सपा के लिए रणनीति के साथ सकारात्मकता भी महत्वपूर्ण

सपा के लिए रणनीति के साथ सकारात्मकता भी महत्वपूर्ण

यूपी विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद समीक्षा और मंथन के दौर से गुजर रही समाजवादी पार्टी द्वारा अपना स्लोगन बदलने का फैसला किया गया है। अब पार्टी का नया नारा होगा- आपकी साइकिल सदा चलेगी आपके नाम से, फिर प्रदेश का दिल जीतेंगे हम मिलकर अपने काम से। विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह स्लोगन समाजवादी पार्टी के पोस्टरों में दिखा था और अब इसे आधिकारिक तौर पर अपना लिया गया है। उस वक्त परिवार में झगड़े के बाद मुलायम खेमे की नाराजगी ज्यादा थी और अखिलेश यादव द्वारा बार-बार दोहराया जा रहा था कि पार्टी उनके पिता मुलायम सिंह की ही है और हमेशा उन्हीं के नाम से चलेगी। उस वक्त अखिलेश यादव कहा करते थे कि वह यूपी में फिर सरकार बनाकर अपने पिता को तोहफा देंगे। अब विधानसभा चुनाव में जीत न मिलने के बाद पार्टी में चिंतन-मनन व समीक्षा महत्वपूर्ण है। क्यों कि यूपी के विधानसभा चुनाव नतीजे घोषित होने और राज्य में नयी सरकार की ताजपोशी के बाद अखिलेश यादव सहित सपा के अन्य नेताओं के बयान भी सामने आये हैं, जिससे ऐसा लगता है कि यूपी के विधानसभा चुनाव के बाद अब पार्टी अपनी भावी राजनीतिक संभावनाओं को मजबूत बनाने की दृष्टि से कुछ ठोस निर्णयों को अंजाम देने तथा रणनीति तय करने की कवायद करने वाली है। क्यों कि अभी पिछले दिनों ही राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी चीफ अखिलेश यादव ने कहा है कि मैं 2022 में फिर मुख्यमंत्री बनूंगा।
सपा के पार्टी अध्यक्ष अखिलेश को विधान परिषद में नेता विपक्ष चुनने का दिया अधिकार..!
इसके अलावा पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव का भी यही कहना है कि वह प्रदेश में फिर सरकार बनाएंगे। इससे स्पष्ट है कि पार्टी नेता अपने भावी राजनीतिक लक्ष्य से विचलित नहीं हुए हैं। पार्टी हित में ऐसा जरूरी भी है क्यों कि 2019 में लोकसभा चुनाव भी होना है, इस दृष्टि से चुनावी तैयारियों में पार्टी को अभी से जुट जाना होगा। साथ ही पार्टी हितों की दृष्टि से सोच मे सकारात्मकता जरूरी है ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल कायम रहे। क्यों कि हतोत्साहित होने से कोई भी लक्ष्य कभी पूरा नहीं किया जा सकता। अखिलेश यादव का कहना है कि विधानसभा चुनाव में हार की बड़ी वजह, उनके वो बेहद करीबी लोग थे, जिन्होंने जमीनी हकीकत से उन्हें दूर रखा। पार्टी नेताओं के साथ बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने कहा है कि मेरे बेहद करीबियों ने मुझे धोखा दिया, वे बताते कुछ और थे और जमीन पर हकीकत कुछ और ही थी। समाजवादी रहे अति पिछड़ों को साथ जोडऩे में कमी रह गई। सपा चीफ अखिलेश यादव का कहना है कि हार के कारणों की गहराई से समीक्षा हो रही है। भितरघात करने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। उनपर कार्रवाई भी की जाएगी। समय रहते अगर सच्चाई बताई होती तो चुनाव के नतीजे कुछ और होते। अखिलेश यादव द्वारा सपा के सदस्यता अभियान पर भी जोर देते हुए कहा गया है कि पार्टी संघर्ष के बल पर सत्ता में लौटती रही है, और फिर लौटेगी। जनता के बीच संघर्ष का संदेश जाएगा। सदस्यता अभियान पर ध्यान दिया जाए। अब संघर्ष का समय आया है।
प्रतिबंध झेल रहे शिवसेना सांसद गायकवाड़ ने फिर बुक कराया एयर इंडिया का टिकट, हुआ रद्द
वैसे समाजवादी पार्टी में चिंतन-मनन का यह जो दौर चल रहा है वह पार्टी के राजनीतिक हितों व भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्यों कि अगर कमियों को दूर नहीं किया जायेगा तो पार्टी के राजनीतिक पुनरुत्थान के लक्ष्य को कैसे पूरा किया जा सकेगा। बावजूद इसके अखिलेश यादव द्वारा पार्टी के ही अन्य नेताओं और अपने करीबियों पर यदि जरूरत से ज्यादे सवाल उठाये जायेंगे तो अंतर्कलह का दौर फिर तेज होने और पार्टी के अंतर्द्वंद्व में बढ़ोत्तरी के लिये इसे ही जिम्मेदार माना जायेगा। ऐसे में आवश्यक है कि सपा के सभी नेता, समर्थक शुभचिंतक बैठकें व वाद-संवाद करके आपसी सुलह का मार्ग प्रशस्त करें तथा पार्टी की पूरी दृढ़ता सुनिश्चित करते हुए भावी राजनीतिक व रणनीतिक रूप रेखा तय करें। समाजवादी पार्टी यूपी विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी है। इस दृष्टि से उसकी जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है कि वह अपने नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में विधानसभा के अंदर सजग, संवेदनशील व प्रतिबद्ध विपक्ष की भूमिका निभाए। वहीं सदन के बाहर भी सरकार के कामकाज के आधार पर सत्ता को लेकर अपना दृष्टिकोण निर्धारित करे व आवश्यक कदम भी उठाए। संगठनात्मक, सृजनात्मक व आंदोलनात्मक गतिवधियां ही किसी राजनीतिक संगठन की कामयाबी का आधार बनती हैं। सपा की राजनीतिक ताकत फिर से बढ़ाने तथा पार्टी को देश के आगामी लोकसभा चुनावों की दृष्टि से भी पार्टी की आंतरिक एकजुटता बेहद जरूरी है। पार्टी नेता आपसी मतभेद भुलाकर काम करेंगे तथा पार्टी में उपयुक्त लोगों को उपयुक्त जिम्मेदारियां सौंपे जाने से पार्टी का राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल ही रहेगा। चुनाव में हार-जीत तो लोकतंत्र का नियम है और आवश्यकता भी। इस लिहाज से समाजवादी पार्टी के लिये अब संगठनात्मक सुदृढ़ता को अंजाम देने व संघर्ष का समय है।-सुधांशु द्विवेदी

Share it
Share it
Share it
Top