सब्जियां और पोषक तत्व

सब्जियां और पोषक तत्व

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दिनभर के भोजन में इंसान को अपने भोजन का पांचवां भाग फलों और सब्जियों के रूप में लेना चाहिए। सब्जियों से रेशे, खनिज विटामिन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। इनके अलावा शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए बायोलेवोनाइड्स (प्राकृतिक हार्मोन्स) और एंजाइम्स (पाचक रस) जैसे पदार्थ भी फलों व सब्जियों से ही प्राप्त होते हैं।
बेहतर स्वास्थ्य के लिए भोजन में सब्जियों का उचित मात्रा में इस्तेमाल आवश्यक है क्योंकि उनमें अनेक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं पर सब्जियां पकाने के दौरान या रगड़कर धोते समय उनके पौष्टिक तत्व या तो पानी के साथ बह जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं, अत: उनके खाने का बेहतर तरीका यही है कि उन्हें या तो कच्चा ही खाया जाए या भाप में पकाकर या फिर भूनकर खाया जाए। सब्जियों को उबालना नहीं चाहिए।
स्थानीय से बाहरी सब्जियों तक: मौसम के अनुसार स्थानीय सब्जियों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। स्थानीय सब्जियों के सेवन पर जोर इसलिए दिया जाता है क्योंकि उनके ताजा होने की गारंटी होती है। कुछ सब्जियों के पोषक तत्व उनके तोडऩे के साथ ही नष्ट होना शुरू हो जाते हैं। इसलिए ऐसी ताजा सब्जियों की तुलना में जमा की गई सब्जियां अधिक पौष्टिक मानी जाती हैं।
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भोजन के रूप में इंसान तक पहुंचने में कुछ साग-सब्जियों को एक लंबा समय लगता है। ऐसे में तब तक उनकी पौष्टिकता बनाए रखनी पड़ती है यद्यपि यह हर मौसम की सब्जियों के लिए कठिन काम है। खासकर गर्मी के मौसम में तो यह काम और भी कठिन हो जाता है कि कैसे उनके कुदरती रूप को बनाए रखा जाए। इसके लिए कोल्ड स्टोरेज बढिय़ा विकल्प हैं। फलियां, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, कद्दू और टमाटर को 10 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर स्टोर किया जाना चाहिए। अन्य सब्जियों को 0 डिग्री सेल्सियस पर संग्रह किया जाना ठीक होता है।
आज के समय में जब बहुत भारी वैज्ञानिक सुविधाएं हैं तो बहुत-सी महंगी सब्जियां बेमौसम में भी शहरों के सुपर बाजारों में उपलब्ध होने लगी हैं। ऐसी महंगी सब्जियों में एक नाम एवोकाडो का भी है जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर है और इसे खाना और स्टोर करना दोनों ही आसान है।
बाहर से आने वाली सब्जियों में सी वेजिटेबल प्रमुख हैं जो कि असाधारण रूप से खनिजों तथा सब्जियों में पाए जाने वाले दुर्लभ विटामिन बी 12 का मुख्य स्त्रोत हैं। यदि आप समुद्र तट के आसपास रहते हैं तो खुद उन्हें एकत्र कर सकते हैं। इनको साफ करके कच्चे रूप में आग में भूनकर या फिर इनका सूप बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं।
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मसाले व जड़ी-बूटियों का प्रयोग: सब्जियों की तरह ही अनेक जड़ी-बूटियां भी पौधों के पत्तों व जड़ों से मिल सकती हैं। जड़ी-बूटियां व मसाले भोजन को न सिर्फ स्वादिष्ट बनाते हैं बल्कि भोजन में नमक, चीनी व कृत्रिम यौगिकों के प्रयोग की आवश्यकता को भी पूरा करते हैं। बहुत-सी जड़ी-बूटियां बाजार में उपलब्ध होती हैं तो कुछ को घर की छत्त या बालकनी में रखे गमलों में भी उगाया जा सकता है।
सब्जियां और मौसम
मौसम उपलब्ध मौसमी सब्जियां
० वसंत ऋतु छोटी-बड़ी सेम, फूलगोभी, पत्तागोभी, गाजर, गांठगोभी, हरी प्याज, पालक, मूली।
० ग्रीष्म ऋतु चुकंदर, गाजर, फ्रेंच बीन्स, खीरा, मूली, टमाटर, पालक, आलू , मटर।
० शरद ऋतु गांठगोभी, पत्तागोभी, गाजर, फूलगोभी, पालक, कद्दू , लौकी, टमाटर।
० शीत ऋतु फूलगोभी, बंदगोभी हरी, लाल तथा सफेद बंदगोभी, लीक (प्याज जैसी गांठदार सब्जी), अजवाइन के सलाद के पत्ते, गाजर, शलजम।
– नरेंद्र देवांगन

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