कर्मचारियों को बाहर निकालना अमानवीय है। कर्मचारियों के कार्यशैली की स्क्रीनिंग और इस आधार पर उनकी छंटनी को कतई तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता। इस फैसले पर सरकार की मंशा साफ नहीं है। अगर सरकार ऐसा कोई कदम उठाती है, तो संगठन इसका पुरजोर विरोध करेंगे। नियमित नियुक्ति पर सरकार ने पहले ही रोक लगा रखी है। श्री मिश्रा ने कहा कि सरकार से इस बारे में बात की जायेगी और यदि सरकार फैसला वापस नहीं लेती है, तो पूरे राज्य मे एक बडा आंदोलन खडा किया जायेगा। सरकार का यह कदम निजीकरण को बढावा देने वाला है। इससे बेरोजगार नवयुवकों को रोजगार पाने में असुविधा होगी। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने भी सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि पहले से ही राज्य में बेरोजगारी बहुत है। यह निर्णय और बेरोजगारी को और बढायेगा। अखिलेश सरकार में आठ लाख नौजवानों को रोजगार दिया जबकि भाजपा सरकार की बेरोजगारी घटाने के वायदे खोखले नजर आते हैं। सरकार का यह निर्णय बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।

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इससे बेरोजगारी की स्तर बढेगा और राज्य में अराजकता फैलेगी। कांग्रेस के नेता सैफ नकवी ने कहा कि सरकार अफसरशाही पर योजनाबद्ध तरीके से अपनी सोच थोपना चाहती है। यह निर्णय कर्मठ कर्मचारियों में भी संशय पैदा करने वाला है। सरकार के पास ऐसा कोई मापदंड नहीं है, जिससे वह निर्णय ले सके कि कौन कर्मचारी काम करता है और कौन नहीं। पार्टी का मानना है कि इस तरह के निर्णय से सरकार का काम और धीमा होगा और नये अफसरों का मनोबल कम होगा। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पिछले सरकारों की कार्यशैली की वजह से कुछ अफसर और कर्मचारी अकर्मठ हो गये थे, जिससे सुचारु रुप से कार्य करने में बाधा उत्पन्न होती है। सरकार का यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए है।

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श्री त्रिपाठी ने कहा स्केल और स्पीड से काम करवाना सरकार की मंशा है। जो कर्मचारी या अधिकारी अपने कार्यो में स्पीड ला पा रहे हैं, वे अपने पद छोड दें। प्रदेश की भाजपा सरकार जनता की उम्मीद पर खरा उतरने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। भाजपा के महासचिव विजय बहादुर पाठक ने कहा कौन काम कर सकता है इसका आंकलन तो होना ही चाहिए। योग्यता और क्षमता के आधार पर कर्मचारियों और अधिकारियों के काम का निर्धारण होना चाहिए ,क्योंकि कौशल विकास के माध्यम से ही उत्तर प्रदेश के विकास की राह प्रशस्त की जा सकती है।

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