सबसे बड़ा सुख: निरोगी काया

सबसे बड़ा सुख: निरोगी काया

यह सच है कि जीवन का सबसे बड़ा सुख निरोगी काया है। धन है पर शरीर स्वस्थ नहीं तो उस धन का सुख कैसे उठाया जा सकता है। निरोग रहना ही सुखी जीवन का आधार है। निरोग रहने के लिए अपने आस पास के माहौल, खान पान और अपनी आदतों में सुधार लाना होगा। नियमबद्ध तरीके से जीवन को चलाना होगा।
– रात को भोजन हल्का, सुपाच्य लें। रात्रि का भोजन सोने से कम से कम दो घंटे पहले लेना चाहिए।
– भूख लगने पर ही भोजन खायें। जितनी भूख हो, उससे कुछ कम भोजन खाएं।
– टिंड फूड का सेवन कम से कम करें क्योंकि इनमें पोषक तत्व अधिकतर नष्ट हो जाते हैं। ताजा भोजन शरीर के स्वास्थ्य हेतु उत्तम होता है।
– जब भोजन करें, मन को शान्त रखें और खुश रहते हुए भोजन का पूरा आनन्द लें।
– ताजे फल सब्जियों को पचाने में कम शक्ति लगती है। इनमें विटामिन और खनिज भी भरपूर मात्रा में होते हैं जिन्हें रक्त आसानी से सोख लेता है। इसलिए ताजे फल सब्जियों का ही सेवन करें।
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– दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी अवश्य लें। पानी शरीर से विषैले तत्वों को निकालने में मदद करता है।
– खाना खाते समय पानी का सेवन न करें। अधिक इच्छा हो रही हो तो एक दो घूंट पानी ही पिएं।
– ‘फाइबर’ से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। अधिक फाइबर हेतु सलाद, दलिया और चोकरयुक्त रोटी का सेवन करें। ‘फाइबर’ झाडू का काम करता है और कब्ज से दूर रखता है।
– भोजन में चीनी व नमक का सेवन सीमित मात्र में करें। अधिक नमक ब्लडप्रेशर बढ़ाता है और हड्डियों को कमजोर करता है। अधिक चीनी से मधुमेह का खतरा भी बना रहता है।
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– प्रात: हल्के फुल्के व्यायाम, प्राणायाम और सैर आदि अवश्य करें। इससे शरीर चुस्त बना रहता है।
– सक्रिय जीवन जिएं ताकि शरीर चुस्त बना रहे। निष्क्रिय जीवन शैली शरीर को सुस्त बनाने के साथ साथ कई बीमारियों के द्वार भी खोलती है।
– सोच को सकारात्मक रखें। नकारात्मक सोच मन को अशांत बनाती है जिससे हम निरोग नहीं रह सकते।
तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने से ही हम निरोगी रह सकते हैं और अपनी मंजिल को पाने में सक्षम हो सकते हैं।
– नीतू गुप्ता

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