सपा-भाजपा के लिए समस्या बने बागी और असंतुष्ट..पार्टी को उसकी औकात दिखाने में जुटे..!

सपा-भाजपा के लिए समस्या बने बागी और असंतुष्ट..पार्टी को उसकी औकात दिखाने में जुटे..!

 गोरखपुर/कुशीनगर । विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां संजीदा हैं। सभी दलों के प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में पूरी ताकत के साथ जीत सुनिश्चित करने में जुटे हैं लेकिन दूसरी ओर इनके दल के दिलजले गले की हड्डी बन गए हैं। विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका तय करने में जुटे ये बागी किसी भी कीमत पर अपने समर्थकों को खोना नहीं चाह रहे हैं। शायद यही वजह है कि निर्दल चुनाव लड़कर खुद को सिद्ध करना कहते हैं और पार्टी को उसकी औकात दिखाने में जुटे हैं। कुशीनगर में इसका ज्यादा असर है। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को इस समस्या से ज्यादा दिक्कतें ही रहीं हैं। बगावत की आवाज यूँ तो टिकट न मिलने के साथ ही उत्पन्न होने लगी थी, लेकिन अब यह जमीनी हकीकत में तब्दील हीने लगी हैं। कुशीनगर के खड्डा विधानसभा में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की हालत चिंताजनक है। हालांकि अभी दोनों पार्टियां अपनी हालात सुधारने में जुटीं हैं लेकिन हालात इतनी जल्दी नहीं सुधारने वाले। सपा के कद्दावर नेता और मुलायम सिंह यादव को जूता दिखा चुके बालेश्वर यादव के पुत्र इस विधानाभा में जोर-आजमाइश कर रहे हैं। इनके साथ सजातियों के होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन बाहरी होने के नाते कितना समर्थन मिलेगा, भविष्य के गर्त में है। सपा के पूर्व घोषित प्रत्याशी नथुनी कुशवाहा का टिकट कटने अब कुशवाहा बिरादरी नाराज है। नथुनी कुशवाहा को भी सपा कार्यकर्ता सन्देश की दृष्टि से देख रहे हैं। इतना ही नहीं नथुनी की कम हुई सक्रियता भी इस संदेह को मजबूती दे रही है। राजनीतिक जानकारों की माने तो खड्डा विधानसभा में सपा से जुड़े रहने वाले कुशवाहा भाजपा या बहुजन समाज पार्टी की ऒर रुख कर सकते हैं।
यूपी चुनाव : लखीमपुर में मोदी और राहुल की टक्कर आज
 वजह, बसपा छोड़ भाजपा का दमन थमने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या का प्रभाव और नथुनी की नाराजगी इन्हें सपा से दूर कर सकती है। ऐसे में सपा का वोट बैंक बिखरेगा और इसका लाभ भाजपा या बसपा को मिलने का कयास लगा जा है। दूसरी ओर, भाजपा खेमे की स्थिति भी नाजुक है। गोरखपुर से खड्डा में चुनाव लड़ने आए भाजपा उम्मीदवार जटाशंकर की दुश्वारियां बढ़ रहीं हैं। टिकट की कतार में लगे भाजपा नेताओं ने भी चुप्पी साध ली है। ऐसे में स्थानीय नेताओं के सक्रियता की कमी है और मतदाता असमंजस में हैं। अधिक दिनों से क्षेत्र में समय देने वाले नेताओं के न आने से उनके समर्थकों में उत्साह की कमी है और गांव-गांव में भाजपा के समर्थन में आए लोग उम्मीदवार से सीधे तौर पर न जुड़े होने के नाते मायूस हैं। उन्हें नहीं सूझ रहा है कि क्या करें? हर मतदाता अपने जान-पहचान वाले उम्मीदवार से जुड़कर खुद को मजबूत साबित करने की फ़िराक में हैं। कांग्रेस से नाता तोड़ भाजपा में शामिल होने वाले विजय दुबे ने बगावत कर निर्दल प्रत्याशिता ठोकी है। ऐसे में ब्राम्हण मतदाताओं में बिखराव की संभावनाएं बलवती हैं। स्थानीय ब्राम्हण मतदाता विजय दुबे और जटाशंकर त्रिपाठी में चुनाव नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि राजनीतिक जानकार इसे कोई बड़ी समस्या नहीं मान रहे हैं। इनका मनना है कि भाजपा का कैडर वोटर भारी संख्या में अब भी भाजपा के साथ है और इसमें ब्राम्हण भी शामिल है। इस बार भी वह भाजपा का दामन थामे रहेगा। यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ब्रम्हशंकर त्रिपाठी कुशीनगर विधानसभा से विधायक हैं। भाजपा ने इनके खिलाफ खांटी संघी और भाजपाई रजनीकांत मणि त्रिपाठी को मैदान में उतारा है। यह बात अलग है रजनीकांत मणि त्रिपाठी पहली बार चुनावी मैदान में हैं और ब्रम्हशंकर के आगे इनकी हैसियत काफी छोटी है। बावजूद इसके मुसलमानों की नाराजगी और पिछले चुनाव में ‘जावेद हराओ’ नारे के साथ सपा खेमे से जुड़े भाजपाई इस बार अलग हो रहे हैं। मुस्लिम मतदाताओं का रुझान बसपा की ओर होना भी इनकी कमजोरी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। रजनीकांत मणि त्रिपाठी संपर्क के माध्यम से जनता के बीच अपनी उपस्थिति लगातार दर्ज करा रहे हैं, लेकिन अजगर बन चुके भाजपाई इन्हें अपने दरवाजे तक खींचने की जुगत में हैं। निष्क्रिय बने ये भाजपाई उन्हें यह बताना चाहते हैं कि हमारे बिना जीत पक्की नहीं है। यानि संपर्क कम करे और पहले अपने ही दल के अजगरों को मानाने का काम करें। बावजूद इसके आम जन में रजनीकांत की छवि में उत्तरोत्तर सुधार हो रहा है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो स्वामी प्रसाद मौर्या के आने से कुशीनगर में भाजपा से कोईरी बिरादरी का लगाव बढ़ा है। ब्रम्हशंकर से नाराज ब्राम्हणों को भी एक ब्राम्हण प्रत्याशी मिला गया है।
महोबा में ग्रामीणों ने मुआवजा तथा पुनर्वास को लेकर की मतदान बहिष्कार की घोषणा !
ऐसे में सपा से नाराज ब्राम्हण भाजपा से जुटने में कोई परहेज नहीं करेगा। इन दोनों जातियों के मतदाताओं ने पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा का साथ नहीं दिया था और एंटी जावेद वोटिंग कर ब्रम्हशंकर त्रिपाठी के पक्ष में वोट किया था। बसपा से अपना भाग्य आजमा रहे बंटी राव चर्चा में तो हैं, लेकिन राजभरों में भाजपा में जुड़ने से इनका वोट प्रतिशत प्रभावित होने की संभावना है। मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव इन्हें कमजोर करेगा। पिछले चुनाव में जावेद के बसपा से प्रत्याशी होने पर लगभग 70 प्रतिशत मुसलमानों ने इन्हें अपना मत दिया था और वे बमुश्किल 45 हजार मत प्राप्त करने में सफल हुए थे। इसमें मुस्लिम, अतिपिछड़े और दलित मत का भारी योगदान रहा। इस बार परिस्थितियां बदलीं हैं। भासपा से गठबंधन होने के नाते भाजपा को राजभर मत मने के पूरे आसार हैं। अगर ऐसा हुआ तो बसपा उम्मीदवार के लिए यह घातक साबित होगा। फाजिलनगर से गंगा सिंह कुशवाहा और सपा नेता विश्वनाथ सिंह से सीधी टक्कर की बात कही जा रही है। लेकिन पूर्व में घोषित सपा प्रत्याशियों के मनाये जाने के बाद भी उनके समर्थक विश्वनाथ के पक्ष में खुलकर नहीं आ रहे हैं। इससे विश्वनाथ की दुश्वारियां बढ़ रहीं है। तमकुहीराज में कांग्रेस विधायक अजय लालू सपा-कांग्रेस गठबंधन से ताल ठोक रहे हैं। जिनकी हालात कछार क्षेत्रों में अच्छी मानी जाती है, लेकिन सपा के डॉ. पी.के. राय ने विद्रोह कर अपनी मंशा जता दी है। ऐसे में गठबंधन का क्या हश्र होगा भविष्य के गर्त में है। भाजपा के पूर्व विधायक नंदकिशोर मिश्र तथा श्रीकांत मिश्र के बगावत ने भाजपा प्रत्याशी जगदीश मिश्र उर्फ़ बाल्टी बाबा के सामने भी संकट खड़ा कर दिया है। पत्रकार को धमकाने वाले हाटा विधायक और निवर्तमान मंत्री राधेश्याम सिंह की दुश्वारियां भी बढ़ गईं हैं। ऐसा माना जा रहा है यहां से भाजपा के घोषित प्रत्याशी पवन केडिया का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और राधेश्याम द्वारा पत्रकार को अपशब्द कहने से मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग इनके समर्थन में आ रहा है। हालांकि बसपा ने भी अपनी पकड़ मजबूत बना रखी है। रामकोला सुरक्षित सीट पर भी बसपा और भासपा में सीधी टक्कर मानी जा रही है। यहां सपा अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटी है। 

Share it
Share it
Share it
Top