‘शिवाय’ V/S ‘ए दिल है मुश्किल’!

‘शिवाय’ V/S ‘ए दिल है मुश्किल’!

a-dil-hai-mushkilजब भारत में सोशल मीडिया के प्रचार प्रसार ने जोर पकड़ा, तब लगा था कि इससे हरेक व्यक्ति को अभिव्यक्ति का मंच मिलेगा और विभिन्न मसलों पर गंभीर वैचारिक बहस से एक नई सामाजिक जागरूकता पैदा होगी। दुर्भाग्यवश, इसका उल्टा हो रहा है। कुछ लोगों ने इसे हथिया कर इसे दुष्प्रचार का मंच बना दिया है।
सोशल मीडिया की ताकत इस कदर बढ़ चुकी है कि बाकायदा फिल्म निर्माण कंपनियों ने फिल्म के प्रमोशन बजट का 33 प्रतिशत सोशल मीडिया के नाम कर रखा है। महज एक साल में सोशल मीडिया पर पब्लिसिटी बजट को फिल्म कंपनियों ने 5 गुना तक बढ़ा दिया है। किसी भी ‘ए’ क्लास की फिल्मों का सोशल मीडिया प्रमोशन बजट 5 से 25 करोड़ हो चुका है।
बेशक इसके बावजूद फिल्म की सफलता सुनिश्चित नहीं हो पाती लेकिन मेकर्स को भरोसा है कि बहुत जल्द सोशल मीडिया फिल्म प्रमोशन का सबसे बड़ा मंच साबित होगा। ज्यादातर मेकर्स स्वीकार कर चुके हैं कि सोशल मीडिया किसी फिल्म को बना या बिगाड़ सकता है। उन्हें लगता है कि मल्टीप्लेक्स आने के बाद टिकट दर अचानक इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि दर्शक पूरी तरह ठोक बजा लेने के बाद अपने हिसाब से अपनी मनपसंद फिल्में देखता है और फिल्म देखी जाये या नहीं, इसके लिए सोशल मीडिया सबसे ज्यादा सशक्त माध्यम बन चुका है।
इस साल दीवाली पर रिलीज होने जा रही अजय देवगन की ‘शिवाय’ और करण जौहर की ‘ए दिल है मुश्किल’ को इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर प्रमोट किया जा रहा है।
बतौर निर्देशक एक फ्लॉप देने के बाद अजय देवगन ‘शिवाय’ के साथ एक बार फिर निर्देशन में लौट रहे हैं, वहीं करण खुद के निर्देशन में चार साल बाद कोई फिल्म लेकर आ रहे हैं। करण की फिल्म का बजट 90 करोड़ और अजय देवगन की ‘शिवाय’ का 165 करोड़ है। पहले अजय अपनी फिल्म को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे लेकिन जब से ‘ए दिल है मुश्किल’ के टीजर को यंगस्टर्स का अच्छा रिस्पांस मिला है, वह अपसेट हैं। अपनी फिल्म को प्रमोट करना बुरी बात नहीं, लेकिन दूसरे की फिल्म की आलोचना नहीं होनी चाहिए लेकिन कमाल खान (के.आर.के.) सोशल मीडिया पर यही सब कुछ कर रहे हैं। कमाल खान एक चौथे दर्जे के फिल्म निर्माता और स्वयंभू फिल्म समीक्षक के रूप में खुद को मशहूर करते रहे हैं जिन्हें अक्सर गालियां बकने से भी गुरेज नहीं होता।
मायानगरी मुंबई में रोजाना न जाने कितने लोग हसीन ख्वाब लेकर आते हैं, और जुगनू की तरह टिमटिमाने के बाद लापता हो जाते हैं लेकिन के.आर.के. सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण आज तक मायानगरी में टिका हुआ है। के.आर.के. की खासियत है कि वह किसी भी विषय पर सोचे बिना कुछ भी बोल देते हैं। किसी भी नामचीन हस्ती के विरूद्ध अचानक निंदा अभियान चला देते हैं। वो बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के लुक्स से लेकर एक्टिंग तक बेहद अटपटे ढंग से सवाल खड़े करते आ रहे हैं, इसी कारण उन्हें लोकप्रियता मिली।
शिवाय के को-प्रोडयूसर कुमार मंगत के साथ कमाल खान की एक ऑडियो रिकॉडिंग सामने आने पर बॉलीवुड में हड़कंप सा मच गया। उस ऑडियो में कमाल खान को यह कहते सुना गया कि उन्होंने देवगन की फिल्म ‘शिवाय’ की आलोचना के लिए करण जौहर से 25 लाख रूपये लिए है।
कमाल खान स्वीकार कर चुके हैं कि ‘शोरगुल’ और ‘वन नाइट स्टेंड’ जैसी फिल्मों की पॉजिटिव पब्लिसिटी के लिए उन्हें 10-12 लाख रूपये मिले थे लेकिन अजय देवगन और करण जौहर विवाद में नाम जुडऩे के बाद उन्होंने पैसा लेकर रिव्यू करने से इन्कार किया है। वे शायद इस बात को लेकर डर गये हैं कि इस तरह नाम उजागर होने के बाद, आगे करण जौहर की तरफ से उन्हें काम मिलना बंद हो सकता है।
के.आर.के. ने आरोप लगाया है कि अजय देवगन, करण से अपनी दुश्मनी का बदला, उन्हें माध्यम बनाकर ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि करण से 25 लाख मिलने की बात उन्होंने सिर्फ कुमार मंगत को टालने के लिए कही थी।
अजय देवगन का कहना है कि वे 25 साल से इस इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। 100 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं। उनके पिता मशहूर एक्शन डायरेक्टर रहे हैं। इसलिए के.आर.के. जैसे लोगों को इस फिल्म इंडस्ट्री को अपने नकारात्मक विचारों से अपनी मुटठी में रखते देखना बहुत तकलीफ देता है।
– सुभाष शिरढोनकर

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