श्रीलंकाई विधेयक के विरोध में मछुआरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

श्रीलंकाई विधेयक के विरोध में मछुआरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल


श्रीलंकाई विधेयक के विरोध में मछुआरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

रामेश्वरम।  श्रीलंका सरकार के नये मत्स्य पालन विधेयक के विरोध में तमिलनाडु के रामेश्वरम में यांत्रिक नावों के मछुआरों ने आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी और उन्होंने सामूहिक आत्मदाह करने की भी चेतावनी दी। श्रीलंका ने इस विधेयक के जरिये अपने नियंत्रण वाले जल क्षेत्र में नाव चलाने पर प्रतिबंध लगाने, दो साल तक की कैद और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आमतौर पर व्यस्त रहने वाली रामेश्वरम जेटी वीरान हो गयी है क्योंकि पांच हजार से अधिक मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने नहीं उतरे हैं। इस जेटी पर मछुआरों की 800 नौकायें पंजीकृत हैं। विभिन्न मछुआरा संघों के नेताओं ने आरोप लगाया कि विधेयक का लक्ष्य तमिलनाडुु के मछुआरों को पाक बे में आने से रोकना और डराना है। उन्होंने कहा कि मछुआरे 14 जुलाई को रामेश्वरम पोस्ट ऑफिस के सामने सामूहिक आत्मदाह करेंगें। रामेश्वरम पोर्ट मैकेनाइज्ड बोट फिशरमैन एसोसिएशन के अध्यक्ष एन जे बोस ने कहा कि विधेयक से तमिलनाडु के मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी इसलिए केंद्र सरकार काे इस विधेयक को वापस लेने के लिए श्रीलंका सरकार पर दबाव डालना चाहिए।

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उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाक बे में शांतिपूर्ण तरीके से मछली पकड़ना सुनिश्चित करने के लिए श्रीलंका से बातचीत करने की अपील करते हुए मछुआरों की आजीविका के लिए वैकल्पिक प्रबंध करने की भी मांग की। आंदोलनरत मछुआरे गत दो वर्षाें के दौरान श्रीलंकाई जेलों में बंद 67 भारतीय मछुआरों की तत्काल रिहाई और कब्जे में ली गयी 160 नावों को भी छोड़ने की मांग कर रहे हैं।

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