समय की मांग है वृद्ध जनों का सम्मान..जीवन का एक अहम हिस्सा है वृद्धावस्था ..!

समय की मांग है वृद्ध जनों का सम्मान..जीवन का एक अहम हिस्सा है वृद्धावस्था ..!

 विभिन्न सामाजिक, आर्थिक कारणों से आज अधिकांशत: एकल परिवार बढ़ रहे हैं। महानगरों में अनेक ऐसे वृद्धजन हैं जिनके बच्चे विदेशों में नौकरियां कर रहे हैं। वे ही माता-पिता, जिन्होंने उन बच्चों को सुरक्षित कर विदेश जाने के योग्य बनाया है, अपनी वृद्धावस्था में पड़ोसियों की मदद के मोहताज हैं। विदेशों में बसे बच्चे उन्हें रुपये तो भेज सकते हैं किन्तु व्यक्तिगत रूप से समय नहीं दे सकते।
बुजुर्गों को जो सुख अपने नाती-पोतों को खिलाने, पढ़ाने, घुमाने में मिलता था, उससे आज वे सर्वथा वंचित होते जा रहे हैं। संयुक्त परिवारों में सहज ही बच्चों की देखरेख हो जाती थी और आज व्यवसायिक, यांत्रिक युग में बच्चों की देखरेख हेतु क्रेच (पालनाघर) हैं। बुजुर्गों हेतु ‘ओल्डएज हाउस’ हैं। वर्ष में एक बार ‘ग्रेंड पैरेन्ट्स डे’ मनाकर समाज बुजुर्गों के ऋण से मुक्त होना चाहता है।
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संस्थागत रूप से ओल्ड एज होम्स में कुछ बच्चे अपने लिये उसी तरह ग्रेंड पैरेन्ट्स मनोनीत करते हैं जिस तरह अनाथ आश्रम के बच्चों को लोग गोद लेते हैं। भौतिकता की अंधी भागदौड़ में वृद्धों के प्रति सम्मान घटा है। सार्वजनिक स्थलों में वृद्धों हेतु अलग लाइनों की कानूनी व्यवस्था से ज्यादा कारगर वृद्धों के प्रति सार्वजनिक सम्मान की भावना के संस्कारों का विकास है। कानूनी रूप से शासन ने वृद्धावस्था पेंशन, रेल एवं बस में किराये पर छूट, वृद्धों हेतु बैंकों में ज्यादा ब्याज दर आदि लाभ सुनिश्चित किये हैं किन्तु समय की वास्तविक मांग है कि वृद्धों के प्रति सम्मान की नैतिकता का विकास किया जाये।
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वृद्धावस्था जीवन का एक अहम हिस्सा है। वृद्धों की अपनी ही समस्याएं होती हैं। स्वास्थ्य, सार्वजनिक जीवन में उन्हें महत्त्व, परिवार में बड़प्पन वृद्धों हेतु आवश्यक हैं। एक दिन हम सब को वृद्ध होना है। वृद्धों के पास शारीरिक शक्ति की भले ही कमी हो पर उनके पास अनुभवों का खजाना होता है। जनरेशन गैप के चलते वृद्धजन समय से तालमेल बैठाने में कठिनाई का अनुभव करते हैं। वर्तमान तेजी से बदलते सामाजिक, सांस्कृतिक मूल्यों के कारण उनका मन आहत होता है। केवल परिवार का प्यार ही उनके इस आहत मन पर मरहम लगा सकता है।
समाज में विभिन्न योजनाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिये। घर, परिवार, समाज, और सरकार, हर स्तर पर वृद्धजनों के प्रति सम्मान के प्रयास समय की मांग हैं।
-विवेक रंजन श्रीवास्तव

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