शिक्षा बिना दीक्षा के अधूरी हैः गुरु चंद्रमोहन

शिक्षा बिना दीक्षा के अधूरी हैः गुरु चंद्रमोहन

मेरठ। देव ऋण, पितृ ऋण और गुरु ऋण से मुक्त होने का सूत्र जनेऊ है। चैन, सुख, सुकून और शांति तब तक संभव नहीं है, जब तक हम इन तीनों ऋणों से मुक्त न हो जाएं। यह बातें क्रांतिकारी गुरु चंद्रमोहन ने परमधाम अरिहंतपुरम में आयोजित जनेऊ क्रांति महोत्सव के दौरान कहीं। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से की गई।
अनुयायियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों ने हर्ष और उमंग के लिए बहुत तरीके अपनाए, जिनमें पूजा-पाठ, समाज सेवा और बहुत कुछ किया। मगर असली सुख और चैन जनेऊ से मिलेगा। वर्तमान में जन पूजा का सबसे बड़ा काम जाति रहित एकजुटता का प्रयास करना है।वहीं क्रांतिकारी गुरु चंद्रमोहन ने कहा कि शिक्षा बिना दीक्षा के अधूरी है।शिक्षा से केवल रोजगार और अस्थायी सम्मान मिलता है लेकिन दीक्षा से स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वाभिमान सम्मान और शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी कहा कि महापुरुषों का साथ इन तीन सूत्रों की पूर्ति करने के लिए दूंगा

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