संगीत में है जादू

संगीत में है जादू

संसार भर के लोग अब फिर से गीत संगीत से होने वाले फायदों को तलाशने में जुटे हैं। प्रागैतिहासिक काल में संगीत द्वारा रोगों की चिकित्सा किये जाने के प्रमाण वैदिक ग्रंथों में भी मिलते हैं।
मानसिक रोगों के लिए प्राचीनकाल में भजन कीर्तन एवं मंत्रोच्चार का उपयोग जैसे हुआ करता था। आज भी डिप्रेशन, स्टै्रस लेवल कम करने तथा सामुदायिक बंधनों की मजबूती के लिये संगीत का सहारा लिया जाता है।
रिसर्च द्वारा यह प्रमाणित हो चुका है कि संगीत स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। इससे न केवल रक्त संचार, पाचन क्रि या और ब्रीदिंग सुचारू रहते हैं बल्कि कई लोगों का दावा है कि संगीत के उपचार से ही वे हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बच पाए हैं।
संगीत में वो शक्ति है जो व्यक्ति को राग, द्वेष व ईष्र्या जैसी विघटनकारी भावनाओं से मुक्त कर परम शांति का अनुभव कराती है।
हमारे नर्वस सिस्टम पर स्वर लहरी का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और नेगेटिव इमोशंस तथा साइकोसोमेटिक प्रॉब्लम्स पर औपचारिक प्रभाव, इसलिए तीन एच हैल्थ, हैपीनेस और हार्मोंनी के लिए म्यूजिक थेरेपी की सलाह दी जाती है।
बाल कथा अहिंसा का जादू
म्यूजिक विभिन्न धर्मो से भी गहराई से जुड़ा मिलता है। अधिकांश लोग आज भी संगीत चिकित्सा विशेषज्ञों को धार्मिक आस्था से जोड़ कर देखते हैं तथा मानते हैं कि गाने बजाने से जो रोग दूर किया जाता है वह विशेषकर इष्टदेव की कृपा से होता है मगर वास्तव में संगीत के प्रभाव से रोग ठीक होता है।
संगीत सुनकर अलग-अलग लोग अलग-अलग रिएक्ट करते हैं। एक ही ढंग का संगीत या राग व्यक्ति की मनोदशा के अनुसार उस पर असर डाल सकता है। संगीत का संबंध व्यक्ति की आत्मा से है। संगीत को इसलिए ‘फूड फॉर सोल’ कहते हैं।
फलों और सूखे मेवों द्वारा संभव है रोगोपचार
यह अफसोस की बात है कि आज संगीत का स्टैंडर्ड गिर गया है। आज का संगीत क्षणिक सुख है। वो पैरों को थिरकन तो देता है मगर आत्मा तक नहीं पहुंचता, इसीलिए देर तक इसका रस नहीं लिया जा सकता जब कि पुराने संगीत में संतुलन बोल, लय, ताल और साज अपने आप में परिपूर्ण होते थे। आज बोल और भावनाओं की जगह साज ने ले ली है। ऐसे में भावनाओं की अभिव्यक्ति के बिना संगीत का जादू चल नहीं पाता।
हमारे पास संगीत की एक समृद्ध परंपरा है। शास्त्रीय गायन, राग और उन पर आधारित लाइट म्यूजिक जिसे रफी किशोर, लता ने अमरत्व प्रदान कर दिया है, आज की पीढ़ी में भी लोकप्रिय हैं।
– उषा जैन ‘शीरीं’

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